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कोख का सौदा या मजबूरी की इंतिहा? कन्नौज में जुड़वां नवजातों को ₹1.80 लाख में बेचने का दावा, जांच शुरू

कन्नौज में कथित नवजात बिक्री का मामला बना चर्चा का विषय, प्रशासन ने शुरू कराई जांच

उत्तर प्रदेश: के कन्नौज जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। विशुनगढ़ थाना क्षेत्र के एक गांव में एक विधवा महिला द्वारा अपने नवजात जुड़वां बच्चों (एक बेटा और एक बेटी) को कथित रूप से 1.80 लाख रुपये में बेचने की चर्चा तेजी से फैल रही है। हालांकि अभी तक इस मामले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कराने की बात कही है।

बताया जा रहा है कि महिला आर्थिक तंगी, सामाजिक दबाव और बदनामी के डर से गांव छोड़कर कहीं चली गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला मानव तस्करी और बाल अधिकारों के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।

आर्थिक संकट और पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ

ग्रामीणों के अनुसार, महिला कई वर्ष पहले अपने पति और सात बच्चों के साथ रोजगार की तलाश में जयपुर गई थी। वहीं मजदूरी के दौरान परिवार का गुजारा चलता था। लगभग छह वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में पति की मृत्यु हो गई, जिसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी महिला पर आ गई।

बताया जाता है कि महिला ने कठिन परिस्थितियों में मजदूरी करके अपने बच्चों का पालन-पोषण किया और दो बेटियों तथा एक बेटे की शादी भी कराई। इसके बावजूद परिवार आर्थिक संकट से पूरी तरह बाहर नहीं निकल सका।

मजदूरी के दौरान गर्भवती होने की चर्चा

स्थानीय लोगों के अनुसार, जयपुर में मजदूरी के दौरान महिला एक व्यक्ति के संपर्क में आई और गर्भवती हो गई। गांव में चर्चा है कि गर्भधारण के बाद महिला ने संबंधित व्यक्ति से कुछ आर्थिक सहायता भी प्राप्त की थी। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

लोकलाज और सामाजिक दबाव के कारण महिला अपने गांव लौट आई, जहां उसने सरकारी मेडिकल कॉलेज में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया।

जन्म के बाद कथित सौदेबाजी

ग्रामीणों के मुताबिक, अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद बच्चों को लेकर कथित सौदेबाजी शुरू हुई। चर्चा है कि नवजात बेटे को गांव के ही एक व्यक्ति को लगभग 1 लाख रुपये में और नवजात बेटी को पास के गांव के एक परिवार को 80 हजार रुपये में दे दिया गया।

इन दावों की पुष्टि अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने नहीं की है। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

महिला गांव छोड़कर चली गई

बताया जा रहा है कि कथित सौदा होने के बाद महिला गांव छोड़कर चली गई। इसके बाद यह मामला गांव में चर्चा का विषय बन गया। कई ग्रामीणों का दावा है कि घटना के दौरान कुछ लोग मौके पर मौजूद भी थे।

हालांकि किसी भी पक्ष की ओर से अब तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

प्रशासन ने क्या कहा?

विशुनगढ़ थाना प्रभारी ने बताया कि अभी तक उनके पास इस मामले में कोई लिखित शिकायत नहीं पहुंची है। यदि शिकायत मिलती है या जांच में कोई तथ्य सामने आते हैं तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वहीं जिला प्रोबेशन अधिकारी ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और इसकी जांच के लिए चाइल्डलाइन टीम को भेजा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी नवजात बच्चे को खरीदना या बेचना कानूनन अपराध है।

बच्चों को गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में किसी भी बच्चे को गोद लेने की एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया है। इसके तहत बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) और संबंधित अधिकृत संस्थाएं पूरी जांच के बाद ही गोद लेने की अनुमति देती हैं।

बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी भी नवजात का लेन-देन गंभीर अपराध माना जाता है। यदि जांच में कथित बिक्री की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ मानव तस्करी और बाल संरक्षण कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

सिर्फ अपराध नहीं, सामाजिक चिंता का विषय भी

यह मामला केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि गरीबी, सामाजिक दबाव, महिलाओं की सुरक्षा और बाल संरक्षण जैसे गंभीर प्रश्न भी खड़े करता है। यदि आर्थिक तंगी और सामाजिक भय किसी मां को ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर करते हैं, तो यह समाज और व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय है।

हालांकि इस पूरे मामले में अंतिम सच्चाई प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगी। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच रिपोर्ट का इंतजार करना आवश्यक होगा।

कन्नौज का यह मामला मानव संवेदनाओं और कानून दोनों की कसौटी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल नवजात बच्चों की कथित बिक्री की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन ने जांच शुरू करने की बात कही है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह घटना समाज में आर्थिक असमानता, महिला सुरक्षा और बाल संरक्षण व्यवस्था को लेकर भी व्यापक चर्चा की मांग करती है।

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