जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस की बढ़ी मुश्किलें, बागी विधायकों की तीसरी बंद कमरे में बैठक
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) में अंदरूनी मतभेद कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के कैबिनेट फेरबदल के बाद पार्टी के कई विधायक नाराज बताए जा रहे हैं। इसी नाराजगी के बीच विधायकों ने एक बार फिर बंद कमरे में बैठक की और आगे की रणनीति पर चर्चा की। कैबिनेट फेरबदल के बाद नाराज विधायकों की यह तीसरी बैठक बताई जा रही है।
4 नवंबर को हुई इस बैठक में विधायकों ने अपनी नाराजगी जाहिर की और पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी मांगें रखने को लेकर चर्चा की। बैठक श्रीनगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक नजीर अहमद गुरेजी के आवास पर हुई। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को फिर चर्चा में ला दिया है।
कैबिनेट फेरबदल के बाद बढ़ी नाराजगी
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 27 अक्टूबर को अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार किया था। इसके बाद पार्टी के कुछ वरिष्ठ विधायक मंत्री पद नहीं मिलने और संगठन में अपनी भूमिका को लेकर असंतोष जता रहे हैं।
नाराज विधायकों की ओर से पहले भी बैठकें की गई थीं। इन बैठकों में कैबिनेट में बदलाव, पार्टी के कामकाज और नेतृत्व के साथ संवाद जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। अब तीसरी बैठक के जरिए विधायकों ने आगे की रणनीति पर विचार किया है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ विधायकों की मांग है कि मंत्रिमंडल में वरिष्ठ नेताओं को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए और सरकार के कामकाज में उनकी बात सुनी जाए। हालांकि, पार्टी में किसी औपचारिक टूट या सामूहिक इस्तीफे की पुष्टि नहीं हुई है।
मुबारक गुल ने दिया था अल्टीमेटम
पार्टी के वरिष्ठ नेता और छह बार विधायक रह चुके मुबारक गुल भी कैबिनेट फेरबदल से नाराज बताए जा रहे हैं। उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी। इसके बाद उनके समर्थकों ने भी नाराजगी जाहिर की और उनके समर्थन में प्रदर्शन किए।
मुबारक गुल ने पार्टी नेतृत्व से अपनी मांगों पर विचार करने के लिए 4 नवंबर तक का समय दिया था। इसी दिन उन्होंने समर्थकों के साथ बैठक भी की। हालांकि, जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनसे अपने अगले कदम का ऐलान करने की उम्मीद थी, उसे उन्होंने टाल दिया।
बैठक के बाद गुल ने कहा कि वह अपने साथियों की भावनाओं और करीब 75 साल पुरानी पार्टी की विरासत का सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सही समय आने पर चीजें सामने आएंगी।
सांसद रुहुल्लाह के इस्तीफे से भी पार्टी को झटका
नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए एक और बड़ा घटनाक्रम सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का पार्टी छोड़ने का फैसला है। श्रीनगर से सांसद रुहुल्लाह ने पार्टी से इस्तीफा देने के साथ लोकसभा सदस्यता छोड़ने की भी घोषणा की थी।
रुहुल्लाह ने आरोप लगाया कि पार्टी ने जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों और अनुच्छेद 370 की बहाली से जुड़े चुनावी वादों को पूरा नहीं किया। उनके इस फैसले से पार्टी के भीतर चल रहे मतभेद और गहरे हो गए हैं।
रुहुल्लाह के पार्टी छोड़ने और मुबारक गुल की नाराजगी के बीच विधायकों की तीसरी बैठक को नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
पार्टी नेतृत्व के सामने मतभेद दूर करने की चुनौती
लगातार हो रही बैठकों और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व के सामने पार्टी में एकजुटता बनाए रखने की चुनौती है। दूसरी ओर, पार्टी के कुछ नेताओं ने मतभेदों को आंतरिक मामला बताते हुए उन्हें बातचीत से सुलझाने की बात कही है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नाराज विधायक आगे क्या कदम उठाएंगे। इतना जरूर है कि कैबिनेट फेरबदल के बाद पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आया है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व और नाराज विधायकों के बीच बातचीत से इस विवाद की दिशा तय हो सकती है।