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Delhi AI Fake Poster Case: महिला पत्रकारों से बदसलूकी मामले में नदीम गिरफ्तार, 24 हजार फॉलोअर्स वाले हैंडल की जांच

AI से ADCP विवेक भगत का फर्जी पोस्टर बनाने वाला नदीम गिरफ्तार, 24 हजार फॉलोअर्स वाले हैंडल की जांच

दिल्ली में सोशल मीडिया के जरिए AI से बनाए गए फर्जी पोस्टर और तस्वीरें फैलाने का मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में नदीम नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने AI की मदद से ADCP विवेक भगत की आपत्तिजनक तस्वीर तैयार कर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। पुलिस को शक है कि इस पूरे मामले में एक से ज्यादा लोग शामिल हो सकते हैं।

महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी दिखाने वाला पोस्टर

पुलिस के अनुसार, AI से तैयार किए गए पोस्टर में विवेक भगत को एक महिला पत्रकार के साथ कथित तौर पर बदसलूकी करते हुए दिखाया गया था। यह पोस्टर सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

यह पूरा मामला 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद सामने आया। उस प्रदर्शन के दौरान कुछ महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर कथित बदसलूकी और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इन शिकायतों की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है।

नदीम के सोशल मीडिया हैंडल की जांच

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी नदीम खुद को स्वतंत्र पत्रकार बताता है और उसने 10वीं तक पढ़ाई की है। जांच में सामने आया है कि जिस सोशल मीडिया हैंडल से फर्जी पोस्टर को शेयर किया गया, उसे नदीम ऑपरेट कर रहा था।

इस हैंडल पर करीब 24 हजार फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी पोस्टर तैयार करने और उसे प्रसारित करने में नदीम के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल थे।

पुलिस को साजिश की आशंका

जांच एजेंसियां सिर्फ फर्जी पोस्टर बनाने तक मामले को सीमित नहीं रख रही हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी के पीछे कोई अन्य व्यक्ति, संगठन या समूह तो नहीं था।

पुलिस के मुताबिक, AI से तैयार सामग्री को सोशल मीडिया पर इस तरह प्रसारित किया गया कि इससे लोगों के बीच भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा हो सकती थी। इसी वजह से फर्जी पोस्टर बनाने और शेयर करने वाले नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।

विवेक भगत पर लगे आरोपों की अलग जांच

इस मामले को विवेक भगत के खिलाफ लगे आरोपों से अलग रखा गया है। 3 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर कथित यौन उत्पीड़न और बदसलूकी की शिकायतें की थीं। इन शिकायतों को जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेजा गया है और संबंधित महिलाओं के बयान तथा CCTV फुटेज की जांच की जा रही है।

यानी एक तरफ महिला पत्रकारों की शिकायतों की जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस AI से तैयार किए गए कथित फर्जी पोस्टर और उसे सोशल मीडिया पर फैलाने वाले नेटवर्क की जांच कर रही है।

पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी कैमरा भी

जंतर-मंतर और नई दिल्ली इलाके में हालिया प्रदर्शनों के बाद पुलिस की कार्रवाई और पारदर्शिता को लेकर भी चर्चा हुई है। पुलिस की ओर से बॉडी कैमरों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसी विवाद, धक्का-मुक्की या कानून-व्यवस्था की स्थिति में मौके की रिकॉर्डिंग उपलब्ध रहे।

दिल्ली पुलिस के लिए यह मामला AI के गलत इस्तेमाल की बढ़ती चुनौती को भी सामने लाता है। पुलिस अब डिजिटल फुटप्रिंट, सोशल मीडिया पोस्ट और उससे जुड़े खातों की जांच के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी सामग्री तैयार करने और फैलाने के पीछे पूरा नेटवर्क क्या था।

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