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बॉर्डर से 50 KM तक अब हर प्रोजेक्ट पर गृह मंत्रालय की नजर, इन 3 देशों से जुड़े स्टाफ पर भी सख्ती

नई दिल्ली। देश की सीमाओं के आसपास राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रोजेक्ट्स को लेकर कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत बॉर्डर से 50 किलोमीटर तक के क्षेत्र में सोलर, विंड और हाइब्रिड एनर्जी प्रोजेक्ट लगाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी लेना जरूरी होगा।

इन दिशा-निर्देशों में सिर्फ प्रोजेक्ट की अनुमति ही नहीं, बल्कि वहां काम करने वाले इंजीनियरों, कर्मचारियों और श्रमिकों की सुरक्षा जांच को लेकर भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। खास तौर पर पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश से संबंधित किसी व्यक्ति के प्रोजेक्ट में इंजीनियर या अन्य स्टाफ के तौर पर काम करने की स्थिति में केंद्र सरकार की अनुमति जरूरी होगी।

सरकार का यह कदम सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संभावित जोखिमों को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

50 किलोमीटर के दायरे में प्रोजेक्ट पर सुरक्षा मंजूरी जरूरी

जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक सीमा से 50 किलोमीटर के भीतर सौर, पवन और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाओं को शुरू करने से पहले सुरक्षा मंजूरी लेनी होगी।

ऐसे प्रोजेक्ट का आवेदन सीधे गृह मंत्रालय या रक्षा मंत्रालय में नहीं भेजा जाएगा। संबंधित परियोजना की फाइल पहले नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के पास जाएगी। इसके बाद प्रक्रिया के तहत फाइल गृह मंत्रालय तक पहुंचेगी, जहां सुरक्षा संबंधी पहलुओं की जांच की जाएगी।

सुरक्षा मंजूरी के बाद रक्षा मंत्रालय से भी आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल करना होगा। ऐसे मामलों के निपटारे के लिए गृह मंत्रालय की ओर से 60 दिनों की समयसीमा निर्धारित की गई है।

एक किलोमीटर का क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित

नए दिशा-निर्देशों में सीमा के बिल्कुल नजदीकी इलाकों को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं।

सीमा से एक किलोमीटर तक का क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित रखा जाएगा। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की गतिविधि या नए प्रोजेक्ट की अनुमति नहीं दी जाएगी।

वहीं, एक किलोमीटर से आगे के क्षेत्रों में प्रोजेक्ट की प्रकृति और दूरी के आधार पर सुरक्षा मंजूरी या अनापत्ति प्रमाण पत्र की आवश्यकता होगी।

LoC और LAC के आसपास निर्माण की ऊंचाई भी तय

दिशा-निर्देशों में नियंत्रण रेखा यानी LoC और वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC के आसपास होने वाले निर्माण की अधिकतम ऊंचाई को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं।

नियमों के मुताबिक, यदि कोई निर्माण LoC या LAC से 8 किलोमीटर तक की दूरी पर है तो उसकी ऊंचाई अधिकतम 3 मीटर तक हो सकती है।

वहीं, 8 से 20 किलोमीटर की दूरी के बीच निर्माण की अधिकतम ऊंचाई 5 मीटर निर्धारित की गई है।

इसके बाद 20 से 50 किलोमीटर के दायरे में निर्माण की अधिकतम ऊंचाई 15 मीटर तक हो सकती है।

हालांकि, इन ऊंचाई संबंधी नियमों में पवन चक्कियों आदि को अलग रखा गया है।

प्रोजेक्ट में काम करने वाले स्टाफ का भी होगा सत्यापन

सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रोजेक्ट के लिए केवल जमीन और निर्माण की जांच ही नहीं होगी, बल्कि वहां काम करने वाले लोगों का भी सत्यापन किया जाएगा।

दिशा-निर्देशों के तहत प्रोजेक्ट परिसर में प्रवेश करने से पहले कर्मचारियों, इंजीनियरों और श्रमिकों का सत्यापन अनिवार्य होगा। विदेशी नागरिकों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखने के लिए भी व्यवस्था करने को कहा गया है।

यदि पाकिस्तान, चीन या बांग्लादेश से संबंधित कोई व्यक्ति ऐसे प्रोजेक्ट में इंजीनियर या अन्य स्टाफ के रूप में काम करता है, तो उसके लिए केंद्र सरकार की अनुमति आवश्यक होगी।

प्रोजेक्ट साइट पर पुलिस चौकी बनाने का निर्देश

सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रोजेक्ट साइट पर एक समर्पित पुलिस चौकी स्थापित करने का भी प्रावधान किया गया है। इस चौकी के जरिए प्रोजेक्ट स्थल पर निगरानी और वहां काम कर रहे कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।

इसके अलावा प्रोजेक्ट के आसपास आवास, होटल, कैफेटेरिया या अन्य ऐसी सुविधाएं विकसित करने को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा गया है, जिनसे बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही बढ़ सकती है।

यदि किसी ऐसी सुविधा से सीमा क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने या अनावश्यक भीड़ जुटने की आशंका होगी तो उसे अनुमति नहीं दी जाएगी।

होटल और रहने की सुविधा को लेकर भी नियम

दिशा-निर्देशों के अनुसार सीमा के आसपास रहने के स्थान या होटल जैसी सुविधाओं को लेकर भी दूरी का ध्यान रखना होगा। ऐसे आवास या होटल सीमा से कम से कम 5 किलोमीटर की दूरी पर होने चाहिए।

हालांकि, प्रोजेक्ट परिसर के अंदर आवश्यकता के अनुसार कैफेटेरिया खोलने की अनुमति दी जा सकती है।

क्यों अहम हैं ये दिशा-निर्देश?

सीमावर्ती इलाकों में बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट और निर्माण गतिविधियां बढ़ने के साथ सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। सोलर और विंड प्रोजेक्ट में बड़ी संख्या में कर्मचारी, इंजीनियर, मशीनरी और अन्य संसाधनों की आवाजाही होती है।

ऐसे में सरकार ने प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले सुरक्षा जांच, कर्मचारियों के सत्यापन और निर्माण गतिविधियों की निगरानी को प्राथमिकता दी है।

इन नियमों का उद्देश्य विकास कार्यों को रोकना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा क्षेत्र में विकास के बीच संतुलन बनाए रखना बताया जा रहा है।

सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में सोलर, विंड और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर केंद्र सरकार ने सुरक्षा प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है। एक किलोमीटर का क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, जबकि आगे के क्षेत्रों में दूरी के आधार पर सुरक्षा मंजूरी और NOC की जरूरत होगी।

इसके साथ ही प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारियों और विदेशी नागरिकों के सत्यापन पर भी विशेष जोर दिया गया है। खासकर पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश से जुड़े लोगों को लेकर केंद्र की अनुमति का प्रावधान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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