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DUSU चुनाव 2026: NSUI की हार की 5 बड़ी वजहें, कन्हैया कुमार पर क्यों उठे सवाल?

By yogesh jindoria | Published: Sep 22, 2026 05:41 AM

DUSU चुनाव 2026: NSUI की हार की 5 बड़ी वजहें, टिकट बंटवारे से ग्राउंड कनेक्ट तक उठे सवाल

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजों ने कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चार केंद्रीय पदों के चुनाव में NSUI एक भी सीट नहीं जीत सकी। वहीं ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद पर जीत दर्ज की। उपाध्यक्ष पद पर NSUI के पूर्व सदस्य और निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की।

DUSU चुनाव के नतीजों के बाद अब चर्चा सिर्फ हार की नहीं, बल्कि उसके पीछे की संगठनात्मक रणनीति और उम्मीदवारों के चयन की भी हो रही है। मीडिया रिपोर्टों में टिकट वितरण, बागी उम्मीदवारों और कैंपस स्तर पर संगठन के संपर्क जैसे मुद्दों को प्रमुख कारणों के रूप में उठाया गया है।

चार में से एक भी सीट नहीं जीत सकी NSUI

DUSU के केंद्रीय पैनल में चार प्रमुख पद होते हैं। 2026 के चुनाव में ABVP ने अध्यक्ष पद पर यश डबास, सचिव पद पर रिया छावड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह को जिताया। उपाध्यक्ष पद निर्दलीय दीपांशु शौकीन के खाते में गया। इस तरह NSUI को चारों केंद्रीय पदों में कोई सीट नहीं मिली।

अध्यक्ष पद पर मुकाबला करीबी रहा। ABVP के यश डबास ने NSUI के विजय शंकर मीणा को हराया। वहीं उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन ने बड़ी बढ़त के साथ जीत दर्ज की।

टिकट बंटवारे पर उठे सवाल

नतीजों के बाद NSUI के उम्मीदवार चयन पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई। रिपोर्टों के मुताबिक दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी, जबकि संगठन की ओर से उन्हें अध्यक्ष पद के लिए तैयार होने को कहा गया था। सहमति नहीं बनने के बाद उनका नाम पैनल से बाहर कर दिया गया और उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया।

इसके बाद दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ा और बड़ी जीत दर्ज की। Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें 30,615 वोट मिले, जबकि ABVP के ईशू मौर्य को 16,910 और NSUI के वीर चतरथ को 4,313 वोट मिले।

यह नतीजा इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि NSUI का आधिकारिक उम्मीदवार उपाध्यक्ष पद पर तीसरे स्थान पर रहा, जबकि संगठन से अलग होकर चुनाव लड़ने वाले पूर्व सदस्य ने उसी पद पर जीत हासिल की।

विशेष यादव की बगावत भी बनी चर्चा का विषय

संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार चयन को लेकर भी संगठन के भीतर मतभेद की बात सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार विशेष यादव को टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय/दूसरे मंच से चुनाव लड़ने का फैसला किया। इससे NSUI के सामने एक और चुनौती खड़ी हुई।

संयुक्त सचिव पद पर मुकाबला भी बेहद करीबी रहा और समाजवादी छात्र सभा के विशेष यादव ने जीत दर्ज की। इससे इस पद पर भी NSUI का खाता नहीं खुल सका।

कन्हैया कुमार के फैसलों पर भी चर्चा

नतीजों के बाद NSUI प्रभारी कन्हैया कुमार की भूमिका और चुनावी रणनीति को लेकर भी सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व ने चुनाव परिणामों के बाद संगठन से रिपोर्ट मांगी है। हालांकि, उम्मीदवार चयन और रणनीति से जुड़े कई दावे सूत्रों पर आधारित हैं और पार्टी की ओर से हर दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

यही वजह है कि DUSU चुनाव का परिणाम अब सिर्फ छात्रसंघ चुनाव तक सीमित चर्चा नहीं रह गया है, बल्कि कांग्रेस के छात्र संगठन की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे को लेकर भी बहस का विषय बन गया है।

कैंपस के मुद्दों के बीच हुआ चुनाव

इस बार DUSU चुनाव ऐसे समय हुआ जब दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर और आसपास छात्रों से जुड़े कई मुद्दे चर्चा में थे। चुनाव प्रचार में कैंपस सुरक्षा, हॉस्टल सुविधाएं और छात्रों से जुड़े दूसरे स्थानीय मुद्दे भी प्रमुख रहे। चुनाव में कुल मतदान प्रतिशत 40.46 प्रतिशत रहा, जो पिछले दो वर्षों की तुलना में अधिक था।

चुनाव से पहले सत्य निकेतन इलाके में एक निजी हॉस्टल भवन गिरने की घटना भी चर्चा में रही थी, जिसमें छात्रों की मौत हुई थी। ऐसे मुद्दों के बीच छात्र संगठनों ने अपने-अपने एजेंडे के साथ चुनाव प्रचार किया।

NSUI के लिए क्या संदेश?

DUSU चुनाव 2026 के नतीजों से एक बात स्पष्ट है कि NSUI को चारों केंद्रीय पदों पर हार का सामना करना पड़ा, जबकि उसके पूर्व सदस्य दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उपाध्यक्ष पद जीत लिया। साथ ही संयुक्त सचिव पद पर भी संगठन से जुड़े रहे उम्मीदवारों की मौजूदगी ने चुनावी समीकरण को प्रभावित किया।

हालांकि, इन परिणामों से पूरे देश के युवाओं या भविष्य के चुनावों के बारे में कोई सीधा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। DUSU चुनाव दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच हुआ एक अलग चुनाव है और इसके नतीजे मुख्य रूप से इसी कैंपस के स्थानीय राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरणों को दर्शाते हैं।

फिलहाल DUSU चुनाव 2026 के बाद NSUI के सामने सबसे बड़ा सवाल संगठन को लेकर है—उम्मीदवार चयन, बागी उम्मीदवारों से निपटने की रणनीति और छात्रों के बीच लगातार संगठनात्मक संपर्क को लेकर पार्टी आगे क्या कदम उठाती है, इस पर नजर रहेगी।

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