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नाग एमके-2 मिसाइल: भारतीय सेना में शामिल होने को तैयार स्वदेशी एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, जानें खूबियां

By yogesh jindoria | Published: Sep 14, 2026 01:24 PM

नाग एमके-2 मिसाइल: भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की विकसित नाग एमके-2 एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल भारतीय सेना में शामिल किए जाने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है। नाग एमके-2 को मूल नाग मिसाइल का उन्नत संस्करण माना जाता है।

तीसरी पीढ़ी की फायर-एंड-फॉरगेट मिसाइल

नाग एमके-2 तीसरी पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है। इसकी खासियत फायर-एंड-फॉरगेट क्षमता है। यानी लक्ष्य निर्धारित करने के बाद मिसाइल को लगातार ऑपरेटर के निर्देश की जरूरत नहीं होती और यह अपने लक्ष्य की ओर खुद मार्गदर्शन कर सकती है।

इस तरह की क्षमता आधुनिक युद्धक्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है, खासकर ऐसे समय में जब दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों और टैंकों में सुरक्षा के लिए आधुनिक कवच तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है।

आधुनिक टैंकों को निशाना बनाने में सक्षम

नाग एमके-2 को आधुनिक बख्तरबंद वाहनों और टैंकों को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है। इसमें इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) सीकर आधारित गाइडेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है।

यह तकनीक मिसाइल को लक्ष्य की पहचान कर उसे ट्रैक करने में मदद करती है। इसकी पैसिव होमिंग क्षमता के कारण मिसाइल लक्ष्य से निकलने वाले इन्फ्रारेड सिग्नेचर का इस्तेमाल कर सकती है।

नाग मिसाइल का एडवांस वर्जन

नाग एमके-2 मूल नाग मिसाइल परिवार का उन्नत रूप है। नाग परियोजना लंबे समय से भारत के स्वदेशी एंटी-टैंक हथियार कार्यक्रम का हिस्सा रही है। इसके विभिन्न परीक्षणों के बाद सिस्टम को सेना में शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ाया गया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, नाग एमके-2 की लंबाई करीब 1.83 मीटर, व्यास लगभग 150 मिलीमीटर और वजन करीब 42 किलोग्राम है।

NAMICA प्लेटफॉर्म से मिलेगी ताकत

नाग एमके-2 को NAMICA जैसे ट्रैक्ड प्लेटफॉर्म से भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस व्यवस्था से मैकेनाइज्ड फॉर्मेशन को युद्धक्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने और एक साथ कई मिसाइलें ले जाने में मदद मिल सकती है।

यह क्षमता सेना की एंटी-आर्मर क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा

नाग एमके-2 कार्यक्रम भारत के आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन अभियान के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसके उत्पादन में भारतीय रक्षा उद्योग की भूमिका रहेगी। इससे आयातित एंटी-टैंक हथियारों पर निर्भरता कम करने और देश में आधुनिक हथियारों के उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

नाग मिसाइल सिस्टम के ट्रैक्ड संस्करण के लिए रक्षा मंत्रालय ने पहले ही भारतीय उद्योग के साथ अनुबंध किया है, जो इस स्वदेशी एंटी-टैंक प्रणाली को सेना में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

भारतीय सेना की क्षमता होगी मजबूत

नाग एमके-2 के शामिल होने से भारतीय सेना को आधुनिक बख्तरबंद लक्ष्यों के खिलाफ एक स्वदेशी और उन्नत एंटी-टैंक विकल्प मिलेगा। फायर-एंड-फॉरगेट क्षमता, इमेजिंग इन्फ्रारेड सीकर और मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म जैसी खूबियां इसे आधुनिक युद्ध परिस्थितियों के लिए उपयोगी बनाती हैं।

कुल मिलाकर, नाग एमके-2 भारत की स्वदेशी मिसाइल तकनीक और रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने वाली अहम प्रणालियों में शामिल है।

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