शाजापुर से कृष्णमृग और नीलगायों को कूनो भेजने का अभियान शुरू, 200 जवान तैनात
शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर और शुजालपुर क्षेत्र में लंबे समय से फसलों को नुकसान पहुंचा रहे कृष्णमृग और नीलगायों को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह भेजने का अभियान शुरू हो गया है। इस अभियान के दूसरे चरण में वन्यजीवों को कूनो नेशनल पार्क में स्थानांतरित किया जा रहा है। इसके लिए आधुनिक तकनीक, हेलीकॉप्टर और विशेष रूप से तैयार सुरक्षित बाड़ों की मदद ली जा रही है।
अभियान का उद्देश्य वन्यजीवों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम करना है। इस बड़े अभियान में वन विभाग के कर्मचारियों के साथ विशेषज्ञों और सुरक्षा बलों की टीम भी शामिल है।
हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक से पकड़े जा रहे वन्यजीव
अभियान के दौरान हेलीकॉप्टर की मदद से कृष्णमृग और नीलगायों को निर्धारित दिशा में हांका जा रहा है। इसके बाद उन्हें बोमा तकनीक के जरिए बनाए गए विशेष बाड़े तक पहुंचाया जाता है। बोमा एक खास तरह का सुरक्षित घेरा होता है, जहां वन्यजीवों को नियंत्रित तरीके से एकत्र किया जाता है। वहां से उन्हें सुरक्षित रूप से वाहन में स्थानांतरित कर निर्धारित स्थान तक ले जाया जाता है।
इस तकनीक का उद्देश्य वन्यजीवों को पकड़ने और स्थानांतरित करने के दौरान चोट लगने तथा तनाव की आशंका को कम करना है। पूरे अभियान में विशेषज्ञों की निगरानी में वन्यजीवों की सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों समेत 200 जवान तैनात
इस अभियान को सफल बनाने के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की गई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस अभियान में दक्षिण अफ्रीका की संस्था ‘कंजर्वेशन सॉल्यूशंस’ के 14 विशेषज्ञ शामिल हैं। इसके अलावा मालवा क्षेत्र और आसपास के इलाकों से वन विभाग के कर्मचारियों तथा अन्य कर्मियों को तैनात किया गया है।
अभियान के दौरान करीब 200 जवानों की टीम मुस्तैदी से काम कर रही है। अलग-अलग दल वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने, उन्हें सुरक्षित बाड़े तक पहुंचाने और परिवहन की व्यवस्था संभालने में जुटे हैं।
पिछले चरण में 913 वन्यजीवों को किया गया था स्थानांतरित
इस अभियान का पहला चरण पिछले साल चलाया गया था। उस दौरान कुल 913 वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया था। इनमें 846 कृष्णमृग और 67 नीलगाय शामिल थीं।
पहले चरण के अनुभवों के आधार पर दूसरे चरण में भी वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और स्थानांतरित करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। अधिकारियों और विशेषज्ञों की कोशिश है कि अभियान के दौरान वन्यजीवों को कम से कम परेशानी हो।
ग्रामीणों ने भी किया सहयोग
अभियान के दौरान हन्नूखेड़ी और आसपास के गांवों के लोगों ने सहयोग और संयम का परिचय दिया। ग्रामीणों ने अभियान वाले खेतों में प्रवेश नहीं किया और अपने पालतू कुत्तों को भी बांधकर रखा, ताकि वन्यजीवों को हांकने और सुरक्षित बाड़े तक पहुंचाने में कोई बाधा न आए।
ग्रामीणों के इस सहयोग से अभियान को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में मदद मिली। वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किसानों को राहत मिलने की उम्मीद
शाजापुर और शुजालपुर क्षेत्र में कृष्णमृग और नीलगायों की बढ़ती संख्या के कारण किसानों को लंबे समय से फसलों के नुकसान की समस्या का सामना करना पड़ रहा था। खेतों में वन्यजीवों के झुंड पहुंचने से फसलें प्रभावित होती थीं और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।
दूसरे चरण के इस अभियान से उम्मीद की जा रही है कि क्षेत्र में वन्यजीवों के कारण फसलों को होने वाले नुकसान में कमी आएगी। साथ ही, कृष्णमृग और नीलगायों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर उनके संरक्षण की दिशा में भी काम किया जा सकेगा।