📅 Loading Date & Time...
होम > राजनीति > न्यूज़

Anant Singh JDU Expulsion: अनंत सिंह और पत्नी JDU से निष्कासित, अब मोकामा की विधायकी पर भी खतरा

By aonenewstv | Published: Oct 24, 2026 02:38 PM

अनंत सिंह पर JDU का बड़ा एक्शन: पत्नी समेत पार्टी से निष्कासित, अब मोकामा की विधायकी पर भी संकट

बिहार एमएलसी चुनाव में पार्टी उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करना पड़ा भारी, जेडीयू ने छह साल के लिए किया निष्कासित; विधानसभा अध्यक्ष से सदस्यता समाप्त कराने की तैयारी

पटना, 24 अक्टूबर 2026। बिहार की राजनीति में शनिवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मोकामा के विधायक और बाहुबली नेता के रूप में पहचान रखने वाले अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। पार्टी ने अनुशासनहीनता और अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव प्रचार करने के आरोप में अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इतना ही नहीं, जेडीयू अब अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त कराने की दिशा में भी कदम उठाने जा रही है।

पार्टी के इस फैसले से बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि अनंत सिंह को इतने कठोर कदम की उम्मीद नहीं थी। शनिवार को उनके आवास पर समर्थकों के बीच मिठाइयां तैयार की जा रही थीं, लेकिन इसी दौरान पार्टी नेतृत्व के फैसले ने राजनीतिक माहौल बदल दिया।

एमएलसी चुनाव में बगावत बनी कार्रवाई की बड़ी वजह

अनंत सिंह के खिलाफ जेडीयू की नाराजगी की मुख्य वजह बिहार विधान परिषद के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव बताया जा रहा है।

इस चुनाव में जेडीयू ने नीरज कुमार को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया था। पार्टी नेतृत्व चाहता था कि सभी विधायक, पदाधिकारी और कार्यकर्ता अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होकर काम करें।

लेकिन अनंत सिंह ने पार्टी के फैसले से अलग रुख अपनाते हुए निर्दलीय उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार किया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अनुज सिंह के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की और उनकी जीत का भरोसा भी जताया।

जेडीयू नेतृत्व ने इसे पार्टी अनुशासन और संगठनात्मक निर्णयों की खुली अवहेलना माना।

पत्नी नीलम देवी पर भी गिरी कार्रवाई की गाज

जेडीयू ने केवल अनंत सिंह को ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी नीलम देवी को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया है।

इस फैसले को पार्टी नेतृत्व की ओर से कड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। जेडीयू ने स्पष्ट संकेत दिया है कि संगठन के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ काम करने वाले नेताओं के मामले में अनुशासन को प्राथमिकता दी जाएगी।

अनंत सिंह और नीलम देवी के निष्कासन के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

अब मोकामा विधानसभा सीट पर भी मंडराया खतरा

अनंत सिंह के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर खड़ी हो सकती है।

जेडीयू ने संकेत दिया है कि वह बिहार विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने का मामला उठाएगी।

पार्टी की ओर से जारी आदेश में विधानसभा अध्यक्ष से दलबदल विरोधी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग करने की बात कही गई है।

हालांकि, पार्टी से निष्कासन होने मात्र से किसी विधायक की विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त नहीं होती। दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का निर्णय संबंधित तथ्यों, संवैधानिक प्रावधानों और विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष होने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

इसलिए फिलहाल अनंत सिंह की विधायकी समाप्त होने के बजाय उस पर संभावित कार्रवाई का खतरा बना हुआ है।

अनंत सिंह के बयानों से भी नाराज था नेतृत्व

बताया जा रहा है कि अनंत सिंह के खिलाफ पार्टी नेतृत्व की नाराजगी केवल एमएलसी चुनाव तक सीमित नहीं थी।

उनके कई सार्वजनिक बयानों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी संगठन के भीतर असंतोष बढ़ रहा था।

अनंत सिंह अपने बेबाक और चुनौतीपूर्ण राजनीतिक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। कई मौकों पर उनके बयानों से यह संदेश गया कि वह अपने राजनीतिक फैसले स्वतंत्र रूप से लेते हैं।

पार्टी नेतृत्व के लिए यह स्थिति असहज मानी जा रही थी, विशेषकर तब जब उन्होंने अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव प्रचार किया।

