Abhijeet Dipke Resignation: बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत पर CM पद से ‘इस्तीफा’, जानें पूरा मामला
भोपाल: मध्य प्रदेश में बालाघाट के आदिवासी इलाकों में बच्चों की मौत का मामला लगातार चर्चा में है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक ऐसा पोस्ट किया, जिससे उनके ‘इस्तीफे’ की चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, यह कोई वास्तविक इस्तीफा नहीं था, बल्कि मध्य प्रदेश सरकार पर निशाना साधने के लिए लिखा गया व्यंग्यात्मक इस्तीफा पत्र था।
अभिजीत दिपके ने क्या लिखा?
अभिजीत दिपके ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित करते हुए खुद को राज्य का मुख्यमंत्री बताते हुए इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने लिखा कि वह तत्काल प्रभाव से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मध्य प्रदेश की सेवा का अवसर देने के लिए धन्यवाद दिया।
दिपके ने अपने पत्र के जरिए मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार पर कई सवाल उठाए। उन्होंने बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत को लेकर सरकार की जिम्मेदारी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल खड़े किए।
30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत का मामला
बालाघाट के आदिवासी बहुल इलाकों में 30 से अधिक बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, बच्चों की मौतों को कई स्वास्थ्य समस्याओं और संक्रमण से जोड़कर देखा जा रहा है। इस मामले ने इलाके की स्वास्थ्य व्यवस्था, कुपोषण और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
दिपके ने अपने व्यंग्यात्मक पत्र में कहा कि अगर बच्चों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा और जरूरी मदद मिलती तो कुछ जानें बचाई जा सकती थीं। उन्होंने इस पूरे मामले की जिम्मेदारी सरकार पर डालते हुए प्रशासनिक व्यवस्था की आलोचना की।
मुआवजे को लेकर भी सरकार पर निशाना
दिपके ने आदिवासी बच्चों की मौत के बाद दिए गए मुआवजे को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि शुरुआत में मृत बच्चों के परिवारों के लिए 2 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की गई थी, जिसे आदिवासी समुदाय के विरोध के बाद बढ़ाकर 4 लाख रुपये किया गया।
उन्होंने अपने व्यंग्यात्मक पत्र में सरकार से सवाल किया कि क्या मंत्रियों या विधायकों के बच्चों की मौत होने पर भी मुआवजे की यही राशि तय की जाती।
बालाघाट पहुंचे थे दिपके
इस्तीफे वाले पोस्ट से एक दिन पहले यानी शनिवार को अभिजीत दिपके बालाघाट के अदोरी, कोरका और बोंदारी गांव पहुंचे थे। उन्होंने आदिवासी बच्चों के परिवारों से मुलाकात की और इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति के बारे में जानकारी जुटाई।
इसी दौरान उनका कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से कथित तौर पर विवाद भी हुआ। एक वायरल वीडियो में एक महिला उन्हें सवाल करती दिखाई दी और आरोप लगाया कि वह बच्चों की मौत के मुद्दे पर राजनीति करने आए हैं। स्थिति बढ़ने के बाद CJP कार्यकर्ताओं ने दिपके को दूसरी गाड़ी में बैठाकर वहां से रवाना कर दिया।
हाईकोर्ट भी ले चुका है मामले का संज्ञान
बालाघाट में बच्चों की मौत का मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। अदालत ने इस मामले में राज्य के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और बालाघाट कलेक्टर समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
ऐसे में अभिजीत दिपके का व्यंग्यात्मक इस्तीफा पत्र सामने आने के बाद बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
वास्तविक इस्तीफा नहीं है पोस्ट
अभिजीत दिपके के पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों में भ्रम पैदा हुआ, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक यह वास्तविक मुख्यमंत्री पद का इस्तीफा नहीं था। दिपके ने व्यंग्य के जरिए मध्य प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधा था।
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