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दिल्ली प्रीत विहार रामलीला: राम, सीता और रावण बने स्कूली बच्चे

By aonenewstv | Published: Oct 18, 2026 10:06 AM

दिल्ली के प्रीत विहार में बच्चों की रामलीला, राम-सीता से लेकर रावण और हनुमान तक बने नन्हे कलाकार

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के प्रीत विहार में आयोजित रामलीला में स्कूली बच्चे अपनी अभिनय प्रतिभा से रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत कर रहे हैं। यहां कोई बच्चा भगवान राम बना है, तो कोई लक्ष्मण, सीता और रावण की भूमिका निभा रहा है। हनुमान, कुंभकर्ण, मेघनाद, जटायु और ऋषि-मुनियों के किरदार भी बच्चों ने संभाले हैं। शिक्षकों के मार्गदर्शन में तैयार हो रहे इन नन्हे कलाकारों की प्रस्तुतियां भारतीय संस्कृति और रामायण की परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास हैं।

रामायण के प्रमुख प्रसंगों का हो रहा मंचन

प्रीत विहार की इस रामलीला में बच्चों को अलग-अलग पात्रों के रूप में तैयार करने के साथ रामायण की महत्वपूर्ण घटनाओं का मंचन भी किया जाता है। भरत मिलाप से लेकर सीता हरण तक के प्रसंग मंच पर प्रस्तुत किए जाते हैं। बच्चे अपने किरदारों के माध्यम से रामायण की कहानियों को दर्शकों तक पहुंचाते हैं।

भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, रावण और हनुमान जैसे प्रमुख पात्रों के साथ अन्य किरदार भी इस आयोजन को खास बनाते हैं। इससे बच्चों को रामायण के पात्रों, उनके महत्व और उनसे जुड़ी घटनाओं को समझने का अवसर मिलता है।

शिक्षक करते हैं बच्चों का मेकअप

इस रामलीला की खास बात यह है कि बच्चों को तैयार करने के लिए बाहर से मेकअप आर्टिस्ट नहीं बुलाए जाते। स्कूल के शिक्षक ही बच्चों का मेकअप करते हैं और उन्हें पात्रों के अनुरूप तैयार करने में मदद करते हैं।

शिक्षकों की देखरेख में बच्चे अपनी वेशभूषा और भूमिकाओं की तैयारी करते हैं। इस प्रक्रिया में उन्हें मंच पर प्रस्तुति देने और अपनी अभिनय क्षमता को निखारने का अवसर मिलता है। शिक्षकों का मार्गदर्शन बच्चों को अपने किरदारों को बेहतर तरीके से निभाने में मदद करता है।

कई वर्षों से आयोजित हो रही है रामलीला

प्रीत विहार में रामलीला का आयोजन पिछले कई वर्षों से किया जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य बच्चों को रामायण के प्रसंगों और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराना है। इस पहल के जरिए बच्चों को धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का अवसर मिलता है।

रामलीला के अध्यक्ष योगेश अरोड़ा और स्कूल संचालक छवि नारायण अरोड़ा भी इस आयोजन से जुड़े हुए हैं। शिक्षकों के मार्गदर्शन में तैयार होने वाले बच्चे मंच पर विभिन्न पात्रों को निभाकर रामायण की परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान देते हैं।

बच्चों में बढ़ता है आत्मविश्वास

रामलीला जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेने से बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलता है। संवाद बोलना, दर्शकों के सामने अभिनय करना और दूसरे कलाकारों के साथ तालमेल बनाना उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

इसके साथ ही बच्चों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और रामायण के प्रसंगों को समझने का अवसर मिलता है। इस तरह पढ़ाई के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को जोड़कर उनके व्यक्तित्व विकास को भी प्रोत्साहित किया जाता है।

नई पीढ़ी तक पहुंच रही रामलीला की परंपरा

रामलीला लंबे समय से भारतीय समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। प्रीत विहार में बच्चों द्वारा इसका मंचन इस परंपरा को आगे बढ़ाने का एक अलग तरीका है। यहां बच्चे केवल दर्शक बनकर रामायण को नहीं देखते, बल्कि स्वयं पात्र बनकर उसके प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत करते हैं।

स्कूल के शिक्षकों और आयोजन से जुड़े लोगों के सहयोग से आयोजित यह रामलीला बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का अवसर प्रदान करती है। नन्हे कलाकारों की प्रस्तुतियों के माध्यम से रामायण की कहानियां नई पीढ़ी तक पहुंच रही हैं।

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