AP Singh Retirement 2026: ऑपरेशन सिंदूर से तेजस विवाद तक, एयर चीफ मार्शल के कार्यकाल के 10 बड़े पड़ाव
31 अक्टूबर को रिटायर होंगे एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, 5,000 घंटे से ज्यादा का उड़ान अनुभव; वायुसेना की ताकत, लड़ाकू विमानों की कमी और स्वदेशी तकनीक पर रहा जोर
भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह 31 अक्टूबर 2026 को अपने पद से रिटायर होने जा रहे हैं। उन्होंने 30 सितंबर 2024 को वायुसेना प्रमुख का कार्यभार संभाला था। उनके कार्यकाल में ऑपरेशन सिंदूर, स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान की डिलीवरी में देरी, फाइटर स्क्वॉड्रन की कमी और आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका जैसे मुद्दे चर्चा में रहे।
फाइटर पायलट, एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर के तौर पर लंबा अनुभव रखने वाले अमर प्रीत सिंह 5,000 घंटे से अधिक उड़ान भर चुके हैं। उनके कार्यकाल में वायुसेना की परिचालन क्षमता के साथ-साथ विमान निर्माण, तकनीकी आत्मनिर्भरता और भविष्य की युद्ध रणनीति से जुड़ी चुनौतियां भी प्रमुखता से सामने आईं।
1. ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना की भूमिका
मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस अभियान में भारतीय वायुसेना की भूमिका महत्वपूर्ण रही। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने कई मौकों पर अभियान के दौरान वायुसेना की परिचालन गति, सटीक हमले करने की क्षमता और एयर डिफेंस की भूमिका को रेखांकित किया।
उनके मुताबिक, आधुनिक संघर्षों में हवाई ताकत किसी भी देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा में अहम भूमिका निभाती है। ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों ने वायुसेना की तैयारी, संयुक्त सैन्य अभियान और भविष्य की रणनीति पर चर्चा को भी नई दिशा दी।
2. तेजस विवाद और HAL को स्पष्ट संदेश
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह के कार्यकाल का एक बड़ा मुद्दा स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान की डिलीवरी में देरी रहा। एयरो इंडिया 2025 के दौरान उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की उत्पादन क्षमता और तय समय पर विमान उपलब्ध कराने को लेकर सवाल उठाए थे।
तेजस मार्क-1ए को वायुसेना के पु
राने लड़ाकू विमानों की जगह लेने और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूत करने की योजना में महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन विमानों की आपूर्ति में देरी से वायुसेना की क्षमता बढ़ाने की योजना प्रभावित हुई।
अमर प्रीत सिंह ने अक्टूबर 2026 में भी लड़ाकू विमानों की समय पर डिलीवरी की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विमानों की कमी वायुसेना के लिए चुनौती बन रही है।
3. ड्रोन युद्ध पर बदला नजरिया
आधुनिक युद्धों में ड्रोन की बढ़ती भूमिका एयर चीफ मार्शल के कार्यकाल में चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय रही। उनका मानना रहा कि ड्रोन युद्ध के तौर-तरीकों को बदल रहे हैं, लेकिन वे पारंपरिक लड़ाकू विमानों की पूरी तरह जगह नहीं ले सकते।
ड्रोन निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और चुनिंदा हमलों में उपयोगी साबित हो रहे हैं। वहीं, लड़ाकू विमानों की भूमिका हवाई प्रभुत्व स्थापित करने, दुश्मन के विमानों का मुकाबला करने और व्यापक सैन्य अभियानों में बनी रहती है।
ऐसे में भविष्य की वायु शक्ति के लिए मानव-संचालित विमानों, मानवरहित प्रणालियों और आधुनिक सेंसर तकनीक के बीच तालमेल जरूरी माना जा रहा है।
4. फाइटर स्क्वॉड्रन की कमी पर चिंता
भारतीय वायुसेना के सामने लड़ाकू स्क्वॉड्रन की कमी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रही। अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक, वायुसेना के पास करीब 29 फाइटर स्क्वॉड्रन थे, जबकि स्वीकृत संख्या 42.5 स्क्वॉड्रन है।
पुराने विमानों के चरणबद्ध तरीके से सेवा से बाहर होने और नए विमानों की डिलीवरी में देरी के कारण यह अंतर चिंता का विषय बना हुआ है। अमर प्रीत सिंह ने कहा था कि वायुसेना को अपनी क्षमता बनाए रखने और बढ़ाने के लिए हर साल बड़ी संख्या में नए लड़ाकू विमानों की जरूरत है।
यह चुनौती केवल विमानों की संख्या तक सीमित नहीं है। इसके साथ पायलटों का प्रशिक्षण, हथियार प्रणालियां, रखरखाव और आधुनिक युद्ध के लिए जरूरी तकनीकी संसाधन भी महत्वपूर्ण हैं।
5. राफेल और अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की जरूरत
फाइटर स्क्वॉड्रन की कमी को दूर करने के लिए अतिरिक्त लड़ाकू विमान खरीदने और स्वदेशी विमानों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया। अमर प्रीत सिंह ने 114 अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद सहित वायुसेना के बेड़े के विस्तार की जरूरत पर बात की।
राफेल जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, किसी भी बड़े रक्षा सौदे में लागत, तकनीकी जरूरतों, उत्पादन व्यवस्था और आपूर्ति की समयसीमा जैसे पहलुओं पर विचार करना पड़ता है।
वायुसेना के लिए बड़ी चुनौती यह है कि पुराने विमानों के हटने से पहले उनकी जगह पर्याप्त संख्या में नए विमान शामिल किए जाएं।