पटना स्नातक सीट पर 23 अक्टूबर को हुआ मतदान

बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इस चुनाव में जेडीयू की ओर से नीरज कुमार मैदान में थे, जबकि अनंत सिंह ने अनुज सिंह का समर्थन किया।

मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है। चुनाव परिणाम आने से पहले ही जेडीयू की ओर से की गई कार्रवाई ने इस मुकाबले को और राजनीतिक महत्व दे दिया है।

अनंत सिंह को उम्मीद थी कि उनके समर्थित उम्मीदवार को सफलता मिलेगी। हालांकि, चुनाव परिणाम आने से पहले ही पार्टी नेतृत्व ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर दी।

मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह का प्रभाव

बिहार के मोकामा विधानसभा क्षेत्र में अनंत सिंह लंबे समय से प्रभावशाली राजनीतिक चेहरा रहे हैं।

उनकी राजनीतिक पहचान स्थानीय जनाधार, समर्थकों के मजबूत नेटवर्क और विवादों से जुड़ी रही है। बिहार की राजनीति में उन्हें बाहुबली नेता के रूप में भी जाना जाता है।

मोकामा और आसपास के इलाकों में उनकी राजनीतिक सक्रियता का असर विभिन्न चुनावों में देखने को मिला है।

ऐसे में जेडीयू से निष्कासन और विधानसभा सदस्यता पर संभावित संकट केवल अनंत सिंह के राजनीतिक भविष्य के लिए ही नहीं, बल्कि मोकामा के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जेडीयू ने दिया पार्टी अनुशासन का संदेश

अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई को जेडीयू नेतृत्व के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है।

पार्टी के सामने यह चुनौती थी कि यदि अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने वाले प्रभावशाली नेता पर कार्रवाई नहीं की जाती, तो संगठन के भीतर अनुशासन को लेकर गलत संदेश जा सकता था।

यही वजह है कि चुनाव परिणाम आने का इंतजार किए बिना पार्टी ने निष्कासन का फैसला लिया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस कार्रवाई से जेडीयू ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि किसी नेता का व्यक्तिगत प्रभाव संगठनात्मक अनुशासन से ऊपर नहीं है।

क्या अनंत सिंह की विधायकी जा सकती है?

अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर अब संवैधानिक और कानूनी पहलू महत्वपूर्ण होंगे।

संविधान की दसवीं अनुसूची में दल-बदल के आधार पर विधायकों की अयोग्यता से संबंधित प्रावधान हैं।

किसी राजनीतिक दल से निर्वाचित सदस्य के मामले में यह देखा जाता है कि क्या उसने स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ी है अथवा सदन में पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन किया है।

सिर्फ पार्टी से निष्कासन या किसी चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार का विरोध करना अपने आप में सदस्यता समाप्त होने का अंतिम आधार नहीं माना जा सकता। संबंधित परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण आवश्यक होता है।

यदि जेडीयू विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका प्रस्तुत करती है, तो उसके आधार पर आगे की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

बिहार की राजनीति में आगे क्या होगा?

अनंत सिंह और नीलम देवी के निष्कासन के बाद बिहार में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अनंत सिंह पार्टी के फैसले के बाद कौन-सा राजनीतिक रास्ता चुनेंगे।

क्या वह निष्कासन के खिलाफ कानूनी या राजनीतिक चुनौती देंगे, क्या किसी अन्य दल से नजदीकी बढ़ाएंगे या अपने समर्थकों के सहारे स्वतंत्र राजनीतिक रणनीति अपनाएंगे—इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं।

इसके साथ ही 27 अक्टूबर को पटना स्नातक सीट की मतगणना भी महत्वपूर्ण होगी। इस चुनाव के परिणाम से अनंत सिंह के राजनीतिक दावों और जेडीयू की रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो सकती है।

फिलहाल बिहार की राजनीति में अनंत सिंह के खिलाफ जेडीयू की कार्रवाई बड़ा घटनाक्रम बन गई है। पत्नी नीलम देवी के साथ छह साल के निष्कासन और मोकामा विधानसभा सदस्यता पर संभावित कार्रवाई ने उनके राजनीतिक भविष्य के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। अब सभी की नजरें विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पार्टी के अगले कदम और अनंत सिंह की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

Scroll to Top