पटना। पटना विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह शनिवार को उस समय अचानक हंगामे में बदल गया, जब छात्रों ने मंच पर बुलाकर डिग्री प्रदान किए जाने की मांग शुरू कर दी। छात्रों की इस मांग के बाद समारोह का माहौल तनावपूर्ण हो गया और कार्यक्रम की निर्धारित प्रक्रिया प्रभावित हुई। स्थिति ऐसी बनी कि समारोह में मौजूद राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैय्यद अता हसनैन को बिना संबोधन किए ही कार्यक्रम से लौटना पड़ा।
पटना वीमेंस कॉलेज के मदर वेरोनिका ऑडिटोरियम में आयोजित इस दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक और विश्वविद्यालय के अधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जाना था। हालांकि, मंच पर डिग्री दिए जाने की मांग को लेकर छात्रों के विरोध ने समारोह की तस्वीर बदल दी।
मंच पर डिग्री देने की मांग को लेकर हंगामा
जानकारी के मुताबिक, छात्रों की मांग थी कि उन्हें भी मंच पर बुलाकर डिग्री प्रदान की जाए। इसी मांग को लेकर समारोह के दौरान हंगामा शुरू हो गया। स्थिति बिगड़ने के बाद मंच पर केवल गोल्ड मेडल हासिल करने वाले टॉपरों और पीएचडी डिग्री धारकों को ही डिग्री प्रदान की गई।
हंगामे के बीच राज्यपाल सैय्यद अता हसनैन ने अपना संबोधन नहीं किया और कार्यक्रम से वापस लौट गए। राज्यपाल के बिना भाषण दिए लौटने से समारोह में हुए विवाद ने और ज्यादा ध्यान खींचा।
1305 विद्यार्थियों को मिली उपाधि
हंगामे के बावजूद पटना विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह पूरी तरह रद्द नहीं हुआ। कार्यक्रम के दौरान कुल 1305 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 155 पीएचडी डिग्री धारक भी शामिल रहे।
वहीं, पीजी सत्र 2023-25 के कुल 38 टॉपर विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। खास बात यह रही कि गोल्ड मेडल पाने वालों में छात्राओं की संख्या छात्रों से काफी अधिक रही।
कुल 38 गोल्ड मेडल में 28 छात्राओं और 10 छात्रों ने जगह बनाई। अलग-अलग विषयों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को समारोह में सम्मानित किया गया।

किन विद्यार्थियों को मिला गोल्ड मेडल?
पटना विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में विभिन्न विषयों के टॉपर विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। इनमें एमए हिंदी में निधि कुमारी, एमए इंग्लिश में प्रिया सिंह और एमए संस्कृत में उपासना आर्या शामिल हैं।
इसी तरह एमए मैथिली में खुशबू कुमारी, एमए अरबी में हदीका खालिद, एमए उर्दू में शीरिन तस्नीम और एमए फिलॉसफी में अमरजीत कुमार ने गोल्ड मेडल हासिल किया।
एमए एमजेएमसी में साक्षी, एमए म्यूजिक में कुंदन कुमार, एमए हिस्ट्री में रिया और एमए पॉलिटिकल साइंस में साहिल आलम को भी स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा एमए होम साइंस में स्नेहा कुमारी, एमए आईएच एंड आर्क में अभिषेक कुमार, एमए सोशियोलॉजी में आकांक्षा कुमारी और एमए इकोनॉमिक्स में ज्ञानेश्वरी कुमारी तथा अफशां निगार ने गोल्ड मेडल प्राप्त किया।
एमए साइकोलॉजी में सुप्रिया राज, एमए जियोग्राफी में प्रकाश चंद्रा, एमए पीएम एंड आईआर में मिताली राज, एमए रूरल स्टडीज में रागिनी और एमए सोशल वर्क में पलक प्रकाश भी स्वर्ण पदक पाने वालों में शामिल रहीं।
एमए वीमेंस स्टडीज में साक्षी, एमएससी फिजिक्स में सुरुचि कुमारी, एमएससी केमिस्ट्री में तृप्ति आनंद और एमएससी जूलॉजी में आरती कुमारी ने भी अपनी-अपनी श्रेणी में शीर्ष स्थान हासिल किया।
28 छात्राओं ने हासिल किया गोल्ड मेडल
इस बार के दीक्षांत समारोह की सबसे खास बात यह रही कि 38 गोल्ड मेडल विजेताओं में 28 छात्राएं शामिल रहीं। इससे विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में छात्राओं के बेहतर प्रदर्शन की तस्वीर भी सामने आई।
एमएससी बॉटनी में शाकिब अरशद, एमएससी जियोलॉजी में वंदना कुमारी, एमएससी गणित में निकिता कुमारी और एमएससी स्टैटिस्टिक्स में आसिया आर्या को भी स्वर्ण पदक मिला।
इसके अलावा एमएससी बायोकेमिस्ट्री में प्रिया कुमारी, एमएससी बायोटेक्नोलॉजी में सृष्टि आर्या, एमएससी एनवायरनमेंटल साइंस में शशि सुमन, एमसीए में सुरभि कुमारी, एमकॉम में प्रांजल कुमार और एमबीए में साकेत कुमार को गोल्ड मेडल दिया गया।
एमए इन लाइब्रेरी साइंस में पल्लवी कुमारी, एलएलएम में कुमारी साक्षी और एमएड में विशाल राज भी गोल्ड मेडल पाने वालों में शामिल रहे।
राज्यपाल के बिना संबोधन लौटने से चर्चा तेज
समारोह में राज्यपाल सैय्यद अता हसनैन मुख्य अतिथि और कुलाधिपति के रूप में मौजूद थे। उनके अलावा दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर की कुलपति प्रो. पूनम टंडन विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं और उन्होंने विद्यार्थियों को दीक्षांत भाषण के जरिए संबोधित किया।
लेकिन छात्रों के हंगामे के चलते राज्यपाल का संबोधन नहीं हो सका। समारोह में हुई इस घटना ने विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच डिग्री वितरण की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिक्षा के उत्सव में विरोध ने बदला माहौल
दीक्षांत समारोह आमतौर पर विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत और उपलब्धियों का जश्न होता है। इस समारोह में भी 1305 विद्यार्थियों को डिग्री और 38 टॉपरों को गोल्ड मेडल दिया जाना इसी उपलब्धि का हिस्सा था। लेकिन मंच पर डिग्री दिए जाने की मांग को लेकर हुए हंगामे ने कार्यक्रम की चर्चा का रुख बदल दिया।
एक ओर जहां विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया, वहीं दूसरी ओर छात्रों के विरोध और राज्यपाल के बिना भाषण लौटने की घटना समारोह की सबसे बड़ी चर्चा बन गई।
अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद छात्रों की मांग, विश्वविद्यालय प्रशासन के रुख और भविष्य में डिग्री वितरण की प्रक्रिया को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी।
पटना विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों के हंगामे ने पूरे कार्यक्रम को अचानक सुर्खियों में ला दिया। मंच पर डिग्री देने की मांग के चलते राज्यपाल को बिना संबोधन किए लौटना पड़ा। हालांकि, समारोह में 38 टॉपरों को गोल्ड मेडल और 1305 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 155 पीएचडी धारक भी शामिल रहे। खास बात यह रही कि 38 गोल्ड मेडल विजेताओं में 28 छात्राएं थीं।