पंचायत आजतक अयोध्या में संतों ने रखी बेबाक राय, राम मंदिर से लेकर योगी सरकार के कामकाज तक हुई चर्चा
अयोध्या: उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी अयोध्या में आयोजित ‘पंचायत आजतक’ के मंच पर संत समाज ने सनातन संस्कृति, राम मंदिर आंदोलन, मंदिर निर्माण और अयोध्या के बदलते स्वरूप को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। कार्यक्रम के विशेष सत्र ‘अयोध्या कितनी बदली’ में हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास, स्वामी करपात्री जी महाराज सहित अन्य संतों ने अयोध्या के विकास और मौजूदा परिस्थितियों पर अपने विचार साझा किए।
संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में काम हुआ है। संतों के मुताबिक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद शहर की पहचान और विकास दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
राम मंदिर आंदोलन में संत समाज की अहम भूमिका
संतों ने भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण के पीछे लंबे संघर्ष को याद किया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में संत समाज के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान आंदोलन के संघर्षपूर्ण दौर को याद करते हुए ‘लाठी-गोली खाएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ जैसे नारों का भी उल्लेख किया गया।
संतों ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण केवल एक धार्मिक उपलब्धि नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और लंबे संघर्ष का परिणाम है। इसके लिए अनेक लोगों ने वर्षों तक आंदोलन किया और कठिन परिस्थितियों का सामना किया।
योगी सरकार के कामकाज की संतों ने की सराहना
कार्यक्रम के दौरान संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शांति, सुरक्षा और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
संतों का मानना है कि अयोध्या में विकास कार्यों और बेहतर व्यवस्थाओं के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है।
विक्रमादित्य से जुड़ी अयोध्या की प्राचीन विरासत का जिक्र
संतों ने अयोध्या के प्राचीन इतिहास और धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए महाराजा विक्रमादित्य से जुड़ी परंपराओं पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाराजा विक्रमादित्य ने अयोध्या के प्राचीन धार्मिक स्थलों और तीर्थों के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
संतों ने कहा कि अयोध्या की पहचान केवल राम मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्राचीन भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र रही है।
राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं से बढ़े रोजगार के अवसर
संतों ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण और अयोध्या में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का सकारात्मक असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। शहर में होटल, धर्मशाला, परिवहन, दुकानदारी और अन्य कारोबार से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल रहे हैं।
उनके अनुसार धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के रास्ते खुले हैं। अयोध्या में लगातार हो रहे विकास कार्यों से शहर का आर्थिक और सामाजिक स्वरूप भी बदल रहा है।
राम मंदिर में चोरी के आरोपों को संतों ने किया खारिज
कार्यक्रम में राम मंदिर के दानपात्र से चोरी की खबरों को लेकर भी चर्चा हुई। संतों ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मंदिर परिसर या पुजारियों द्वारा दान की राशि में चोरी किए जाने की बात सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर से जुड़े मामलों में बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी भी तरह की अफवाह या आरोप फैलाना उचित नहीं है। मंदिर की व्यवस्था और धार्मिक गतिविधियों को लेकर संतों ने पारदर्शिता और तथ्यों के आधार पर बात रखने की जरूरत बताई।
अयोध्या लोकसभा चुनाव के नतीजों पर भी हुई चर्चा
पंचायत आजतक के मंच पर अयोध्या लोकसभा सीट के चुनाव परिणाम और स्थानीय लोगों की नाराजगी का मुद्दा भी उठा। महंत राजू दास सहित अन्य संतों ने चुनावी नतीजों और राजनीतिक बयानबाजी पर अपनी राय रखी।
संतों ने कहा कि अयोध्या जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले क्षेत्र में जनता की भावनाओं और स्थानीय मुद्दों को गंभीरता से समझना जरूरी है। उन्होंने राजनीतिक दलों से भी अपेक्षा जताई कि वे अयोध्या के विकास और लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता दें।
कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर भी संतों ने रखी बात
संतों ने राम मंदिर निर्माण का उदाहरण देते हुए कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जिस तरह अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ है, उसी तरह सभी को मिलकर कृष्ण जन्मभूमि के विषय में भी आगे बढ़ना चाहिए।
हालांकि संतों ने यह भी कहा कि ऐसे धार्मिक और संवेदनशील मुद्दों पर समाज को एकजुट होकर अ
पनी बात रखनी चाहिए।
कुल मिलाकर ‘पंचायत आजतक अयोध्या’ का यह सत्र राम मंदिर आंदोलन के इतिहास, सनातन संस्कृति, योगी सरकार के कामकाज, अयोध्या के विकास और भविष्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित रहा। संतों ने अयोध्या को धार्मिक आस्था के साथ-साथ विकास और रोजगार के नए केंद्र के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।