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Maulana Fazlur Rehman Warns of Pakistan Army’s Growing Influence

By aonenewstv | Published: Oct 17, 2026 11:32 AM

पाकिस्तान में सेना के बढ़ते प्रभाव पर मौलाना फजलुर रहमान की चेतावनी, शहबाज सरकार को बताया ‘फर्जी सरकार’

उपशीर्षक: मुल्तान की जनसभा में JUI-F प्रमुख ने उठाए लोकतंत्र और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े सवाल, इमरान खान की पार्टी से जुड़े घटनाक्रम के बीच बयान चर्चा में

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में सेना के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को लेकर विपक्षी नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सरकार को ‘फर्जी सरकार’ बताते हुए देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक अधिकारों को लेकर सवाल उठाए।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, फजलुर रहमान ने शुक्रवार को पंजाब प्रांत के मुल्तान जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान में सेना की भूमिका, विपक्षी दलों की गतिविधियों और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर बहस जारी है।

फजलुर रहमान लंबे समय से पाकिस्तान की राजनीति में सक्रिय हैं और विपक्ष के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। उनके ताजा बयान को शहबाज शरीफ सरकार और देश की राजनीतिक व्यवस्था के प्रति उनके विरोध के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, सरकार को ‘फर्जी सरकार’ कहना उनका राजनीतिक आरोप है, कोई स्थापित कानूनी निष्कर्ष नहीं।

सेना के प्रभाव और लोकतंत्र पर उठाए सवाल

मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की राजनीति में सेना के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक फैसलों और सरकार के संचालन में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

पाकिस्तान में सेना का राजनीतिक मामलों में प्रभाव लंबे समय से बहस का विषय रहा है। देश के इतिहास में सैन्य शासन के दौर भी रहे हैं और नागरिक सरकारों तथा सेना के बीच अधिकारों और निर्णय लेने की भूमिका को लेकर कई बार विवाद सामने आए हैं।

फजलुर रहमान का ताजा बयान इसी व्यापक राजनीतिक बहस के बीच आया है। उन्होंने सरकार की वैधता पर सवाल उठाते हुए अपनी असहमति जाहिर की। उनके बयान से यह स्पष्ट है कि विपक्ष का एक वर्ग देश में राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखना चाहता है।

इमरान खान से मुलाकात और इलाज का मुद्दा भी उठा

मुल्तान की जनसभा में फजलुर रहमान ने इमरान खान से जेल में मुलाकात और उनके इलाज की मांग को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष की मांगों को लेकर लंबा मार्च निकाला जाता है, तो क्या सरकार उसे रोकने के लिए बल प्रयोग करेगी और लोगों की जान जोखिम में डालेगी?

उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी उनकी रिहाई, स्वास्थ्य संबंधी उपचार और उनसे मुलाकात की अनुमति जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बना रही है। फजलुर रहमान ने अपने बयान में सरकार की निर्णय लेने की क्षमता पर भी सवाल उठाए।

खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन पर विवाद

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल लागू किए जाने और PTI के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को हटाने के फैसले ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है। संघीय सरकार ने सुरक्षा स्थिति और बढ़ते उग्रवादी हमलों को इस कदम का आधार बताया है, जबकि PTI ने इसे राजनीतिक कार्रवाई करार दिया है।

फजलुर रहमान ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र और प्रांतीय अधिकारों के खिलाफ बताया है। उनका तर्क है कि किसी प्रांत की निर्वाचित सरकार के खिलाफ ऐसा कदम उठाने से पहले संवैधानिक प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों का ध्यान रखा जाना चाहिए। <

सेना और सरकार के संबंध फिर चर्चा में

पाकिस्तान में सेना की भूमिका लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। मौजूदा विवाद में भी विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं कि बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों में निर्वाचित सरकार की स्वतंत्रता कितनी है।

फजलुर रहमान ने शहबाज शरीफ सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ऐसे नेतृत्व का समर्थन नहीं कर सकते, जिसके पास फैसले लेने की वास्तविक स्वतंत्रता न हो। उनका ‘फर्जी सरकार’ वाला बयान इसी आरोप का हिस्सा है। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आरोप है और इसे सरकार की कानूनी स्थिति के बारे में स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

दूसरी ओर, पाकिस्तान की संघीय सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा में कार्रवाई के पीछे सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया है। इस तरह मौजूदा विवाद में एक तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा और दूसरी तरफ प्रांतीय स्वायत्तता तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल सामने हैं।

आगे क्या होगा?

मौलाना फजलुर रहमान के ताजा बयान से पाकिस्तान में सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव के और तेज होने के संकेत मिलते हैं। खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल, इमरान खान के इलाज और उनसे मुलाकात की मांग तथा सेना की राजनीतिक भूमिका जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संघीय सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत का कोई रास्ता निकलता है या नहीं। साथ ही, खैबर पख्तूनख्वा में लागू किए गए कदमों को लेकर कानूनी और राजनीतिक स्तर पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर भी नजर रहेगी।

निष्कर्ष: मौलाना फजलुर रहमान का बयान केवल शहबाज शरीफ सरकार की आलोचना तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में पाकिस्तान में सत्ता के इस्तेमाल, प्रांतीय अधिकारों, विपक्ष के साथ व्यवहार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका से जुड़े सवाल हैं। हालांकि, इन मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के दावे अलग-अलग हैं और उनके बीच राजनीतिक विवाद जारी है।

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