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Lucknow Bulldozer Action: लखनऊ में वकीलों के 245 अवैध चैंबरों पर बुलडोजर कार्रवाई, भारी हंगामा

By aonenewstv | Published: Oct 25, 2026 06:48 AM

Lucknow Bulldozer Action: लखनऊ में वकीलों के चैंबरों पर चला बुलडोजर, 245 अवैध निर्माण चिह्नित, विरोध में भारी हंगामा

लखनऊ में हाई कोर्ट के आदेश पर वकीलों के अवैध चैंबरों के खिलाफ नगर निगम की बुलडोजर कार्रवाई से हंगामा खड़ा हो गया। नगर निगम ने कुल 245 चैंबरों को चिह्नित किया है। कार्रवाई का विरोध करते हुए अधिवक्ताओं ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। वकीलों का कहना है कि वे पिछले 15 से 20 वर्षों से इन चैंबरों में बैठकर वकालत कर रहे हैं और इन्हें हटाने से उनकी आजीविका प्रभावित होगी।

लखनऊ, 25 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अवैध निर्माण के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई को लेकर वकीलों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई। हाई कोर्ट के आदेश पर नगर निगम की टीम बुलडोजर और भारी पुलिस बल के साथ वकीलों के चैंबरों को ध्वस्त करने पहुंची। जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौके पर एकत्र हो गए और विरोध-प्रदर्शन करने लगे।

वकीलों ने नगर निगम की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वर्षों से इन चैंबरों में बैठकर वे अपना पेशेवर कार्य कर रहे हैं। अचानक चैंबर हटाए जाने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।

प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा रही है और चिह्नित अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया इसी के तहत शुरू की गई है।

हाई कोर्ट के आदेश पर नगर निगम की बड़ी कार्रवाई

लखनऊ नगर निगम ने अवैध रूप से बनाए गए वकीलों के चैंबरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की थी। इसके तहत कुल 245 चैंबरों को चिह्नित किया गया।

नगर निगम की टीम ने संबंधित चैंबरों पर लाल निशान लगाए और उनकी पहचान के लिए नंबर भी दर्ज किए।

रविवार को नगर निगम की टीम बुलडोजर और अन्य संसाधनों के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया।

नगर निगम के अनुसार, चिह्नित निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है।

हालांकि, सभी 245 चैंबरों को ध्वस्त किए जाने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। यह संख्या नगर निगम द्वारा चिह्नित निर्माणों की है।

बुलडोजर पहुंचते ही वकीलों ने शुरू किया विरोध

नगर निगम की टीम के मौके पर पहुंचते ही वकीलों में नाराजगी फैल गई। बड़ी संख्या में अधिवक्ता कार्रवाई स्थल पर एकत्र हो गए और बुलडोजर कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया।

वकीलों ने धरना-प्रदर्शन करते हुए अपनी समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा।

अधिवक्ताओं का कहना है कि चैंबर उनके पेशेवर जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यहां बैठकर वे अपने मुवक्किलों से मुलाकात करते हैं, मुकदमों से संबंधित दस्तावेज तैयार करते हैं और न्यायिक कार्यों की तैयारी करते हैं।

ऐसे में चैंबरों को हटाए जाने से उनके दैनिक कामकाज पर सीधा असर पड़ सकता है।

15 से 20 साल से चैंबरों में बैठकर कर रहे वकालत

विरोध कर रहे अधिवक्ताओं ने दावा किया कि वे पिछले 15 से 20 वर्षों से इन चैंबरों में बैठकर वकालत कर रहे हैं।

उनका कहना है कि लंबे समय से इन स्थानों पर उनकी पेशेवर गतिविधियां संचालित हो रही हैं। ऐसे में बिना वैकल्पिक व्यवस्था के चैंबरों को हटाया जाना उनके लिए गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है।

वकीलों ने स्पष्ट किया कि वे न्यायालय के आदेश या अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई का विरोध करने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन प्रशासन को उनके रोजगार और पेशेवर जरूरतों का भी ध्यान रखना चाहिए।

अधिवक्ताओं का तर्क है कि चैंबर हटने से न केवल उनके कामकाज पर असर पड़ेगा, बल्कि मुवक्किलों को भी अपने वकीलों से मिलने में कठिनाई हो सकती है।

वकीलों ने उठाया रोजी-रोटी का सवाल

बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में अधिवक्ताओं ने अपनी आजीविका का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

वकीलों का कहना है कि चैंबर केवल बैठने की जगह नहीं, बल्कि उनके पेशेवर कार्य का केंद्र हैं।

यहीं से मुकदमों की तैयारी, दस्तावेजों का अध्ययन और मुवक्किलों से बातचीत जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं।

अधिवक्ताओं ने प्रशासन से मांग की कि चैंबरों को हटाने से पहले उनके कामकाज के लिए उपयुक्त वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाए।

उनका कहना है कि न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था भी बनी रहे और अधिवक्ताओं की आजीविका भी प्रभावित न हो।

245 चैंबरों पर लाल निशान, नंबर भी दर्ज

नगर निगम की कार्रवाई में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य 245 अवैध चैंबरों को चिह्नित किया जाना है।

इन निर्माणों पर लाल निशान लगाए गए हैं और नंबर दर्ज किए गए हैं, ताकि कार्रवाई के दौरान उनकी पहचान की जा सके।

नगर निगम की इस तैयारी से स्पष्ट है कि संबंधित निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है।

हालांकि, चिह्नित किए गए सभी निर्माणों के संबंध में आगे की कार्रवाई और उसकी समयसीमा को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

मौके पर भारी पुलिस बल तैनात

वकीलों के विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए कार्रवाई स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।

नगर निगम की टीम के साथ बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

अधिवक्ताओं की भीड़ जुटने और धरना-प्रदर्शन शुरू होने के बाद प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई।

पुलिस बल की मौजूदगी में नगर निगम की टीम ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

न्यायालय के आदेश और अधिवक्ताओं की मांगों के बीच विवाद

इस पूरे मामले में एक ओर हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर अधिवक्ताओं की आजीविका और पेशेवर कार्यों से जुड़ी चिंताएं हैं।

नगर निगम का पक्ष है कि अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की जा रही है।

वहीं अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रशासन को उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी विचार करना चाहिए।

वकीलों के अनुसार, वर्षों से स्थापित चैंबरों को हटाने के कारण उनके कामकाज की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

इस विवाद का समाधान न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए संबंधित पक्षों के बीच बातचीत से निकालने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

चैंबर हटने से मुवक्किलों को भी हो सकती है परेशानी

वकीलों के चैंबर न्यायिक कार्यों से जुड़ी अनेक गतिविधियों का केंद्र होते हैं।

अधिवक्ता इन स्थानों पर अपने मुवक्किलों से मिलते हैं और मुकदमों से संबंधित जरूरी दस्तावेज तैयार करते हैं।

यदि बड़ी संख्या में चैंबर हटाए जाते हैं और उनके स्थान पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती, तो अधिवक्ताओं के साथ-साथ मुवक्किलों को भी असुविधा हो सकती है।

विशेष रूप से उन लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जो नियमित रूप से कानूनी सलाह या मुकदमों की पैरवी के लिए संबंधित चैंबरों में पहुंचते हैं।

हालांकि, इस संभावित प्रभाव का वास्तविक आकलन कार्रवाई की सीमा और आगे की प्रशासनिक व्यवस्थाओं के आधार पर ही किया जा सकेगा।

अब प्रशासन के अगले कदम पर नजर

लखनऊ में वकीलों के चैंबरों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई ने प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच विवाद की स्थिति पैदा कर दी है।

नगर निगम हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है, जबकि वकील अपनी आजीविका और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग को लेकर विरोध जता रहे हैं।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन चिह्नित 245 चैंबरों के संबंध में आगे क्या कदम उठाता है और अधिवक्ताओं की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।

 

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