Delhi Congress Rally 1 November 2026: कांग्रेस की महारैली से कारोबारियों को नुकसान का डर, CTI ने जताई चिंता
रामलीला मैदान में 10 लाख लोगों के पहुंचने की संभावना, मध्य और पुरानी दिल्ली के बाजारों में ट्रैफिक और माल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका
दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की महारैली को लेकर राजधानी के कारोबारियों ने चिंता जताई है। व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) का कहना है कि रैली में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। इससे मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली के प्रमुख बाजारों में यातायात बाधित हो सकता है और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
व्यापारियों ने त्योहारों के सीजन को देखते हुए रैली के दौरान यातायात और माल की आपूर्ति सुचारु रखने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि नवंबर की शुरुआत कारोबारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दौरान त्योहारों की खरीदारी के साथ दुकानों तक सामान पहुंचाने का काम भी तेजी से चलता है।
रैली में 10 लाख लोगों के पहुंचने का अनुमान
CTI के मुताबिक, कांग्रेस की महारैली में करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से रामलीला मैदान के आसपास की सड़कों और मध्य दिल्ली के प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है।
संगठन को आशंका है कि इसका असर पुरानी दिल्ली के थोक बाजारों और आसपास के व्यापारिक क्षेत्रों पर पड़ सकता है। यदि सड़कों पर जाम लगता है, तो ग्राहकों के साथ-साथ दुकानदारों, माल ढोने वाले वाहनों और व्यापारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
त्योहारों से पहले कारोबारियों के लिए अहम दिन
व्यापारियों का कहना है कि 1 नवंबर उनके लिए कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण दिन है। त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है और दुकानदारों को ग्राहकों की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त माल की जरूरत होती है।
CTI ने बताया कि 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली होने के कारण बाजारों में खरीदारी और माल की आपूर्ति का काम तेज रहने की उम्मीद है। ऐसे में यातायात बाधित होने से दुकानों तक सामान पहुंचाने और ग्राहकों के बाजारों में आने-जाने में दिक्कत हो सकती है।
कारोबारियों का कहना है कि त्योहारों का सीजन व्यापारियों के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण समय में से एक होता है। इस दौरान किसी भी तरह की बाधा से बिक्री और कारोबार पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
रोजाना हजारों ट्रक और टेंपो पहुंचाते हैं माल
CTI का दावा है कि दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों से रोजाना करीब 5,000 ट्रक और टेंपो माल लेकर बाजारों में पहुंचते हैं। इसके अलावा, लगभग 3,000 ट्रक और टेंपो बाजारों से सामान लेकर दूसरे स्थानों के लिए रवाना होते हैं।
संगठन के अनुसार, माल की इस आवाजाही में किसी भी तरह की बाधा आने से व्यापारियों की आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। थोक बाजारों में समय पर सामान पहुंचना जरूरी है, क्योंकि दुकानदारों को ग्राहकों की मांग के अनुसार माल उपलब्ध कराना होता है।
यदि यातायात प्रभावित होता है, तो वाहनों की आवाजाही धीमी पड़ सकती है। इससे माल की डिलीवरी में देरी और व्यापारिक कामकाज में परेशानी होने की आशंका है।
सोनिया गांधी से व्यापारियों की परेशानी पर ध्यान देने की अपील
रैली को लेकर कारोबारियों ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने अपनी चिंताएं रखने की कोशिश की है। CTI ने त्योहारों के समय बाजारों में व्यापारिक गतिविधियों और माल की आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने की मांग उठाई है।
व्यापारियों का कहना है कि राजनीतिक दलों को अपने कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार है, लेकिन ऐसे आयोजनों के दौरान स्थानीय कारोबार, आम जनता की आवाजाही और जरूरी आपूर्ति व्यवस्था का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
बाजारों में यातायात व्यवस्था बनाए रखने की मांग
कारोबारियों ने आशंका जताई है कि रैली के कारण मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली के बाजारों में जाम की स्थिति बन सकती है। इससे न केवल व्यापारियों, बल्कि खरीदारी के लिए आने वाले लोगों को भी परेशानी हो सकती है।
त्योहारों के दौरान बाजारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ने के कारण यातायात व्यवस्था का सुचारु रहना जरूरी है। व्यापारियों का कहना है कि समय पर माल की आपूर्ति और ग्राहकों की आसान आवाजाही से ही बाजारों में कारोबार सामान्य रूप से चल सकता है।
रैली को लेकर व्यापारियों की चिंता बरकरार
कांग्रेस की प्रस्तावित महारैली से पहले कारोबारियों की चिंता इस बात पर केंद्रित है कि त्योहारों के महत्वपूर्ण कारोबारी दिनों में बाजारों की गतिविधियां प्रभावित न हों। CTI ने रैली के दौरान यातायात और माल की आवाजाही को लेकर अपनी आशंकाएं सामने रखी हैं।
अब इस मामले में कांग्रेस नेतृत्व और संबंधित प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर व्यापारियों की नजर रहेगी। कारोबारियों की मुख्य मांग है कि राजनीतिक कार्यक्रम के साथ-साथ व्यापार और आम जनता की सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाए।