पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट पर बढ़ा विवाद, राहुल गांधी ने मोदी सरकार से पूछे सवाल, कर्नाटक की रिपोर्ट से मचा हड़कंप
नई दिल्ली: पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट को लेकर देश में विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कर्नाटक सरकार की ओर से पेट्रोल के सैंपल की जांच कराने के बाद सामने आई रिपोर्ट ने इस मामले को और गरमा दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य के कई जिलों में पेट्रोल के अंदर इथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत से अधिक पाई गई है। इस मुद्दे को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की बात करती है, लेकिन कर्नाटक सरकार की जांच में कई सैंपल में इससे अधिक मात्रा सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल कंपनियां निर्धारित सीमा से ज्यादा इथेनॉल मिला रही हैं, जिसका आर्थिक नुकसान आम वाहन चालकों को उठाना पड़ सकता है।
कर्नाटक के सात जिलों में पेट्रोल के सैंपल की जांच
कर्नाटक सरकार ने राज्य के अलग-अलग पेट्रोल पंपों से पेट्रोल के कुल 63 सैंपल एकत्र किए थे। इनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL), नायरा और शेल जैसी कंपनियों के पेट्रोल पंप शामिल थे।
राज्य सरकार के अनुसार, शुरुआत में इन सैंपल को संबंधित तेल कंपनियों की प्रयोगशालाओं में भेजा गया था। सरकार ने कंपनियों से पेट्रोल में इथेनॉल की वास्तविक मात्रा की जानकारी मांगी थी। हालांकि, राज्य सरकार का आरोप है कि कंपनियों की ओर से संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने के बाद कुछ सैंपल निजी प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए।
बेंगलुरु स्थित मान्यता प्राप्त श्रीराम रिसर्च इंस्टीट्यूट में सात जिलों से लिए गए 14 सैंपल की जांच कराई गई। राहुल गांधी ने इसी जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि 14 में से 11 सैंपल में इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से ज्यादा पाई गई।
IOCL में 31.2% और HPCL में 30.5% इथेनॉल मिलने का दावा
राहुल गांधी ने जांच के नतीजों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ पेट्रोल सैंपल में इथेनॉल की मात्रा काफी ज्यादा पाई गई है।
कर्नाटक सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, इंडियन ऑयल के एक सैंपल में इथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के एक सैंपल में 30.5 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके अलावा भारत पेट्रोलियम के एक सैंपल में 26.5 प्रतिशत, नायरा में 26.1 प्रतिशत और शेल के एक सैंपल में 25.5 प्रतिशत इथेनॉल मिलने का दावा किया गया है।
इन आंकड़ों को लेकर राहुल गांधी ने सरकारी और निजी दोनों तरह की तेल कंपनियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियों की अपनी प्रयोगशालाओं ने भी सैंपल में इथेनॉल की वास्तविक मात्रा स्पष्ट नहीं की।
राहुल गांधी ने कहा- ‘E20 बना 420’
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ‘E20 बना 420, जनता की गाड़ी से पेट्रोल चोरी’ जैसी टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि लोग पेट्रोल की पूरी कीमत चुका रहे हैं, लेकिन अगर पेट्रोल में निर्धारित मात्रा से अधिक इथेनॉल मिलाया जा रहा है तो इसका नुकसान वाहन मालिकों को उठाना पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए पूछा कि देश में पेट्रोल के अंदर वास्तव में कितनी मात्रा में इथेनॉल मिलाया जा रहा है? निर्धारित 20 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल मिलाने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?
उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले में स्पष्ट जवाब देने और पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
पवन खेड़ा ने भी सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उपभोक्ता पेट्रोल के नाम पर पैसे दे रहे हैं, लेकिन उन्हें निर्धारित अनुपात से अधिक इथेनॉल वाला ईंधन मिल रहा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अगर पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक है तो इससे वाहन चालकों के खर्च पर असर पड़ सकता है। पार्टी ने इस मामले में सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है।
गाड़ियों की माइलेज और इंजन पर पड़ सकता है असर
इस विवाद का सबसे बड़ा सवाल आम वाहन चालकों से जुड़ा हुआ है। राहुल गांधी ने दावा किया कि पेट्रोल में अधिक मात्रा में इथेनॉल मिलाने से गाड़ियों की माइलेज कम हो सकती है और रखरखाव का खर्च बढ़ सकता है।
उनका कहना है कि जिन वाहनों को अधिक इथेनॉल वाले ईंधन के अनुकूल नहीं बनाया गया है, उनमें तकनीकी समस्याएं आने की आशंका हो सकती है।
कर्नाटक सरकार ने भी आशंका जताई है कि निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल मिलने पर वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने केंद्र से प्रभावित वाहन चालकों के लिए मुआवजे की व्यवस्था करने की मांग उठाई है।
कर्नाटक सरकार ने स्पॉइलेज फंड बनाने की मांग की
कर्नाटक सरकार ने पेट्रोल में अधिक इथेनॉल मिलने के आरोपों के बीच वाहन मालिकों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए मुआवजा व्यवस्था बनाने की मांग की है।
राज्य सरकार का कहना है कि अगर अधिक इथेनॉल की वजह से गाड़ियों की माइलेज कम होती है या उनके रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च आता है तो इसकी भरपाई के लिए विशेष फंड बनाया जाना चाहिए।
इसके साथ ही पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल की वास्तविक मात्रा की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की मांग भी की गई है, ताकि उपभोक्ताओं को पता चल सके कि वे किस तरह का ईंधन खरीद रहे हैं।
तेल कंपनियों ने कर्नाटक की रिपोर्ट पर उठाए सवाल
दूसरी तरफ, सरकारी तेल कंपनियों ने कर्नाटक सरकार की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि कर्नाटक सरकार की ओर से लगाए गए आरोप निर्धारित कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं के तहत की गई जांच से प्रमाणित नहीं होते।
कंपनियों का कहना है कि उनके द्वारा देशभर में, कर्नाटक सहित, सप्लाई किया जा रहा E20 पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो के निर्धारित IS 17021 मानक के अनुरूप है।
तेल कंपनियों ने यह भी दावा किया कि 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जांचे गए 893 सैंपल निर्धारित 19 से 21 प्रतिशत इथेनॉल की सीमा के भीतर पाए गए। इनमें कर्नाटक के 56 सैंपल भी शामिल थे।
कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से जांच की प्रक्रिया और सैंपल के रिकॉर्ड साझा करने की मांग की है। साथ ही पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए राज्य सरकार के साथ संयुक्त और पारदर्शी जांच कराने की पेशकश की है।
अब पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर बढ़ी बहस
कर्नाटक सरकार की जांच रिपोर्ट, राहुल गांधी के आरोप और तेल कंपनियों के जवाब के बाद पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का मुद्दा राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। एक तरफ राज्य सरकार और कांग्रेस उपभोक्ताओं के हितों को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं तेल कंपनियां अपने ईंधन की गुणवत्ता को निर्धारित मानकों के अनुरूप बता रही हैं।
अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल जांच की प्रक्रिया, पेट्रोल में इथेनॉल की वास्तविक मात्रा और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा का है। केंद्र सरकार की ओर से इस विवाद पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और संयुक्त जांच में क्या नतीजे सामने आते हैं, इस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।