रेप और बच्चों के यौन शोषण के मामलों में जल्द मिलेगा न्याय, मोदी कैबिनेट ने 2031 तक बढ़ाई फास्ट ट्रैक कोर्ट योजना
नई दिल्ली: महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में जल्द न्याय सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को वर्ष 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी गई। इस फैसले से दुष्कर्म और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाने की कोशिश की जाएगी।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर गंभीर है। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के माध्यम से ऐसे मामलों की सुनवाई तेजी से पूरी करने और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने पर जोर दिया जा रहा है।
योजना पर खर्च होंगे 3,788.04 करोड़ रुपये
सरकार की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना को जारी रखने पर कुल 3,788.04 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें केंद्र सरकार निर्भया फंड के माध्यम से 2,353.15 करोड़ रुपये का योगदान देगी, जबकि शेष राशि संबंधित राज्य सरकारों की ओर से दी जाएगी।
इस योजना का उद्देश्य देशभर में दुष्कर्म और बच्चों के यौन अपराधों से जुड़े मामलों का तेजी से निपटारा करना है। इसके तहत विशेष अदालतों के संचालन और जरूरी संसाधनों को उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा।
अब तक 4.02 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना की शुरुआत 2 अक्टूबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद की गई थी। इसका उद्देश्य यौन अपराधों से जुड़े लंबित मामलों का जल्द निपटारा करना है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना के तहत अब तक 4.02 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा किया जा चुका है। इससे बड़ी संख्या में पीड़ितों को न्यायिक प्रक्रिया में राहत मिली है। सरकार का मानना है कि योजना को 2031 तक जारी रखने से लंबित मामलों को कम करने में मदद मिलेगी।
ऑनलाइन डैशबोर्ड से होगी अदालतों की निगरानी
केंद्रीय कानून मंत्रालय का न्याय विभाग राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन के साथ मिलकर इस योजना को लागू करता है। अदालतों के कामकाज और मामलों के निपटारे की प्रगति पर नजर रखने के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड की व्यवस्था भी की गई है।
इसके जरिए संबंधित अधिकारी अदालतों में लंबित मामलों, सुनवाई और निपटारे की स्थिति की निगरानी कर सकेंगे। इससे योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने और जरूरत के मुताबिक सुधार करने में मदद मिलेगी।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर सरकार का जोर
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना को 2031 तक बढ़ाने का फैसला महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का जोर है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में सुनवाई में अनावश्यक देरी न हो और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इस योजना के तहत विशेष अदालतों का संचालन आगे भी जारी रहेगा। इससे दुष्कर्म और पॉक्सो कानून के तहत दर्ज मामलों के त्वरित निपटारे की व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।