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दिल्ली मिंटो रोड कंकाल: काली माता मंदिर परिसर में मिला संदिग्ध कंकाल

By yogesh jindoria | Published: Sep 26, 2026 09:36 AM

दिल्ली मिंटो रोड कंकाल: काली माता मंदिर परिसर में मिला संदिग्ध कंकाल

रिपोर्टर: दीप सिंह, लखनऊ मुख्य संवाददाता
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द

नई दिल्ली। दिल्ली के मिंटो रोड स्थित काली माता मंदिर परिसर में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब स्वच्छता अभियान के दौरान कंकाल जैसी वस्तु बरामद हुई। सफाई अभियान भारतीय जनता पार्टी और दिल्ली नगर निगम (MCD) की ओर से चलाया जा रहा था। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बरामद वस्तु को जांच के लिए कब्जे में लेकर मामले की पड़ताल शुरू कर दी।

शुरुआती जानकारी सामने आने के बाद इसे संदिग्ध मानव कंकाल बताया गया, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया कि बरामद वस्तु वास्तव में मानव कंकाल है या कोई डेमो मॉडल, इसका अंतिम निर्धारण वैज्ञानिक और फॉरेंसिक जांच के बाद ही किया जाएगा। पुलिस ने मौके की जांच करने के साथ इलाके को भी सील किया।

स्कूल से कबाड़ में आया था कंकाल

पुलिस की शुरुआती जांच में इस मामले में एक कबाड़ खरीदने वाले का बयान सामने आया है। कबाड़ कारोबारी मोहम्मद अबरार के मुताबिक, उसने एक स्कूल से कबाड़ खरीदा था और इसी कबाड़ में कई बक्से शामिल थे। उसके अनुसार, ये सामान 9 जुलाई को लाया गया था और पिछले कुछ महीनों से परिसर में रखा हुआ था।

पुलिस अब कबाड़ कारोबारी के इस बयान की पुष्टि करने में जुटी है। जांच का एक अहम पहलू यह पता लगाना है कि कथित कंकाल स्कूल से किस तरह बाहर आया और उसे कबाड़ के साथ मंदिर परिसर तक कैसे लाया गया।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की जानकारी मिलने के बाद दिल्ली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने इलाके को सुरक्षित किया और बरामद वस्तु की जांच शुरू की। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल मामले में जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कबाड़ में मिली वस्तु का स्रोत क्या है और वह वास्तव में किस प्रकार की सामग्री है। इसके लिए वैज्ञानिक और फॉरेंसिक जांच महत्वपूर्ण होगी।

स्कूल के बायोलॉजिकल वेस्ट का हिस्सा होने का दावा

दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, बरामद कंकाल जैसी वस्तु स्कूल के बायोलॉजिकल वेस्ट का हिस्सा हो सकती है। पुलिस के मुताबिक, इसे पढ़ाई और डेमोंस्ट्रेशन के उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, पुलिस ने यह भी कहा है कि इस संबंध में अभी तथ्यों की पुष्टि की जा रही है।

पुलिस कबाड़ कारोबारी और संबंधित स्कूल प्रशासन से जानकारी जुटा रही है। इसके अलावा यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि स्कूल में इस तरह की शैक्षणिक सामग्री रखी जाती थी या नहीं और उसे कबाड़ में बेचने की प्रक्रिया क्या थी।

फॉरेंसिक जांच से साफ होगी तस्वीर

मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि मंदिर परिसर में मिली वस्तु वास्तविक मानव कंकाल है या पढ़ाई के लिए इस्तेमाल होने वाला कोई मॉडल। पुलिस के मुताबिक इसका सटीक जवाब फॉरेंसिक और वैज्ञानिक जांच के बाद ही मिल सकेगा।

इसलिए फिलहाल इसे मानव अवशेष मानकर किसी अपराध से जोड़ना जल्दबाजी होगी। जांच एजेंसियां बरामद वस्तु की प्रकृति, उसके स्रोत और उसे मंदिर परिसर तक पहुंचने की पूरी कड़ी की जांच कर रही हैं।

सफाई अभियान के दौरान हुई बरामदगी

यह घटना उस समय सामने आई जब मिंटो रोड स्थित काली माता मंदिर परिसर में सफाई अभियान चल रहा था। सफाई के दौरान कबाड़ के बीच यह संदिग्ध वस्तु दिखाई दी, जिसके बाद मौके पर मौजूद लोगों में चर्चा शुरू हो गई और पुलिस को सूचना दी गई।

दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों और धार्मिक स्थलों पर स्वच्छता को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इससे पहले भी काली माता मंदिर के आसपास कूड़े की स्थिति को लेकर नगर निगम स्तर पर निरीक्षण और कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। 14 सितंबर की एक रिपोर्ट में बाहरी रिंग रोड स्थित काली माता मंदिर के पास कूड़े के ढेर को लेकर दिल्ली के महापौर ने संबंधित एजेंसी पर कार्रवाई और जुर्माने के निर्देश दिए थे।

कई सवालों के जवाब जांच के बाद मिलेंगे

फिलहाल पुलिस की जांच में कई सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख सवाल यह है कि संदिग्ध कंकाल जैसी वस्तु वास्तव में क्या है, यह स्कूल से कब और कैसे निकली तथा कबाड़ के जरिए मंदिर परिसर तक कैसे पहुंची।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती जानकारी के आधार पर इसे स्कूल के बायोलॉजिकल वेस्ट से जुड़ी सामग्री माना जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

फॉरेंसिक रिपोर्ट और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और बरामद वस्तु को लेकर सामने आ रही अलग-अलग जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है।

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