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Greater Noida Green City Hospital Case: False Medical Report Allegation, FIR After Court Order

By aonenewstv | Published: Oct 16, 2026 05:12 AM

ग्रेटर नोएडा के अस्पताल पर बच्चे की गलत मेडिकल रिपोर्ट बनाने का आरोप, कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज

ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक अस्पताल पर बच्चे की गलत मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने का गंभीर आरोप लगा है। मामला दादरी निवासी वकील सचिन बिधूड़ी के बेटे सात्विक से जुड़ा है। परिजनों का आरोप है कि बुखार की शिकायत पर बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन जांच रिपोर्ट में टाइफाइड और किडनी खराब होने जैसी गंभीर बातें सामने आईं। परिवार ने रिपोर्ट और इलाज को लेकर सवाल उठाए हैं। मामले में कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज किया गया है।

यह मामला ग्रेटर नोएडा के ग्रीन सिटी अस्पताल से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मेडिकल रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी हुई थी या नहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

बुखार होने पर अस्पताल में कराया था भर्ती

वकील सचिन बिधूड़ी के मुताबिक, 20 सितंबर 2025 को उनके बेटे सात्विक को बुखार की शिकायत होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बच्चे की हालत और बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टरों ने जांच कराने की सलाह दी।

परिजनों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में टाइफाइड की पुष्टि बताई गई। रिपोर्ट पर संदेह होने के बाद उन्होंने दूसरी लैब में भी सैंपल की जांच कराई। परिवार के मुताबिक, वहां से भी पहले जैसी रिपोर्ट आने की बात कही गई। इसके बाद बच्चे का इलाज आगे बढ़ाया गया।

डॉक्टरों ने किडनी खराब होने की बात कही

सचिन बिधूड़ी का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उनके बेटे की किडनी खराब हो चुकी है और उसे डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है। परिवार का कहना है कि इस जानकारी से वे घबरा गए और बच्चे की सेहत को लेकर चिंतित हो गए।

शिकायतकर्ता ने मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की ओर से दी गई जानकारी पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बच्चे की बीमारी को लेकर जो स्थिति बताई गई, उसमें गंभीर गड़बड़ी थी।

हालांकि, बच्चे की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति, जांच रिपोर्टों की सटीकता और इलाज के दौरान हुई घटनाओं के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच तथा उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ केस

मामले में शिकायतकर्ता ने न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लिया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अदालत के आदेश के बाद इस मामले में केस दर्ज किया गया है।

अब जांच के दौरान अस्पताल में तैयार की गई मेडिकल रिपोर्ट, जांच के लिए भेजे गए सैंपल, इलाज से जुड़े दस्तावेज और संबंधित डॉक्टरों की भूमिका की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। जांच से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि रिपोर्ट तैयार करने में कोई लापरवाही या जानबूझकर गड़बड़ी की गई थी या नहीं।

मेडिकल रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

यह मामला मेडिकल जांच और अस्पतालों की जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। किसी भी मरीज के इलाज में जांच रिपोर्ट की सटीकता बेहद जरूरी होती है, क्योंकि डॉक्टर उसी के आधार पर बीमारी की पहचान और आगे के उपचार का फैसला करते हैं।

विशेष रूप से बच्चों के मामलों में सही जांच और उचित उपचार का महत्व और बढ़ जाता है। यदि किसी रिपोर्ट में गलती का संदेह हो, तो मेडिकल रिकॉर्ड की स्वतंत्र समीक्षा और संबंधित विशेषज्ञों की राय महत्वपूर्ण हो सकती है।

जांच के बाद स्पष्ट होगी पूरी सच्चाई

फिलहाल, इस मामले में अस्पताल पर लगाए गए आरोपों और अदालत के आदेश पर दर्ज केस की जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि जांच से ही होगी। अस्पताल या संबंधित डॉक्टरों का पक्ष और जांच की अंतिम स्थिति सामने आने के बाद मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रेटर नोएडा के इस मामले में अब जांच एजेंसियों के सामने शिकायत में लगाए गए आरोपों, मेडिकल दस्तावेजों और इलाज से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करना अहम होगा।

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