DTC ड्राइवर हड़ताल: ESMA लागू होने के बाद धीमी पड़ी हड़ताल, वेतन बढ़ाने की मांग पर अड़े कर्मचारी
नई दिल्ली: दिल्ली में DTC ड्राइवर हड़ताल पर दिल्ली सरकार के ESMA लागू करने के बाद असर पड़ा है। 16 सितंबर से जारी हड़ताल के कारण राजधानी में बस सेवाएं प्रभावित हुई थीं। अब सरकार ने DTC और क्लस्टर बस सेवाओं को छह महीने के लिए आवश्यक सेवा घोषित करते हुए हड़ताल और आंदोलन पर रोक लगा दी है। इससे बस परिचालन में कुछ सुधार हुआ है और यात्रियों को राहत मिली है।
छह महीने के लिए ESMA लागू
दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक परिवहन सेवा को बाधित होने से बचाने के लिए Essential Services Maintenance Act (ESMA) के प्रावधान लागू किए हैं। सरकारी आदेश के तहत DTC और क्लस्टर बस सेवाओं से जुड़े नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ संविदा, आउटसोर्स और निजी बस संचालकों से जुड़े कर्मचारियों पर भी यह व्यवस्था लागू होगी। आदेश की अवधि छह महीने रखी गई है।
सरकार ने अपने आदेश में सार्वजनिक परिवहन बाधित होने से आम लोगों को हुई परेशानी और कठिनाई को कार्रवाई की वजह बताया है।
16 सितंबर से चल रही थी हड़ताल
DTC से जुड़ी बस सेवाओं के ड्राइवरों की हड़ताल 16 सितंबर से शुरू हुई थी। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वेतन बढ़ोतरी, मेडिकल सुविधा, दुर्घटना बीमा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं। हड़ताल के दौरान कई रूट पर बसों की उपलब्धता प्रभावित हुई, जिससे यात्रियों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ा।
दिल्ली हाईकोर्ट ने भी 23 सितंबर को हड़ताल के बीच सरकार से ESMA लागू नहीं करने को लेकर सवाल किया था। कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन सेवा बाधित होने से यात्रियों को हो रही परेशानी पर संज्ञान लिया था।
747 रुपये प्रतिदिन से 2,000 रुपये की मांग
यूनियन के मुताबिक, हड़ताली ड्राइवरों को फिलहाल करीब 747 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं, जबकि उनकी मांग न्यूनतम 2,000 रुपये प्रतिदिन करने की है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा भुगतान में दिल्ली जैसे शहर में परिवार चलाना मुश्किल है।
इससे पहले हड़ताल के दौरान कुछ ड्राइवरों ने करीब 22 हजार रुपये मासिक आय और मेडिकल व बीमा जैसी सुविधाओं की कमी की बात कही थी। यूनियन की ओर से वेतन के साथ चिकित्सा और सामाजिक सुरक्षा को भी प्रमुख मुद्दा बताया गया है।
कॉन्ट्रैक्ट और स्थायी कर्मचारियों के वेतन में अंतर
हड़ताल कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि DTC के संविदा ड्राइवरों और स्थायी कर्मचारियों के वेतन में बड़ा अंतर है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, संविदा ड्राइवरों की मासिक आय करीब 22 हजार रुपये तक बताई गई है, जबकि स्थायी कर्मचारियों का वेतन इससे काफी अधिक है। इसी अंतर को लेकर संविदा कर्मचारी वेतन और सुविधाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं।
बस सेवाएं सामान्य करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
हड़ताल के असर को कम करने के लिए DTC ने अपने ड्राइवरों की तैनाती में बदलाव किया। रिपोर्टों के अनुसार, निजी ऑपरेटरों के साथ बस सेवाएं चलाने के लिए DTC के ड्राइवरों को भी तैनात किया गया। इससे प्रभावित रूट पर बसों का परिचालन बनाए रखने की कोशिश की गई।
दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में करीब 6,600 बसें हैं, जिनमें लगभग 4,900 इलेक्ट्रिक और करीब 1,750 CNG बसें DTC के तहत संचालित होती हैं।
कर्मचारियों की मांगें अभी पूरी नहीं
ESMA लागू होने के बाद हड़ताल की रफ्तार धीमी जरूर हुई है, लेकिन कर्मचारियों की मूल मांगों का समाधान अभी नहीं हुआ है। DTC कर्मचारी एकता यूनियन के महासचिव मनोज शर्मा के मुताबिक, अधिसूचना के बाद हड़ताल का असर कम हुआ है, लेकिन ड्राइवरों की मांगों को स्वीकार नहीं किया गया है। यूनियन आगे की रणनीति पर विचार कर रही है।
फिलहाल सरकार का जोर बस सेवाओं को सुचारु रखने पर है, जबकि ड्राइवर वेतन, मेडिकल सुविधा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समाधान की मांग कर रहे हैं। ESMA लागू होने के बाद आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत से इस विवाद के आगे की दिशा तय होगी।