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अर्जेंटीना में व्हेल के बच्चों की मौत: पैटागोनिया में सैकड़ों नन्ही व्हेल्स की जान गई

By yogesh jindoria | Published: Sep 25, 2026 12:58 PM

अर्जेंटीना में व्हेल के बच्चों की मौत: पैटागोनिया में सैकड़ों नन्ही व्हेल्स मृत, बैक्टीरिया पर शक

अर्जेंटीना के दक्षिणी हिस्से पैटागोनिया में नन्ही सदर्न राइट व्हेल्स की लगातार हो रही मौतों ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। चुबुत प्रांत के पेनिनसुला वाल्देस क्षेत्र के समुद्र तटों पर जून से लगातार मृत व्हेल के बच्चे मिल रहे हैं। इस सप्ताह भी कई नन्ही व्हेल्स के शव समुद्र तटों पर पाए गए हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक इस सीजन में युवा व्हेल्स की मृत्यु दर सामान्य वर्षों की तुलना में काफी अधिक दिखाई दे रही है। शुरुआती जांच में एक सामान्य समुद्री बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण को संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन इस घटना के पीछे पूरी तस्वीर समझने के लिए अभी और वैज्ञानिक जांच की जरूरत है।

इस साल करीब 1,375 व्हेल्स की हुई गिनती

पेनिनसुला वाल्देस दक्षिणी राइट व्हेल्स के प्रजनन के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस साल क्षेत्र में करीब 1,375 सदर्न राइट व्हेल्स की गिनती की गई है। इनमें लगभग 400 बच्चे हैं।

पिछले साल यानी 2025 में इस क्षेत्र में 2,110 व्हेल्स की रिकॉर्ड संख्या दर्ज की गई थी, जिनमें करीब 800 बच्चे शामिल थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस साल की संख्या में कमी अपने आप में असामान्य नहीं मानी जा रही है, क्योंकि आबादी में प्राकृतिक उतार-चढ़ाव भी होता है। हालांकि, इस साल नन्ही व्हेल्स की मौतों की संख्या ने अलग से चिंता पैदा की है।

बैक्टीरिया पर क्यों है शक?

चुबुत प्रांत की पर्यावरण एजेंसी और वैज्ञानिक टीम मृत व्हेल्स के नमूनों की जांच कर रही है। शुरुआती जानकारी में समुद्र में सामान्य रूप से पाए जाने वाले बैक्टीरिया को संभावित कारण माना गया है।

समुद्री स्तनपायी विशेषज्ञ मारियानो कोसकारेला के अनुसार, पशु चिकित्सकों को एरिसिपेलस नामक बीमारी की आशंका है। यह बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है और समुद्री स्तनधारियों में गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है। हालांकि, वैज्ञानिक स्तर पर यह पुष्टि करना अभी बाकी है कि यही संक्रमण मौजूदा मौतों का प्रत्यक्ष कारण है।

पेनिनसुला वाल्देस में पहले भी इस तरह के बैक्टीरिया से जुड़े संकेत मिल चुके हैं। संरक्षण संस्थान के अनुसार, 2013 के दौरान दो व्हेल के बच्चों की चोटों से लिए गए नमूनों में Erysipelothrix rhusiopathiae पाया गया था। हालांकि उस समय की जांच से यह साबित नहीं हुआ था कि बैक्टीरिया ही उन व्हेल्स की मौत का कारण था।

क्या इंसानी गतिविधियां जिम्मेदार हैं?

फिलहाल उपलब्ध जांच में इंसानी गतिविधियों को इस सामूहिक मौत के लिए जिम्मेदार ठहराने का कोई निर्णायक प्रमाण नहीं मिला है। चुबुत सरकार वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर मृत व्हेल्स के नमूने जुटा रही है और समुद्री परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि केवल मृत व्हेल्स की जांच करना पर्याप्त नहीं होगा। यह समझना भी जरूरी है कि समुद्री पानी की परिस्थितियों में ऐसा क्या बदलाव आया, जिससे सामान्य रूप से मौजूद बैक्टीरिया नन्ही व्हेल्स के लिए घातक साबित हो सकता है।

2012 में भी बढ़ी थी बच्चों की मौत

पेनिनसुला वाल्देस में नन्ही सदर्न राइट व्हेल्स की बड़ी संख्या में मौत का ऐसा मामला पहले भी सामने आ चुका है। संरक्षण विशेषज्ञों के मुताबिक 2012 में यहां 113 मृत व्हेल के बच्चे दर्ज किए गए थे, जो उस समय इस प्रजाति के लिए सबसे बड़ा दर्ज आंकड़ा था।

संरक्षण संस्थान का कहना है कि इस साल शुरुआती आंकड़े इससे भी बड़े स्तर की घटना की ओर संकेत कर रहे हैं। हालांकि अंतिम संख्या और उसके प्रभाव का आकलन सीजन खत्म होने के बाद ही बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।

वैज्ञानिक आबादी को लेकर क्या कह रहे हैं?

बड़ी संख्या में व्हेल के बच्चों की मौत निश्चित रूप से चिंता का विषय है, लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक फिलहाल इसे पूरी सदर्न राइट व्हेल आबादी के लिए मध्यम अवधि का बड़ा खतरा नहीं माना जा रहा है।

इसका एक कारण इस प्रजाति का लंबा जीवनकाल भी है। वैज्ञानिकों के अनुसार नवजात व्हेल्स की संख्या में किसी एक सीजन में होने वाली बड़ी गिरावट का पूरी आबादी पर असर समझने के लिए लंबे समय तक निगरानी जरूरी होती है।

मृत व्हेल मिलने पर लोगों से सावधानी की अपील

पेनिनसुला वाल्देस में वैज्ञानिकों को मृत या समुद्र तट पर फंसी व्हेल मिलने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना देने को कहा गया है। संरक्षण संस्थान ने लोगों से ऐसे जानवरों के पास जाने या उन्हें छूने से बचने की अपील की है। पालतू जानवरों को भी मृत या फंसी हुई व्हेल से दूर रखने की सलाह दी गई है।

वैज्ञानिकों के लिए समय पर सूचना मिलना महत्वपूर्ण है, क्योंकि शवों से जल्द नमूने लेने पर मौत की वजह से जुड़े संकेतों का अध्ययन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।

 

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