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आचार्य श्री विद्यासागर महामंडल विधान श्रद्धा-भक्ति से संपन्न, निकली भव्य बग्घी यात्रा

By aonenewstv | Published: Oct 27, 2026 08:10 AM

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आचार्य श्री विद्यासागर महामंडल विधान श्रद्धा-भक्ति से संपन्न, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब; निकली भव्य बग्घी यात्रा

अलीगढ़: खिरनी गेट स्थित श्री लख्मीचंद पांड्या खंडेलवाल दिगंबर जैन ट्रस्ट परिसर में शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में भव्य धार्मिक आयोजन किया गया। मुनि सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित आचार्य श्री विद्यासागर महामंडल विधान श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्म लाभ प्राप्त किया। आयोजन के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, इंद्र-इंद्राणियों की भव्य बग्घी यात्रा, आचार्य श्री के जीवन पर आधारित नाटिका और सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहे।

आचार्य श्री विद्यासागर महामंडल विधान का विधि-विधान से शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 6:30 बजे भगवान के अभिषेक और शांतिधारा के साथ हुआ। इस दौरान अजय कुमार जैन, प्रवीन जैन, संजय जैन, डॉ. एस.के. जैन और अनिल कुमार जैन श्रीजी परिवार को अभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

चित्र अनावरण और पाद प्रक्षालन का सौभाग्य महेंद्र कुमार जैन एवं सौरभ जैन पांड्या परिवार को प्राप्त हुआ। इसके बाद मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ आचार्य श्री विद्यासागर महामंडल विधान प्रारंभ हुआ।

उपाध्याय श्री शिवदत्त सागर महाराज ससंघ और प्रतिष्ठाचार्य राकेश भैयाजी के निर्देशन में धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं। श्रद्धालुओं ने भगवान की आराधना करते हुए विश्व शांति, सुख-समृद्धि और जनकल्याण की मंगल कामना की।

पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया और आचार्य श्री के बताए आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

इंद्र-इंद्राणियों की निकली भव्य बग्घी यात्रा

विधान संपन्न होने के बाद बाग वाले मंदिर जी से मुख्य पात्रों की भव्य बग्घी यात्रा निकाली गई। यात्रा में सौधर्म इंद्र, यज्ञनायक और अन्य प्रमुख पात्र इंद्र-इंद्राणियों के रूप में शामिल हुए।

आयोजन में मुख्य पात्रों की भूमिका निभाने वालों में सौधर्म इंद्र के रूप में राजीव जैन और इंद्रा जैन, यज्ञनायक के रूप में सौरभ जैन और रेशू जैन पांड्या, ईशान इंद्र के रूप में सुरजीत जैन और पूनम जैन पाटनी, सानत इंद्र के रूप में संजय जैन और श्रद्धा जैन तथा महेंद्र इंद्र के रूप में प्रवीन जैन और राशि जैन शामिल रहे।

मंगलमय बग्घी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से सहभागिता की। यात्रा ने मार्ग में लोगों का ध्यान आकर्षित किया और धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा।

इसके बाद यात्रा बड़े मंदिर जी पहुंची, जहां भगवान के दर्शन कराए गए। दर्शन के उपरांत यात्रा पुनः बाग वाले मंदिर जी पहुंचकर संपन्न हुई।

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के जीवन पर पहली बार नाटिका का मंचन

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के संपूर्ण जीवन पर आधारित नाटिका रही। दोपहर में दिल्ली कंठस्थ कला केंद्र की ओर से निशांत शर्मा ने इस नाटिका की प्रस्तुति दी।

नाटिका के माध्यम से आचार्य श्री के त्याग, तपस्या, स्वाध्याय और जीवमात्र के कल्याण के प्रति समर्पण को दर्शाया गया। प्रस्तुति में उनके आध्यात्मिक जीवन और समाज को दिए गए संदेशों को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा गया।

नाटिका ने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के जीवन प्रसंगों के माध्यम से आत्मसंयम, नैतिकता, सेवा और परोपकार के महत्व को समझा।

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के विचार आज भी लोगों को सादगी, आत्मानुशासन और समाज कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। आयोजन के माध्यम से उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

हथकरघा निर्मित वस्त्र देकर किया गया सम्मान

आयोजन की एक विशेष पहल के तहत कार्यक्रम में शामिल मुख्य पात्रों को पहली बार हथकरघा निर्मित वस्त्र प्रदान किए गए। यह पहल आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के स्वदेशी, स्वावलंबन और हथकरघा को प्रोत्साहन देने के विचारों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम बनी।

आचार्य श्री ने अपने जीवन में स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग, श्रम की गरिमा और आत्मनिर्भरता जैसे विचारों पर विशेष जोर दिया था। हथकरघा निर्मित वस्त्रों को प्रोत्साहित करने की यह पहल उन्हीं मूल्यों को सम्मान देने से जुड़ी रही।

आयोजकों की इस पहल के माध्यम से स्थानीय कारीगरों, पारंपरिक वस्त्र निर्माण और स्वावलंबन के महत्व को भी रेखांकित किया गया।

शाम को हुई आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां

धार्मिक अनुष्ठानों और दिनभर के कार्यक्रमों के बाद शाम को आरती की गई। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिनमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

पूरे आयोजन के दौरान जैन समाज के लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर बग्घी यात्रा और नाटिका तक, सभी कार्यक्रमों में आचार्य श्री के प्रति श्रद्धा और उनके आदर्शों के प्रति सम्मान की भावना दिखाई दी।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद

इस धार्मिक आयोजन में प्रद्युम्न कुमार जैन, मुनेश जैन, नरेंद्र कुमार जैन, सुशील कुमार जैन, सुरेश कुमार जैन गढ़ी, डॉ. पी.के. जैन, मुकेश जैन, प्रशांत जैन, मयंक जैन, कुणाल जैन, रविंद्र जैन, सत्यम जैन, ऋषभ जैन, विधान जैन, शुभ जैन, सारांश जैन और मानस जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सभी ने धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता कर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

आचार्य श्री के आदर्शों को अपनाने का संदेश

शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित आचार्य श्री विद्यासागर महामंडल विधान ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ उनके जीवन मूल्यों को याद करने का अवसर प्रदान किया। अभिषेक, शांतिधारा, विधान, बग्घी यात्रा और जीवन पर आधारित नाटिका के माध्यम से श्रद्धालुओं ने उनके त्याग, तपस्या और सेवा भाव को स्मरण किया।

निष्कर्ष: खिरनी गेट स्थित श्री लख्मीचंद पांड्या खंडेलवाल दिगंबर जैन ट्रस्ट परिसर में आयोजित यह धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। भव्य बग्घी यात्रा, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के जीवन पर आधारित नाटिका और हथकरघा निर्मित वस्त्रों की पहल ने आयोजन को विशेष पहचान दी। कार्यक्रम के माध्यम से श्रद्धालुओं को आत्मसंयम, स्वदेशी, स्वावलंबन और जीवमात्र के कल्याण के आदर्शों पर चलने का संदेश मिला।

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