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उत्तर प्रदेश भारी बारिश का रेड अलर्ट, 8 जिलों में खतरा, 13 में ऑरेंज अलर्ट

By aonenewstv | Published: Sep 26, 2026 08:26 AM

उत्तर प्रदेश में भारी बारिश से हाहाकार, 8 जिलों में रेड अलर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति है और लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बांदा में 227 मिलीमीटर और लखनऊ में 136 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। कई अन्य जिलों में भी 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश रिकॉर्ड हुई है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने प्रदेश के कई हिस्सों के लिए गंभीर मौसम चेतावनी जारी की है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 26 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश और 27 सितंबर को भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 26 सितंबर को अत्यधिक भारी और 27 सितंबर को बहुत भारी बारिश की चेतावनी है।

8 जिलों में रेड अलर्ट

मौसम विभाग की चेतावनी के बीच उत्तर प्रदेश के कई जिलों में रेड अलर्ट लागू है। इनमें श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश का खतरा है।

वहीं बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, हरदोई, लखनऊ, बाराबंकी, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल और बदायूं समेत कई इलाकों में ऑरेंज अलर्ट के तहत प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

बंगाल की खाड़ी के सिस्टम का असर

मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव वाले क्षेत्र (डीप डिप्रेशन) का असर उत्तर प्रदेश तक पहुंच रहा है। इस सिस्टम से बड़ी मात्रा में नमी प्रदेश की ओर आ रही है, जिसके कारण कई इलाकों में लगातार बारिश हो रही है।

भारी बारिश के साथ कुछ इलाकों में तेज हवाएं और गरज-चमक की स्थिति भी बन सकती है। तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है।

फ्लैश फ्लड का खतरा

लगातार बारिश के कारण प्रदेश के निचले इलाकों और कुछ वाटरशेड क्षेत्रों में अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों को तत्काल सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं।

आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, मऊ, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, अंबेडकर नगर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अयोध्या, गोंडा, श्रावस्ती, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, अमेठी, फतेहपुर, कानपुर नगर, बांदा, कौशांबी और चित्रकूट के कुछ क्षेत्रों में अचानक बाढ़ की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को तैयार रहने को कहा गया है।

लखनऊ में सड़कों पर जलभराव

राजधानी लखनऊ में लगातार बारिश के कारण कई सड़कों और निचले इलाकों में पानी भर गया। कई जगह यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी हुई। बांदा समेत बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश का असर देखने को मिला है।

स्कूलों पर भी बारिश का असर

भारी बारिश और खराब मौसम को देखते हुए प्रदेश के कई जिलों में स्कूल बंद रखने का फैसला किया गया है। अलग-अलग जिलों में स्थानीय प्रशासन ने मौसम की स्थिति के अनुसार छुट्टी घोषित की है। कुछ जिलों में कक्षा 8 तक, जबकि कुछ स्थानों पर कक्षा 12 तक के स्कूल बंद किए गए हैं।

प्रशासन का कहना है कि स्कूल बंद रखने का उद्देश्य बच्चों को खराब मौसम और जलभराव से जुड़े जोखिमों से सुरक्षित रखना है।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

उत्तर प्रदेश सरकार ने रेड और ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों के अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर मौसम की स्थिति और तैयारियों की समीक्षा की। अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने, स्थानीय परिस्थितियों पर नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन की ओर से लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने और जरूरी सावधानी बरतने की अपील की गई है। भारी बारिश के दौरान जलभराव वाले रास्तों से बचने, खुले स्थानों और कमजोर ढांचों से दूरी बनाए रखने तथा बिजली गिरने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है।

27 सितंबर तक जारी रह सकता है असर

IMD के पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर प्रदेश में मौसम का असर 27 सितंबर तक बना रह सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 26 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश के बाद 27 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 27 सितंबर तक भारी से बहुत भारी बारिश और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है।

ऐसे में प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। लगातार बारिश के कारण नदियों, नालों और निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।

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