RBI GDP Growth अनुमान बढ़ा, संजय मल्होत्रा बोले- ग्लोबल टेंशन के बावजूद भारतीय इकोनॉमी में दम
वेस्ट एशिया संकट और कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भरोसा जताया है। RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP Growth का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि, महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी भी की है।
RBI ने बढ़ाया GDP Growth का अनुमान
RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अक्टूबर की बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक विकास दर का अनुमान 7.1 प्रतिशत किया है। इससे पहले अगस्त की नीति समीक्षा में यह अनुमान 6.7 प्रतिशत था। RBI के मुताबिक घरेलू आर्थिक गतिविधियों, निवेश और खपत में मजबूती के चलते ग्रोथ को लेकर तस्वीर बेहतर हुई है।
RBI ने दूसरी तिमाही के लिए GDP Growth का अनुमान 7.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए 6.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 6.8 प्रतिशत रखा है। वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही के लिए ग्रोथ का अनुमान 7.1 प्रतिशत लगाया गया है।
RBI गवर्नर बोले- इकोनॉमी में दम
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों में व्यापक स्तर पर मजबूती दिखाई दे रही है।
भारत की अर्थव्यवस्था को वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार बनी हुई है।
रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी
मजबूत GDP Growth के अनुमान के साथ RBI ने महंगाई पर बढ़ते दबाव को देखते हुए बड़ा फैसला लिया। MPC ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली रेपो रेट बढ़ोतरी है।
RBI ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। इसका संकेत है कि फिलहाल महंगाई पर नियंत्रण केंद्रीय बैंक की प्राथमिकता बनी हुई है और निकट अवधि में दरों में कटौती की उम्मीद कम हो गई है।
महंगाई का अनुमान भी बढ़ा
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए CPI आधारित महंगाई का अनुमान भी बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले यह अनुमान 5 प्रतिशत था। RBI के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों से महंगाई के मोर्चे पर जोखिम बढ़ा है।
RBI ने दूसरी तिमाही में महंगाई 4.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।
वेस्ट एशिया संकट और कच्चे तेल पर नजर
RBI ने कहा कि वेस्ट एशिया में संघर्ष के दोबारा बढ़ने और इसके चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव से दुनिया की अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां बढ़ी हैं। महंगे कच्चे तेल का असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर सीधे पड़ सकता है और इससे महंगाई तथा चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके बावजूद RBI का मानना है कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था में पर्याप्त मजबूती है। जून तिमाही में भारत की वास्तविक GDP Growth 7.8 प्रतिशत रही, जो RBI के पहले लगाए गए 7 प्रतिशत के अनुमान से काफी अधिक थी।
आगे क्या होगा?
RBI के ताजा फैसले से साफ है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ मजबूत आर्थिक गतिविधियों के कारण GDP Growth का अनुमान बढ़ाया गया है, वहीं दूसरी तरफ महंगाई और महंगे कच्चे तेल के जोखिम को देखते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की गई है।
संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि आगे की मौद्रिक नीति वास्तविक महंगाई और आर्थिक विकास के आंकड़ों पर निर्भर करेगी। ऐसे में आने वाले महीनों में महंगाई, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां RBI के अगले फैसलों में अहम भूमिका निभा सकती हैं।