अखिलेश यादव ने 2027 चुनाव को लेकर दिया बड़ा बयान, बोले- हम मुख्यमंत्री तभी बनते हैं जब चुनाव नहीं लड़ते
वाराणसी। उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने वाराणसी दौरे के दौरान चुनाव लड़ने और मुख्यमंत्री बनने को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसके बाद उनकी चुनावी भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
वाराणसी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव से सवाल किया गया कि क्या वह 2027 के विधानसभा चुनाव में वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे? इस सवाल पर उन्होंने अपने खास अंदाज में जवाब देते हुए कहा, “हम मुख्यमंत्री तभी बनते हैं जब चुनाव नहीं लड़ते हैं, इसलिए शुभ काम करेंगे।”
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा होने लगी कि क्या अखिलेश यादव आगामी विधानसभा चुनाव में खुद किसी सीट से मैदान में उतरेंगे या फिर पार्टी की चुनावी रणनीति और प्रचार अभियान की कमान संभालेंगे। हालांकि, उन्होंने अभी तक 2027 में चुनाव लड़ने या नहीं लड़ने को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है।
2027 में किस सीट से चुनाव लड़ेंगे अखिलेश यादव?
अखिलेश यादव के चुनाव लड़ने को लेकर सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनका पिछला चुनावी सफर अलग-अलग भूमिकाओं से जुड़ा रहा है। वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। उस समय वह विधान परिषद के सदस्य थे और उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के लिए विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था।
इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने मैदान में उतरे। उन्होंने मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। बाद में वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने।
जून 2024 में कन्नौज लोकसभा सीट से सांसद चुने जाने के बाद उन्होंने करहल विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया। फिलहाल अखिलेश यादव कन्नौज से लोकसभा सांसद हैं।
ऐसे में 2027 के चुनाव में वह किस विधानसभा सीट से मैदान में उतरेंगे, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। वाराणसी में दिया गया उनका बयान इसी सवाल को लेकर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
वाराणसी को मेट्रो देने की बात कही
अपने दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने वाराणसी के विकास को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने काशी को क्योटो बनाने का वादा किया था, लेकिन शहर में विकास के दावों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो वाराणसी को मेट्रो की सुविधा देने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने मेट्रो और रोपवे के बीच अंतर बताते हुए कहा कि दोनों परिवहन के अलग-अलग माध्यम हैं और शहर की जरूरतों के अनुसार सुविधाओं का विकास होना चाहिए।
वरुणा नदी और मणिकर्णिका घाट का भी उठाया मुद्दा
अखिलेश यादव ने वरुणा नदी के विकास और सौंदर्यीकरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार के समय वरुणा नदी को सुंदर बनाने के लिए काम शुरू किया गया था। सरकार बनने पर इस काम को आगे बढ़ाया जाएगा।
इसके अलावा उन्होंने मणिकर्णिका घाट पर हुए निर्माण और ध्वस्तीकरण से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने घाट की तस्वीर दिखाते हुए इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा और देवी अहिल्याबाई से जुड़े ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया।
अयोध्या और काशी को लेकर भी सियासी बयानबाजी
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या और काशी के विकास को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच बयानबाजी पहले भी होती रही है। अखिलेश यादव ने अपने वाराणसी दौरे में विकास, रोजगार, किसानों और बुनकरों से जुड़े मुद्दे उठाए।
उन्होंने प्रदेश की भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर वाराणसी के विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।
2027 चुनाव से पहले अखिलेश के बयान के क्या मायने?
अखिलेश यादव का मुख्यमंत्री पद और विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर दिया गया बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राजनीतिक दल सक्रिय हैं। उनके बयान से यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वह आगामी चुनाव में किसी सीट से उम्मीदवार होंगे या नहीं।
फिलहाल समाजवादी पार्टी की ओर से उनकी विधानसभा सीट को लेकर कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अखिलेश यादव आगामी चुनाव में अपनी भूमिका किस तरह तय करते हैं और पार्टी की चुनावी रणनीति में उनकी क्या जिम्मेदारी रहती है।