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अलवर डॉग प्रतियोगिता 2026: पारला गौरिशंकर ने विस्फोटक खोजने में मारी बाजी

By aonenewstv | Published: Oct 12, 2026 09:29 AM

अलवर में SSB के खोजी कुत्तों की अनोखी प्रतियोगिता, किसी ने खोजे विस्फोटक तो किसी ने पकड़े नशीले पदार्थ

अलवर: राजस्थान के अलवर में सशस्त्र सीमा बल (SSB) के प्रशिक्षित खोजी कुत्तों की एक खास प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें कुत्तों ने विस्फोटक और नशीले पदार्थों की पहचान करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में अलग-अलग सीमांत क्षेत्रों से आए प्रशिक्षित डॉग और उनके हैंडलर्स ने हिस्सा लिया। अपने हुनर और प्रशिक्षण के दम पर इन खोजी कुत्तों ने सबका ध्यान खींचा।

यह आयोजन अलवर के डेरा स्थित सशस्त्र सीमा बल के डॉग ट्रेनिंग एंड ब्रीडिंग सेंटर (DT&BC) में इंटर-फ्रंटियर डॉग प्रतियोगिता-2026 के रूप में किया गया। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य प्रशिक्षित कुत्तों की कार्यक्षमता, खोजने की क्षमता और प्रशिक्षण के स्तर का आकलन करना था।

विस्फोटक खोजने की श्रेणी में पारला गौरिशंकर अव्वल

प्रतियोगिता की एक्सप्लोसिव डिटेक्शन (ED) श्रेणी में पटना फ्रंटियर की 16वीं बटालियन के CT(GD) पारला गौरिशंकर ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 79.4 प्रतिशत अंक हासिल कर विस्फोटक पहचानने की श्रेणी में बाजी मारी।

इस श्रेणी में खोजी कुत्तों की क्षमता को परखा गया कि वे किस तरह प्रशिक्षण के आधार पर विस्फोटक पदार्थों की पहचान कर सकते हैं। सुरक्षा बलों के लिए यह कौशल बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि विस्फोटक की समय रहते पहचान से संभावित खतरे को टालने में मदद मिल सकती है।

नशीले पदार्थों की पहचान में रानीखेत के पप्पू का शानदार प्रदर्शन

नारकोटिक्स डिटेक्शन (ND) श्रेणी में रानीखेत फ्रंटियर की पांचवीं बटालियन के CT(Vety) पप्पू ने शानदार प्रदर्शन किया। इस श्रेणी में प्रशिक्षित कुत्तों की नशीले पदार्थों को सूंघकर पहचानने की क्षमता का मूल्यांकन किया गया।

नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने और संदिग्ध वस्तुओं की जांच में ऐसे प्रशिक्षित कुत्ते सुरक्षा एजेंसियों की मदद करते हैं। उनकी सूंघने की क्षमता और नियमित प्रशिक्षण के कारण जांच के दौरान उन पदार्थों का पता लगाने में सहायता मिलती है, जिन्हें सामान्य तरीके से पहचानना मुश्किल हो सकता है।

सुरक्षा बलों के लिए क्यों अहम हैं खोजी कुत्ते?

सशस्त्र सीमा बल सहित विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां प्रशिक्षित कुत्तों की सहायता से तलाशी और सुरक्षा संबंधी कार्य करती हैं। विस्फोटक पहचानने वाले कुत्तों का इस्तेमाल संवेदनशील स्थानों की जांच में किया जा सकता है, जबकि नारकोटिक्स डिटेक्शन में प्रशिक्षित कुत्ते नशीले पदार्थों की तलाश में मदद करते हैं।

ऐसे कार्यों के लिए कुत्तों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। उनके साथ काम करने वाले हैंडलर्स भी लगातार अभ्यास करते हैं, ताकि वास्तविक परिस्थितियों में खोज और पहचान की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से पूरी की जा सके।

अलवर का डॉग ट्रेनिंग सेंटर निभाता है महत्वपूर्ण भूमिका

अलवर के डेरा स्थित SSB डॉग ट्रेनिंग एंड ब्रीडिंग सेंटर में सुरक्षा कार्यों के लिए कुत्तों के प्रशिक्षण और प्रजनन से संबंधित गतिविधियां संचालित की जाती हैं। यहां प्रशिक्षित कुत्तों को विभिन्न सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाता है।

इंटर-फ्रंटियर डॉग प्रतियोगिता जैसे आयोजनों से अलग-अलग सीमांत क्षेत्रों के प्रशिक्षित कुत्तों और उनके हैंडलर्स को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलता है। इससे प्रशिक्षण के स्तर का आकलन करने और कार्यक्षमता में सुधार की संभावनाओं को समझने में भी मदद मिलती है।

अलवर में आयोजित इस प्रतियोगिता में पारला गौरिशंकर और पप्पू का प्रदर्शन खास रहा। एक ने विस्फोटक पहचानने की श्रेणी में अपनी दक्षता दिखाई, तो दूसरे ने नशीले पदार्थों की पहचान में शानदार प्रदर्शन किया।

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