उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले PDA को लेकर समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी के बीच जुबानी तकरार तेज होती दिखाई दे रही है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने समाजवादी पार्टी के PDA को लेकर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि सपा का PDA बदलता रहता है, जबकि उनका PDA नहीं बदल रहा है।
चंद्रशेखर आजाद ने PDA की व्याख्या को लेकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, “कह लेने दो भाई PDA, पीड़ित है, ये बात सही है मगर उनके वाला नहीं।” उन्होंने आगे कहा कि सपा का PDA कभी कुछ और होता है तो कभी कुछ और। उनके मुताबिक, उनके PDA में ‘P’ का मतलब पीड़ित है और यह नहीं बदल रहा है।
‘उनका कौन सा पीड़ित है, वो वही तय करेंगे’
चंद्रशेखर आजाद ने सपा के PDA को लेकर तंज कसते हुए कहा कि “उनका कौन सा पीड़ित है वो तो वही तय करेंगे।” उन्होंने कहा कि उनका PDA बदलता रहता है, जबकि उनका अपना PDA नहीं बदल रहा है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत PDA को अपने राजनीतिक अभियान का प्रमुख हिस्सा बना रहे हैं। 24 सितंबर को अखिलेश यादव ने रायबरेली से PDA रथ यात्रा की शुरुआत की थी। उन्होंने PDA को पीड़ित, दुखी और अपमानित लोगों से जोड़ते हुए अपनी राजनीतिक रणनीति सामने रखी थी।
अखिलेश यादव का PDA अभियान
अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी PDA के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समूहों को जोड़ने की रणनीति पर जोर दे रही है। रायबरेली से शुरू हुए PDA रथ अभियान के दौरान अखिलेश यादव ने कहा था कि जो पीड़ित, दुखी और अपमानित है, वह PDA है। उन्होंने इस अभियान को सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए भाजपा पर भी निशाना साधा था।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में चंद्रशेखर आजाद की टिप्पणी को सपा की PDA रणनीति पर उनके लगातार हमलों की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, चंद्रशेखर के बयान में सपा के PDA की परिभाषा को लेकर उनकी अपनी राजनीतिक व्याख्या सामने आई है।
मायावती भी साध चुकी हैं निशाना
PDA को लेकर बसपा प्रमुख मायावती भी हाल में समाजवादी पार्टी पर निशाना साध चुकी हैं। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, मायावती ने अखिलेश यादव के PDA रथ के रंग को लेकर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर टिप्पणी की थी। उन्होंने दावा किया था कि रथ सपा के लाल रंग की तुलना में आरएसएस और बीजेपी के भगवा रंग का ज्यादा दिखाई दे रहा था।
मायावती ने अपने बयान में सपा की राजनीतिक रणनीति और मुस्लिम वोटों से जुड़े सवाल भी उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि मुस्लिम समाज में सपा को लेकर चर्चा हो रही है कि पिछले चुनावों में एकतरफा समर्थन के बावजूद पार्टी बीजेपी को सत्ता में आने से नहीं रोक सकी। यह मायावती का राजनीतिक दावा है, जिसे उन्होंने सपा की रणनीति पर टिप्पणी के दौरान रखा था।
PDA को लेकर यूपी में बढ़ी सियासी बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज होने के साथ ही PDA एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दे के रूप में सामने आ रहा है। समाजवादी पार्टी इसे अपने सामाजिक और राजनीतिक अभियान से जोड़ रही है, जबकि चंद्रशेखर आजाद और मायावती जैसे नेता सपा की PDA रणनीति की अलग-अलग मुद्दों पर आलोचना कर रहे हैं।
चंद्रशेखर आजाद इससे पहले भी समाजवादी पार्टी पर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर निशाना साध चुके हैं। सितंबर में उन्होंने सपा के छात्र संगठन की नीली ड्रेस को लेकर भी टिप्पणी की थी और कहा था कि केवल रंग बदलने से राजनीतिक चरित्र नहीं बदलता।
फिलहाल PDA को लेकर नेताओं के बीच बयानबाजी का सिलसिला जारी है। एक तरफ समाजवादी पार्टी अपने PDA अभियान को आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर चंद्रशेखर आजाद और मायावती जैसे नेता इसकी परिभाषा और राजनीतिक रणनीति को लेकर सवाल उठा रहे हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगे भी चर्चा में रहने की संभावना रखता है।