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भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने UNGA में की भारत की तारीफ, दोस्ती को बताया ताकत

By yogesh jindoria | Published: Sep 23, 2026 04:39 AM

UNGA में भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने की भारत की तारीफ, GMC के लिए दोस्ती को बताया बड़ी ताकत

नई दिल्ली: भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भारत के साथ अपने देश के संबंधों की सराहना की। उन्होंने भारत को भूटान का करीबी दोस्त और पड़ोसी बताते हुए कहा कि भारत के साथ मजबूत संबंध भूटान के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC) प्रोजेक्ट के लिए महत्वपूर्ण ताकत हैं। भारत और भूटान के बीच ऊर्जा, कनेक्टिविटी और विकास सहयोग समेत कई क्षेत्रों में साझेदारी लगातार बढ़ी है।

GMC की लोकेशन को बताया बड़ी ताकत

टोबगे ने GMC की भौगोलिक स्थिति को इसकी प्रमुख ताकतों में से एक बताया। यह प्रस्तावित शहर भारत की सीमा के करीब स्थित है और भूटान के लिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी तथा आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण परियोजना है।

उन्होंने कहा कि GMC को शुरुआत से ही ऐसे पड़ोसी का समर्थन मिल रहा है, जिसके साथ भूटान के लंबे समय से मजबूत संबंध हैं। भारत ने भी इस परियोजना के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की है।

भारत सरकार और असम से भी समर्थन

भूटान के प्रधानमंत्री ने GMC को लेकर भारत सरकार और सीमा से लगे असम के साथ सहयोग का भी उल्लेख किया। भारत और भूटान के बीच सीमा-पार कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

भारत ने गेलेफू में आने-जाने वाले लोगों और निवेशकों की सुविधा के लिए असम के हातिसार में इमिग्रेशन चेक पोस्ट स्थापित करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अलावा असम के समरांग में नया लैंड कस्टम्स स्टेशन भी परिचालन में आया है।

भारत-भूटान रिश्तों में कनेक्टिविटी पर जोर

भारत और भूटान के बीच गेलेफू-काकराझार और सम्त्से-बनारहाट क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक पर भी काम आगे बढ़ रहा है। दोनों देशों ने सितंबर 2025 में सीमा-पार रेलवे संपर्क स्थापित करने के लिए समझौता किया था। प्रस्तावित रेल लिंक की कुल लंबाई करीब 89 किलोमीटर है।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य दोनों देशों के बीच लोगों और सामान की आवाजाही को आसान बनाना तथा व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

भारत ने GMC के लिए दोहराया समर्थन

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सितंबर 2026 में भूटान यात्रा के दौरान भूटान के विकास लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। दोनों देशों ने ऊर्जा, कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान और विकास सहयोग समेत द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की।

इस दौरान GMC भी चर्चा के प्रमुख विषयों में रहा। दोनों पक्षों ने परियोजना से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से आगे काम जारी रखने पर सहमति जताई।

ऊर्जा क्षेत्र में भी मजबूत साझेदारी

भारत और भूटान के रिश्तों में जलविद्युत सहयोग लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। हालिया बातचीत में दोनों देशों ने ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर भी प्रगति की समीक्षा की।

भारत ने भूटान में ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 4,000 करोड़ रुपये की रियायती लाइन ऑफ क्रेडिट का स्वागत किया है। दोनों देशों ने पनबिजली परियोजनाओं और भारतीय कंपनियों की भागीदारी को लेकर भी सहयोग जारी रखने पर जोर दिया।

डिजिटल पेमेंट और अन्य क्षेत्रों में सहयोग

भारत और भूटान के बीच सहयोग अब पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र से आगे बढ़कर डिजिटल तकनीक और भुगतान व्यवस्था तक पहुंच रहा है। UPI आधारित सुविधा के जरिए भूटानी नागरिक भारत में अपने भूटानी मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल करके डिजिटल भुगतान कर सकते हैं।

दोनों देश अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। इसमें ग्लेशियर और जंगलों की निगरानी, बाढ़ प्रबंधन तथा कृषि के लिए सैटेलाइट डेटा के इस्तेमाल जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

भारत-भूटान रिश्तों की लंबी पृष्ठभूमि

भारत और भूटान के बीच राजनयिक संबंध 1968 में स्थापित हुए थे। दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय यात्राओं और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के जरिए द्विपक्षीय संबंध आगे बढ़े हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय से जुड़े आधिकारिक विवरण के मुताबिक, दोनों देशों के संबंध विश्वास, सद्भावना और करीबी जनसंपर्क पर आधारित हैं।

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