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Aga Ruhullah Mehdi NC Resignation: Will Srinagar MP Quit National Conference? 10 Conditions for Budgam Rally

नेशनल कॉन्फ्रेंस में बढ़ी अंदरूनी कलह, क्या पार्टी छोड़ेंगे आगा रुहुल्लाह मेहदी? बडगाम रैली से पहले सियासी हलचल तेज

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर जारी अंदरूनी खींचतान के बीच श्रीनगर से पार्टी सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके पार्टी छोड़ने और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की अटकलों के बीच अब सबकी नजर बडगाम में होने वाली उनकी प्रस्तावित रैली पर टिकी है।

आगा रुहुल्लाह मेहदी अपने पिता की पुण्यतिथि के मौके पर इस कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। इस रैली में उनके समर्थकों के जुटने की संभावना है। इसे उनकी राजनीतिक ताकत और पार्टी नेतृत्व के प्रति उनके रुख के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हालांकि, पार्टी छोड़ने या सांसद पद से इस्तीफा देने को लेकर उनकी ओर से किसी अंतिम फैसले की पुष्टि नहीं हुई है।

बडगाम रैली से दिखाई जाएगी राजनीतिक ताकत

बडगाम में होने वाली इस रैली को आगा रुहुल्लाह मेहदी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम माना जा रहा है। उनके पिता की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में उनके समर्थक भी शामिल होंगे।

राजनीतिक हलकों में इस रैली को नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर चल रही नाराजगी के बीच शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस दौरान आगा रुहुल्लाह अपने समर्थकों के बीच अपनी आगे की राजनीतिक रणनीति को लेकर भी संकेत दे सकते हैं।

रैली के जरिए यह भी समझने की कोशिश होगी कि पार्टी के भीतर उनकी पकड़ कितनी मजबूत है और उनके साथ कितने लोग खड़े हैं।

अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली को लेकर नाराजगी

आगा रुहुल्लाह मेहदी की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली का मुद्दा बताया जा रहा है। उनका आरोप है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विधानसभा चुनाव के दौरान जम्मू-कश्मीर के लोगों से कई बड़े वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद इन मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दी गई।

रुहुल्लाह लगातार पार्टी नेतृत्व से सवाल करते रहे हैं कि चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने के लिए सरकार और पार्टी क्या कदम उठा रही है।

उन्होंने राजनीतिक बंदियों की रिहाई, जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा और आरक्षण नीति से जुड़े मुद्दों पर भी पार्टी नेतृत्व के रवैये पर सवाल उठाए हैं।

पार्टी नेतृत्व पर वादाखिलाफी का आरोप

आगा रुहुल्लाह ने स्पष्ट किया है कि उनका विरोध किसी व्यक्तिगत पद या राजनीतिक लाभ को लेकर नहीं है। उनका कहना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जनता से जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करने के लिए पार्टी को जवाबदेह होना चाहिए।

उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर आरोप लगाया कि चुनाव में जनता से समर्थन हासिल करने के लिए बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन सत्ता मिलने के बाद उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

रुहुल्लाह का मानना है कि यदि पार्टी अपने चुनावी एजेंडे और विचारधारा से पीछे हटती है तो उसके साथ बने रहना उनके लिए मुश्किल है।

सरकार गिराने की राजनीति के भी खिलाफ

पार्टी नेतृत्व से गंभीर मतभेद होने के बावजूद आगा रुहुल्लाह ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह खरीद-फरोख्त की राजनीति के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर की निर्वाचित सरकार को अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने का अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने संकेत दिया है कि पार्टी से अलग होने का उनका फैसला सरकार को अस्थिर करने की किसी राजनीतिक कोशिश का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह वैचारिक और सिद्धांतों से जुड़ा मामला है।

प्रशासन ने रैली के लिए रखीं 10 शर्तें

बडगाम जिला प्रशासन ने आगा रुहुल्लाह के कार्यक्रम को अनुमति तो दे दी है, लेकिन इसके लिए कई शर्तें निर्धारित की हैं। कार्यक्रम 3 नवंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक बेहिश्ती जेहरा पार्क में आयोजित किया जाना है।

प्रशासन की प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं:

  • कार्यक्रम केवल निर्धारित पार्क परिसर में ही आयोजित होगा।

  • किसी भी प्रकार की रैली या जुलूस निकालने की अनुमति नहीं होगी।

  • कार्यक्रम में केवल शांतिपूर्ण सभा की अनुमति रहेगी।

  • भड़काऊ भाषण और गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी।

  • किसी प्रकार की हिंसा या सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाली गतिविधि नहीं होगी।

  • पुतला दहन की अनुमति नहीं होगी।

  • प्रतिबंधित या देशविरोधी संगठनों से संबंधित बैनर-पोस्टर प्रदर्शित नहीं किए जा सकेंगे।

  • यातायात व्यवस्था बाधित नहीं होनी चाहिए।

  • कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली किसी गतिविधि की अनुमति नहीं होगी।

  • शर्तों का उल्लंघन होने पर कार्यक्रम की अनुमति रद्द की जा सकती है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

प्रशासन ने यह शर्तें कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए लगाई हैं।

2024 में रिकॉर्ड अंतर से जीते थे लोकसभा चुनाव

आगा रुहुल्लाह मेहदी जम्मू-कश्मीर की राजनीति में प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में श्रीनगर सीट से नेशनल कॉन्फ्रेंस के टिकट पर जीत हासिल की थी।

उन्होंने पीडीपी उम्मीदवार वहीद उर रहमान पारा को 1,88,416 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। रुहुल्लाह को 3,56,866 वोट मिले थे, जबकि पारा को 1,68,450 वोट हासिल हुए थे।

इससे पहले वह बडगाम विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक भी रह चुके हैं। अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक अधिकारों को लेकर उनका रुख हमेशा मुखर रहा है।

अब आगे क्या होगी आगा रुहुल्लाह की रणनीति?

आगा रुहुल्लाह मेहदी के पार्टी और लोकसभा से इस्तीफे के ऐलान के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है। यदि वह औपचारिक रूप से लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देते हैं और लोकसभा अध्यक्ष इसे स्वीकार करते हैं, तो श्रीनगर संसदीय सीट खाली हो सकती है और नियमानुसार उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी।

राजनीतिक चर्चाओं में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या रुहुल्लाह भविष्य में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरेंगे। यदि ऐसा होता है तो श्रीनगर सीट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस और उनके बीच सीधा राजनीतिक मुकाबला देखने को मिल सकता है।

फिलहाल 3 नवंबर को बडगाम में होने वाली सभा को उनकी राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इस रैली में उनके अगले कदम और नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ उनके राजनीतिक रिश्तों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगा रुहुल्लाह मेहदी का यह फैसला नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए कितनी बड़ी चुनौती बनेगा और क्या वह अपनी अलग राजनीतिक राह बनाकर जनता का समर्थन हासिल कर पाएंगे।

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