नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2029 में अभी करीब तीन साल का समय बाकी है, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस और बीजेपी से अलग क्षेत्रीय दलों को साथ लाकर संभावित तीसरे मोर्चे की चर्चा फिर तेज हो गई है। इस बीच DMK सांसद कनिमोझी करुणानिधि की कई प्रमुख क्षेत्रीय नेताओं के साथ हुई मुलाकातों ने इस बहस को और हवा दी है। हालांकि, फिलहाल किसी नए तीसरे मोर्चे के औपचारिक गठन की घोषणा नहीं हुई है।
कनिमोझी पिछले कुछ समय से अलग-अलग राज्यों के प्रमुख क्षेत्रीय नेताओं से मुलाकात कर रही हैं। हाल ही में उन्होंने मुंबई में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे से उनके आवास मातोश्री पर मुलाकात की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक में परिसीमन विधेयक और INDIA गठबंधन के भविष्य समेत क्षेत्रीय दलों की भूमिका पर चर्चा हुई।
उद्धव ठाकरे से मुलाकात के बाद बढ़ी चर्चा
कनिमोझी और उद्धव ठाकरे की मुलाकात करीब एक घंटे चली। इस दौरान परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव और दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर चिंताओं पर भी चर्चा हुई। शिवसेना (UBT) नेताओं के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच विपक्षी राजनीति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका पर बातचीत हुई।
इसके बाद कनिमोझी ने दिल्ली में NCP (SP) प्रमुख शरद पवार और उनकी बेटी एवं लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले से भी अलग-अलग बातचीत की। इन मुलाकातों को क्षेत्रीय दलों के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
ममता बनर्जी से संभावित मुलाकात
कनिमोझी की अगली संभावित मुलाकात पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से होने की चर्चा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वह कोलकाता जाकर ममता बनर्जी से मुलाकात कर सकती हैं। कनिमोझी की क्षेत्रीय नेताओं के साथ लगातार बैठकों के बीच इसे भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
DMK-कांग्रेस रिश्तों की पृष्ठभूमि
कनिमोझी की क्षेत्रीय नेताओं से मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब तमिलनाडु में DMK और कांग्रेस के रिश्तों में तनाव की चर्चा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी TVK के साथ जाने के बाद दोनों दलों के संबंधों को लेकर नए सवाल उठे हैं। DMK ने जून में हुई INDIA ब्लॉक की बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया था।
इसके अलावा कनिमोझी ने संसद में अपनी पार्टी के सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की थी, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वीकार कर लिया था। अगस्त में स्पीकर की ओर से आयोजित चाय समारोह में उनकी मौजूदगी को भी INDIA ब्लॉक से दूरी की चर्चाओं के संदर्भ में देखा गया।
पहले भी बन चुके हैं ऐसे राजनीतिक प्रयास
कांग्रेस और बीजेपी से अलग तीसरे राजनीतिक विकल्प का विचार नया नहीं है। 2013 में ममता बनर्जी ने गैर-कांग्रेस और गैर-बीजेपी दलों को साथ लाकर एक फेडरल फ्रंट की पहल की थी। इसके बाद 2018 में तत्कालीन तेलंगाना मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने भी ममता बनर्जी और नवीन पटनायक समेत क्षेत्रीय नेताओं के साथ बातचीत की थी। हालांकि, ये प्रयास चुनाव से पहले किसी औपचारिक तीसरे मोर्चे में तब्दील नहीं हो सके।
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की ओर से भी विपक्षी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच एक अलग समूह बनाने की पहल की चर्चा हुई थी, लेकिन वह भी औपचारिक राजनीतिक मोर्चे का रूप नहीं ले सकी।
फिलहाल कनिमोझी की क्षेत्रीय नेताओं के साथ बैठकों के कारण तीसरे मोर्चे की चर्चा जरूर तेज हुई है, लेकिन यह अभी राजनीतिक अटकलों और संभावित नए समीकरणों तक सीमित है। 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले क्षेत्रीय दलों के बीच होने वाली आगे की बातचीत से इस दिशा में तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।