नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट ने परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित पेपर लीक किसी एक व्यक्ति की हरकत नहीं थी, बल्कि इसमें कई स्तरों पर लोगों के जुड़े होने की बात सामने आई है। कथित नेटवर्क का कनेक्शन NTA से जुड़े विशेषज्ञों, बिचौलियों, कोचिंग नेटवर्क और राजस्थान से लेकर केरल तक फैले लोगों से बताया गया है।
CBI ने इस मामले में दिल्ली की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। इसमें NTA से जुड़े तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स समेत कुल 13 आरोपियों को नामजद किए जाने की बात सामने आई है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024 के तहत कार्रवाई की गई है।
सवाल तैयार करने वाली प्रक्रिया तक पहुंच का कथित दुरुपयोग
CBI की जांच के मुताबिक, कथित साजिश परीक्षा से कई सप्ताह पहले शुरू हुई। आरोप है कि NTA की प्रश्नपत्र तैयार करने और ट्रांसलेशन से जुड़ी गोपनीय प्रक्रिया में शामिल कुछ विशेषज्ञों ने अपनी पहुंच का गलत इस्तेमाल किया।
चार्जशीट में केमिस्ट्री एक्सपर्ट प्रहलाद विट्ठलराव कुलकर्णी, बॉटनी एक्सपर्ट मनीषा गुरुनाथ मंधारे और फिजिक्स एक्सपर्ट मनीषा संजय हवलदार के नाम सामने आने की बात कही गई है।
जांच के अनुसार, गोपनीय प्रक्रिया के दौरान सवालों को याद करने, महत्वपूर्ण हिस्सों को नोट करने और बाद में संभावित प्रश्नों को दोबारा तैयार करने का कथित प्रयास किया गया। आरोप है कि अलग-अलग विषयों से जुड़े सवालों को जोड़कर परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का अनुमान लगाने की कोशिश की गई।

25 लाख रुपये में कथित सौदे का दावा
चार्जशीट में कथित तौर पर पेपर की एक चेन का भी जिक्र है। जांच एजेंसी के अनुसार, लीक सवाल एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचे और नासिक के शुभम खैरनार तक पहुंचने के बाद कथित रूप से 25 लाख रुपये में सौदा हुआ।
इसके बाद कथित पेपर यश यादव के जरिए टेलीग्राम पर राजस्थान के मांगीलाल बिवाल तक पहुंचा। जांच में यह भी दावा किया गया कि सौदे की सुरक्षा के लिए कुछ मूल शैक्षणिक दस्तावेज और हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक रखे गए थे।
सीकर और झुंझुनू बने कथित नेटवर्क का केंद्र
राजस्थान में सीकर और झुंझुनू के बीच कथित तौर पर पेपर के लेन-देन की गतिविधियां हुईं। जांच के मुताबिक, एक वाहन में तीनों विषयों से जुड़े प्रिंटेड सेट लेकर कुछ लोग पहुंचे थे। यहां अन्य आरोपियों के साथ कथित तौर पर पेपर के लेन-देन की कोशिश हुई।
आरोप है कि आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे कुछ लोगों ने छात्रों को जोड़ने के लिए अलग-अलग प्रस्ताव भी दिए। कुछ मामलों में छात्रों की मूल मार्कशीट को कथित तौर पर सिक्योरिटी के रूप में रखने की बात भी चार्जशीट में सामने आई है।
इस पूरे मामले का एक हैरान करने वाला पहलू यह भी बताया गया है कि कथित नेटवर्क से जुड़ा एक आरोपी खुद परीक्षा में बेहद कम अंक हासिल कर पाया।
केरल तक कैसे पहुंचा कथित पेपर?
जांच की कड़ियां राजस्थान से आगे केरल तक पहुंचने की बात भी सामने आई है। CBI के अनुसार, सीकर की एक एजुकेशनल कंसल्टेंसी से व्हाट्सऐप के जरिए कथित तौर पर सवालों की PDF केरल के अदूर स्थित एक मेडिकल कॉलेज के छात्र तक पहुंची।
जांच में कथित तौर पर पैसों के डिजिटल लेन-देन का भी जिक्र है। एक छात्र से जुड़े लोगों के बीच PhonePe के माध्यम से पैसे भेजे जाने और परीक्षा से कुछ घंटे पहले बड़ी संख्या में हल किए हुए सवालों की PDF मिलने का दावा किया गया है।
एक शिक्षक की सतर्कता से सामने आया मामला
इस पूरे मामले में सीकर के केमिस्ट्री शिक्षक शशिकांत सुथार की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई है। उन्होंने व्हाट्सऐप पर प्रसारित एक गेस पेपर को वास्तविक परीक्षा के प्रश्नपत्र से मिलते-जुलते देखा। इसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी और शिकायत दर्ज कराई।
इसके बाद राजस्थान पुलिस की जांच आगे बढ़ी और मामले में CBI की एंट्री हुई। जांच के दौरान कई लोगों से पूछताछ, डिजिटल साक्ष्यों की जांच और कथित लेन-देन की पड़ताल की गई।
री-एग्जाम तक पहुंचा मामला
पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए और मामले ने देशव्यापी रूप ले लिया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, विवाद के बाद परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया।
अब CBI की चार्जशीट के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत में चलेगी। चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर किया जाएगा।