हरियाणा CM नायब सिंह सैनी का किसानों को बड़ा तोहफा, गन्ने का भाव 450 रुपये प्रति क्विंटल करने का ऐलान, गुजरात से 50 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव
चंडीगढ़, 30 अक्टूबर 2026। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश के किसानों, युवाओं और उद्योग जगत को लेकर कई अहम फैसले और घोषणाएं की हैं। गन्ना किसानों के लिए अगले दो वर्षों में 35 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का ऐलान किया गया है। इसके तहत मौजूदा पेराई सत्र 2026-27 में गन्ने का भाव 430 रुपये प्रति क्विंटल और 2027-28 में 450 रुपये प्रति क्विंटल होगा। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री के गुजरात दौरे से हरियाणा को 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इसके अलावा 31 अक्टूबर को पंचकूला में रन फॉर यूनिटी का आयोजन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार का जोर किसानों की आय बढ़ाने, प्रदेश में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने, रोजगार के अवसर पैदा करने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने पर है। हालांकि, गन्ने के नए भाव को लेकर किसान संगठनों ने अपनी असहमति भी जाहिर की है।
गन्ना किसानों को बड़ी राहत, दो साल में 35 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ेगा भाव
हरियाणा सरकार ने गन्ना उत्पादक किसानों के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अगले दो वर्षों में गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) में कुल 35 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की घोषणा की है।
नई दरों के अनुसार, पेराई सत्र 2026-27 में किसानों को गन्ने का भाव 430 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा। इसके बाद 2027-28 के पेराई सत्र में इसे बढ़ाकर 450 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया जाएगा।
इससे पहले 2025-26 के पेराई सत्र में गन्ने का भाव 415 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तरह सरकार ने मौजूदा सत्र में 15 रुपये और अगले सत्र में 20 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, डीजल, खाद, मजदूरी और खेती से जुड़ी दूसरी लागतों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में गन्ने का भाव बढ़ाने का उद्देश्य किसानों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करना है।
सरकार के अनुमान के मुताबिक, गन्ने की औसत पैदावार 700 से 800 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहती है। इस आधार पर दो वर्षों में 35 रुपये प्रति क्विंटल की कुल बढ़ोतरी से किसानों को प्रति एकड़ लगभग 10,000 से 11,300 रुपये तक अतिरिक्त आय हो सकती है।
गन्ने के नए भाव से किसान संगठन नाराज, 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग
सरकार की ओर से गन्ने का भाव बढ़ाने की घोषणा के बाद किसान संगठनों ने इस पर सवाल उठाए हैं। भारतीय किसान यूनियन के अलग-अलग संगठनों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और सरकार की ओर से की गई बढ़ोतरी किसानों की जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है।
भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी से जुड़े प्रतिनिधियों ने गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग उठाई है। संगठन के प्रवक्ता राकेश बैन्स ने बढ़ोतरी को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि किसानों की उत्पादन लागत के मुकाबले यह वृद्धि काफी कम है।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत की हरियाणा इकाई के अध्यक्ष रतन मान ने भी सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई है। किसान संगठनों ने सरकार से गन्ने का भाव दोबारा तय करने की मांग की है।
इस मुद्दे को लेकर 30 अक्टूबर को कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के रादौर स्थित आवास पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई गई है। वहीं, भारतीय किसान यूनियन टिकैत की ओर से 31 अक्टूबर को करनाल में बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय करने की बात कही गई है।
ऐसे में गन्ने के नए भाव को लेकर हरियाणा में सरकार और किसान संगठनों के बीच आने वाले दिनों में राजनीतिक और किसान आंदोलन से जुड़ी गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
गुजरात दौरे से हरियाणा को 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव
हरियाणा में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुजरात का दो दिवसीय दौरा किया। 27 और 28 अक्टूबर को सूरत और गांधीनगर में आयोजित बैठकों के दौरान मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ चर्चा की।
इस दौरे से हरियाणा को 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें रक्षा, रियल एस्टेट, तेल एवं गैस, सेमीकंडक्टर, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रक्षा, रियल एस्टेट और तेल एवं गैस क्षेत्र में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आए। इसके अलावा कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में लगभग 1,400 करोड़ रुपये तथा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में करीब 2,900 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मिले हैं। संपीड़ित बायोगैस और नागरिक उड्डयन क्षेत्र में भी निवेश संबंधी समझौते हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने निवेशकों को हरियाणा की औद्योगिक नीतियों, बेहतर सड़क संपर्क, कुशल श्रमिकों और कारोबार के अनुकूल माहौल के बारे में जानकारी दी।
सरकार की मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 के तहत 2030-31 तक लगभग 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने और 10 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों को अप्रैल 2027 में प्रस्तावित हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।
31 अक्टूबर को पंचकूला में रन फॉर यूनिटी, CM सैनी करेंगे अगुवाई
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर हरियाणा में 31 अक्टूबर को रन फॉर यूनिटी का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पंचकूला में इस कार्यक्रम की अगुवाई करेंगे।
यह दौड़ सुबह 6:30 बजे माता मनसा देवी कॉम्प्लेक्स स्थित शिवालिक कंट्री क्लब से शुरू होगी। इसी तरह के कार्यक्रम हरियाणा के सभी जिला मुख्यालयों पर भी आयोजित किए जाएंगे।
इस आयोजन का उद्देश्य सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर राष्ट्रीय एकता, अखंडता और भाईचारे का संदेश देना है। कार्यक्रम में युवाओं, खिलाड़ियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा।
हरियाणा सरकार इस आयोजन को हरियाणा उदय पहल के तहत आयोजित कर रही है। प्रशासन को सुरक्षा, यातायात और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी अधिकारियों के विदेशी दौरों की प्रक्रिया होगी व्यवस्थित
हरियाणा सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के आधिकारिक विदेशी दौरों से संबंधित प्रस्तावों की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए 30 अक्टूबर को निर्देश जारी किए हैं।
मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से जारी सूचना में IAS अधिकारियों, राज्य सरकार के विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों और बोर्ड एवं निगमों के अधिकारियों के विदेशी दौरों से जुड़े प्रस्तावों को जमा करने और उन पर कार्रवाई करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने पर जोर दिया गया है।
इसका उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखना और आधिकारिक दौरों से संबंधित प्रस्तावों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
निष्कर्ष
हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार के सामने इस समय किसान कल्याण, औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। गन्ने का भाव 450 रुपये प्रति क्विंटल करने की घोषणा से किसानों को भविष्य में अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है, लेकिन किसान संगठनों की 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
दूसरी ओर, गुजरात दौरे से मिले 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
अब यह देखना होगा कि सरकार निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में कितनी तेजी से बदल पाती है और किसानों की मांगों पर आगे क्या निर्णय लेती है।