गुजरात: के सूरत में आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके पिता भगवानराव दीपके से जुड़े कुछ वित्तीय मामलों की जांच की मांग की है। तिवारी ने दावा किया है कि उन्होंने इस संबंध में भारत निर्वाचन आयोग (ECI), सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्स्स एंड कस्टम्स (CBIC) और महाराष्ट्र सरकार को अलग-अलग शिकायतें भेजी हैं।
तिवारी ने आरोप लगाया कि भगवानराव दीपके, जो कथित तौर पर महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) में जूनियर इंजीनियर रहे हैं, उनकी आय के मुकाबले परिवार द्वारा वहन किए गए कुछ खर्चों की जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने CJP की फंडिंग और उसकी कानूनी स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं।
ध्यान दें: ये सभी आरोप और दावे शिकायतकर्ता अमित तिवारी द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट लिखे जाने तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थी और किसी सक्षम एजेंसी ने इनकी पुष्टि नहीं की है।
तीन अलग-अलग संस्थाओं में शिकायत का दावा
अमित तिवारी ने कहा कि उन्होंने तीन अलग-अलग संस्थाओं के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है।
उनके अनुसार:
- भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से CJP की कानूनी स्थिति की जांच करने का अनुरोध किया गया है।
- CBIC से कथित फंडिंग के कर संबंधी पहलुओं की जांच की मांग की गई है।
- महाराष्ट्र सरकार से भगवानराव दीपके की संपत्ति और आय के स्रोतों की जांच का अनुरोध किया गया है।
तिवारी का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
US में पढ़ाई के खर्च पर उठाया सवाल
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि भगवानराव दीपके एक जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे और उनकी आय सीमित थी, तो यह जांच का विषय होना चाहिए कि परिवार ने अमेरिका में उच्च शिक्षा का खर्च किस प्रकार वहन किया।
उन्होंने मांग की है कि संबंधित एजेंसियां इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें और यदि आय से अधिक संपत्ति का मामला बनता है तो आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने जांच शुरू होने या किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है।
CJP की फंडिंग पर भी सवाल
अमित तिवारी ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि CJP यदि राजनीतिक दल की तरह कार्य कर रही है और चंदा एकत्र कर रही है, तो उसे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) के प्रावधानों के अनुसार पंजीकरण कराना चाहिए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि संगठन को मिली कथित वित्तीय सहायता के कर संबंधी पहलुओं की भी जांच होनी चाहिए।
यह ध्यान देने योग्य है कि इन दावों पर संबंधित विभागों की ओर से अभी कोई आधिकारिक निर्णय या टिप्पणी सामने नहीं आई है।
आंदोलन और बयानों पर भी जताई आपत्ति
अमित तिवारी ने CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों को लेकर भी अपनी राय व्यक्त की। उनका कहना है कि आंदोलन की शुरुआत नीट पेपर लीक जैसे मुद्दे से हुई थी, लेकिन बाद में यह अन्य राजनीतिक विषयों तक पहुंच गया।
उन्होंने कुछ बयानों और नारों पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि इस संबंध में भी उन्होंने संबंधित अधिकारियों को शिकायत भेजी है।
इन आरोपों पर भी CJP या अभिजीत दीपके की ओर से इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।
अब क्या होगा आगे?
यदि संबंधित संस्थाएं शिकायतों को स्वीकार करती हैं, तो वे अपने नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार प्रारंभिक जांच कर सकती हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कोई तथ्यात्मक आधार है या नहीं।
फिलहाल यह मामला शिकायत के स्तर पर है और किसी भी एजेंसी ने अभी तक किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोपों की पुष्टि नहीं की है।