नई दिल्ली। महिला आरक्षण कानून को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार से सवाल किया है कि 2023 में संसद से पारित महिला आरक्षण कानून को अब तक लागू क्यों नहीं किया गया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से यह भी पूछा कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से क्यों जोड़ा जा रहा है।
राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि महिला आरक्षण बिल 2023 में संसद से सर्वसम्मति से पारित हुआ था और कांग्रेस ने इसका समर्थन किया था। उनके मुताबिक, कानून पास होने के बावजूद महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में प्रस्तावित आरक्षण अभी तक नहीं मिला है।
राहुल ने सरकार से मांग की कि कानून को बिना किसी अतिरिक्त शर्त के लागू किया जाए। उनका सवाल मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि जब संसद पहले ही महिला आरक्षण से संबंधित कानून पारित कर चुकी है, तो इसके प्रभावी होने में इतनी देरी क्यों हो रही है।
राहुल गांधी ने परिसीमन से जोड़ने पर उठाया सवाल
महिला आरक्षण को लेकर राहुल गांधी का सबसे बड़ा सवाल इसके परिसीमन से जुड़े होने को लेकर है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया का इंतजार क्यों जरूरी है।
वहीं, सरकार की ओर से महिला आरक्षण को परिसीमन के बाद लागू करने की बात कही जाती रही है। इसी मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद देखने को मिल रहे हैं।
राहुल गांधी का कहना है कि महिलाओं को राजनीतिक संस्थाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के लिए कानून को जल्द लागू किया जाना चाहिए।
पहले महिलाओं को लेकर राहुल ने क्या कहा था?
यह विवाद राहुल गांधी के शुक्रवार को जारी किए गए एक वीडियो संदेश के बाद और चर्चा में आया। वीडियो में उन्होंने भारतीय महिलाओं की स्थिति और उनकी अभिव्यक्ति के अधिकार को लेकर अपनी बात रखी थी।
राहुल गांधी ने कहा था कि महिलाओं को खुद को व्यक्त करने और अपने सपनों की कल्पना करने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए। उनका कहना था कि कोई भी देश तब तक पूरी तरह सफल नहीं हो सकता, जब तक वहां की महिलाएं अपनी क्षमता के अनुसार आगे नहीं बढ़तीं।
इसके बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे महिलाओं को लेकर कांग्रेस की सोच में सकारात्मक संदेश बताते हुए उम्मीद जताई कि कांग्रेस बिना किसी शर्त के महिला आरक्षण कानून का समर्थन करेगी।

क्या है महिला आरक्षण कानून?
महिला आरक्षण से संबंधित कानून को नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के नाम से जाना जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए लगभग एक-तिहाई यानी 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना है।
यह कानून संसद से पारित होने के बाद देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था।
हालांकि, कानून के प्रावधानों के अनुसार इसका वास्तविक क्रियान्वयन तत्काल नहीं होना है। इसके लिए जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया का प्रावधान रखा गया है।
परिसीमन से क्यों जुड़ा है महिला आरक्षण?
महिला आरक्षण कानून के लागू होने से पहले निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों की संख्या से संबंधित परिसीमन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। इसी वजह से महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर देखा जा रहा है।
सरकार की ओर से प्रस्तावित व्यवस्था के तहत भविष्य में लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना पर भी चर्चा है। दिए गए विवरण के मुताबिक, मौजूदा 543 लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 816 किए जाने का प्रस्ताव बताया गया है।
इसके बाद महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित किए जाने की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
क्यों महत्वपूर्ण है महिला आरक्षण?
भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लंबे समय से बहस का विषय रही है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए आरक्षण को एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
महिला आरक्षण लागू होने के बाद संसद और राज्य विधानसभाओं में बड़ी संख्या में महिलाओं के चुने जाने का रास्ता खुल सकता है। इससे कानून निर्माण और नीतिगत फैसलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, इसके क्रियान्वयन की समयसीमा और परिसीमन से जुड़े प्रावधानों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है।
सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ सकती है बहस
महिला आरक्षण को लेकर राहुल गांधी का ताजा बयान ऐसे समय आया है, जब परिसीमन और लोकसभा सीटों की संभावित संख्या बढ़ाने को लेकर भी राजनीतिक चर्चा तेज है।
विपक्ष का जोर महिला आरक्षण को जल्द लागू करने पर है, जबकि सरकार की व्यवस्था परिसीमन के बाद इसे लागू करने से जुड़ी है।
अब देखना होगा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच आगे किस तरह की राजनीतिक सहमति बनती है। फिलहाल राहुल गांधी के सवालों ने इस मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
महिला आरक्षण कानून को लेकर बहस सिर्फ राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की चुनावी व्यवस्था, परिसीमन और संसद की संरचना से भी जुड़ गई है। राहुल गांधी ने सरकार से कानून को बिना शर्त लागू करने की मांग करते हुए परिसीमन से इसके संबंध पर सवाल उठाया है। वहीं सरकार की ओर से मौजूदा कानूनी प्रक्रिया के तहत परिसीमन के बाद आरक्षण लागू करने की बात कही जा रही है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर संसद और राजनीतिक दलों के बीच बहस और तेज होने की संभावना है।