6. वायु शक्ति 2026 में दिखाई परिचालन क्षमता
फरवरी 2026 में राजस्थान के पोखरण में आयोजित वायु शक्ति अभ्यास ने भारतीय वायुसेना की परिचालन तैयारियों और सटीक हमले करने की क्षमता को प्रदर्शित किया।
ऐसे अभ्यासों में लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, हथियार प्रणालियों और अन्य संसाधनों के बीच तालमेल को परखा जाता है। इनका उद्देश्य वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में तैयारियों का आकलन करना और अलग-अलग प्रणालियों के प्रभावी इस्तेमाल का अभ्यास करना होता है।
वायु शक्ति जैसे अभ्यास वायुसेना को अपनी ताकत और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान करने में भी मदद करते हैं।
7. ऑपरेशन सिंदूर के बाद सैन्य सुधारों पर चर्चा
भारतीय सशस्त्र बलों में थिएटर कमांड बनाने और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने की योजना पर लंबे समय से चर्चा चल रही है। इसका उद्देश्य अलग-अलग सैन्य संसाधनों को अधिक समन्वित तरीके से इस्तेमाल करना है।
अमर प्रीत सिंह ने सैन्य सुधारों पर चर्चा के दौरान ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों को ध्यान में रखने की जरूरत पर जोर दिया। उनके विचार में किसी भी बड़े ढांचागत बदलाव से पहले अभियान से मिली सीख और वायुसेना की परिचालन आवश्यकताओं का आकलन जरूरी है।
इस मुद्दे पर आगे की रणनीति भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच समन्वय को प्रभावित कर सकती है।
8. तेजस से आखिरी फाइटर उड़ान
रिटायरमेंट से पहले अमर प्रीत सिंह ने स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान में अपनी आखिरी फाइटर उड़ान भरी। अक्टूबर 2026 में जोधपुर में आयोजित बहुराष्ट्रीय अभ्यास तरंग शक्ति के दौरान उनकी यह उड़ान खास रही।
तेजस से उनका जुड़ाव केवल वायुसेना प्रमुख के तौर पर नहीं था। वह अपने करियर में टेस्ट पायलट के रूप में भी इस विमान कार्यक्रम से जुड़े रहे थे। इसलिए तेजस में उनकी आखिरी फाइटर उड़ान उनके पेशेवर जीवन के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के तौर पर देखी गई।
इस उड़ान ने स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम के प्रति उनके लंबे जुड़ाव को भी रेखांकित किया।
9. पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर के साथ आखिरी उड़ान
20 अक्टूबर 2026 को अमर प्रीत सिंह ने एचजेटी-16 किरण एमके-1 ट्रेनर विमान में अपनी अंतिम उड़ान भरी। इस दौरान उनके साथ उनके पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर, सेवानिवृत्त विंग कमांडर वीएस कोचर भी मौजूद थे।
करीब 55 मिनट की इस उड़ान ने उनके उड़ान करियर की शुरुआत की यादें ताजा कर दीं। अमर प्रीत सिंह ने 21 दिसंबर 1984 को भारतीय वायुसेना में कमीशन प्राप्त किया था और उनके पास 5,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव है।
यह उड़ान उनके लंबे सैन्य करियर के भावनात्मक समापन के तौर पर भी देखी गई।
10. एआई, स्वदेशी इंजन और भविष्य की वायु शक्ति
वायुसेना के भविष्य को लेकर अमर प्रीत सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वदेशी तकनीक और घरेलू लड़ाकू विमान इंजन के विकास जैसे मुद्दों पर जोर दिया।
आधुनिक हवाई युद्ध में तेजी से सूचना जुटाना, अलग-अलग प्रणालियों से मिले आंकड़ों का विश्लेषण करना और कम समय में निर्णय लेना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। एआई आधारित प्रणालियां इन क्षेत्रों में मदद कर सकती हैं, हालांकि इनके इस्तेमाल के साथ सुरक्षा, विश्वसनीयता और मानवीय निगरानी भी जरूरी है।
स्वदेशी इंजन और विमान निर्माण क्षमता विकसित करना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए भी अहम है। इससे भविष्य में विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने और देश में रक्षा उत्पादन को मजबूत करने का लक्ष्य जुड़ा है।
31 अक्टूबर को नए वायुसेना प्रमुख संभालेंगे जिम्मेदारी
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह 31 अक्टूबर 2026 को रिटायर होंगे। केंद्र सरकार ने एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित को अगला वायुसेना प्रमुख नियुक्त किया है। वह इसी दिन दोपहर से कार्यभार संभालेंगे।
अशुतोष दीक्षित के सामने लड़ाकू विमानों की कमी दूर करने, तेजस की डिलीवरी में तेजी लाने, आधुनिक तकनीक को अपनाने और वायुसेना की परिचालन क्षमता मजबूत करने जैसी चुनौतियां रहेंगी।
निष्कर्ष
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का कार्यकाल ऐसे समय में रहा, जब भारतीय वायुसेना को एक ओर ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में अपनी क्षमता दिखानी थी, तो दूसरी ओर लड़ाकू विमानों की कमी, तेजस की डिलीवरी में देरी और तेजी से बदलती युद्ध तकनीक जैसी चुनौतियों का सामना करना था।
उनके कार्यकाल की प्रमुख चर्चाओं में परिचालन तैयारी, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, ड्रोन और एआई का इस्तेमाल तथा भविष्य के लिए वायुसेना को मजबूत बनाने की जरूरत शामिल रही। अब 31 अक्टूबर को नेतृत्व परिवर्तन के साथ भारतीय वायुसेना के सामने इन प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।