Neha Bora Delhi High Court: दिल्ली पुलिस के नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती, 10 हजार रुपये के बॉन्ड की मांग पर विवाद
नई दिल्ली। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। यह मामला दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन और उसके बाद पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई से जुड़ा है। पुलिस ने नेहा बोरा को नोटिस जारी कर जांच अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार प्रस्तुत करने को कहा था।
दिल्ली पुलिस के नोटिस के खिलाफ अदालत पहुंचीं नेहा बोरा
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने 18 अक्टूबर को नेहा बोरा को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं 126/130 और 135(3) के तहत नोटिस जारी किया था। नोटिस में उनसे शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया था।
पुलिस की ओर से 10,000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड और एक जमानतदार जमा करने की मांग की गई थी। इस कार्रवाई के खिलाफ नेहा बोरा ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने पुलिस के नोटिस को चुनौती देते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।
मामले में अदालत की सुनवाई और उसके बाद आने वाले आदेश पर आगे की कानूनी प्रक्रिया निर्भर करेगी।
SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर प्रदर्शन
यह विवाद कथित तौर पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। AISA ने अपने बयान में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को निशाना बना रही हैं।
संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल उठाना और विरोध दर्ज कराना नागरिकों का अधिकार है। AISA ने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए इसे प्रदर्शनकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश बताया है।
हालांकि, पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोप संगठन का पक्ष हैं। मामले में अदालत के समक्ष रखे गए तथ्यों और संबंधित पक्षों की दलीलों के आधार पर ही कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
BNSS की धाराओं के तहत जारी हुआ नोटिस
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की संबंधित धाराओं के तहत शांति बनाए रखने और संभावित अशांति रोकने से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। नेहा बोरा को जारी नोटिस में भी शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड और जमानतदार प्रस्तुत करने की मांग की गई।
इस नोटिस को चुनौती देने के बाद अब मामले का कानूनी पहलू दिल्ली हाईकोर्ट में विचाराधीन है। अदालत में याचिका पर क्या रुख अपनाया जाता है, इससे आगे की कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है।
अदालत के फैसले पर टिकी नजरें
नेहा बोरा की याचिका ऐसे समय में आई है, जब SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक तथा छात्र संगठनों के बीच बहस जारी है। AISA ने पुलिस की कार्रवाई को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल, इस मामले में हाईकोर्ट की ओर से आने वाले आदेश और पुलिस के नोटिस पर होने वाली आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत में सुनवाई से जुड़े अंतिम निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
नोट: मामले में पुलिस के नोटिस, याचिका और AISA के बयान से जुड़ी जानकारी उपलब्ध विवरण पर आधारित है। अदालत के अंतिम आदेश की पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए।