Kanpur Fake Encounter Case: 35 साल पुराने कथित फर्जी एनकाउंटर में 12 पुलिसकर्मियों पर FIR
कानपुर, 19 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के कानपुर में करीब 35 साल पुराने कथित फर्जी पुलिस एनकाउंटर मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। सीबीसीआईडी की जांच के बाद तत्कालीन पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला 22 अगस्त 1991 को महाराजपुर थाना क्षेत्र में हुई कथित मुठभेड़ से जुड़ा है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है।
प्लॉट न देने की रंजिश में फर्जी एनकाउंटर की साजिश का आरोप
जांच के अनुसार, 22 अगस्त 1991 को तत्कालीन थानाध्यक्ष विद्यासागर त्रिपाठी ने नरवाल मोड़ के पास डीसीएम वाहन से लूट और पुलिस मुठभेड़ की कहानी पेश की थी। पुलिस का दावा था कि डीसीएम से लूट की घटना के बाद आरोपियों के साथ मुठभेड़ हुई थी।
हालांकि, बाद में इस घटना पर सवाल उठने लगे। मामले की जांच में आरोप लगाया गया कि कथित मुठभेड़ के पीछे जमीन का प्लॉट नहीं देने से जुड़ी रंजिश थी। आरोप है कि इसी विवाद के चलते फर्जी एनकाउंटर की कहानी तैयार की गई और निर्दोष लोगों को मामले में फंसाया गया।
इन आरोपों की पुष्टि और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका तय करना अब जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
डीसीएम चालक और कंडक्टर के बयान से आया अहम मोड़
इस पुराने मामले में डीसीएम चालक और कंडक्टर के बयान महत्वपूर्ण साबित हुए। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने जिन लोगों से लूट होने की बात कही थी, उन्होंने बाद में अपने बयानों में पुलिस के दावे पर सवाल उठाए।
इन बयानों के आधार पर कथित मुठभेड़ की परिस्थितियों की दोबारा जांच की गई। जांच एजेंसी ने घटना से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की। इसके बाद मामले में तत्कालीन पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच आगे बढ़ी।
करीब साढ़े तीन दशक पुराने इस प्रकरण में गवाहों के बयान और पुराने दस्तावेज महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। सीबीसीआईडी की जांच के बाद दर्ज एफआईआर से मामले में एक बार फिर कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला है।
सीबीसीआईडी जांच के बाद 12 पुलिसकर्मियों पर मुकदमा
इस मामले में सीबीसीआईडी इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने महाराजपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन थानाध्यक्ष विद्यासागर त्रिपाठी समेत कुल 12 पुलिसकर्मियों को मामले में आरोपी बनाया गया है।
बताया गया है कि इस प्रकरण में कुल 18 लोगों को दोषी ठहराया गया था, जिनमें से छह की मौत हो चुकी है। शेष 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ अब एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला लंबे समय से जांच और कानूनी प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों से गुजरता रहा है। सीबीसीआईडी की जांच के आधार पर दर्ज मुकदमा पुराने घटनाक्रम की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
1991 की घटना पर अब फिर तेज हुई कानूनी कार्रवाई
22 अगस्त 1991 को हुई इस घटना के लगभग 35 साल बाद एफआईआर दर्ज होने से कानपुर में कथित फर्जी एनकाउंटर का मामला फिर चर्चा में आ गया है। पुराने मामलों में गवाहों के बयान, दस्तावेजों की उपलब्धता और संबंधित व्यक्तियों की स्थिति जांच को जटिल बना सकती है।
फिलहाल, पुलिस और जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। मामले में दर्ज आरोपों की जांच, संबंधित साक्ष्यों का परीक्षण और न्यायालय में होने वाली कार्यवाही से ही पूरे घटनाक्रम की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
रिपोर्ट: AOne News TV