दिल्ली में CM रेखा गुप्ता का बड़ा एक्शन, आज से लागू हुआ विंटर एक्शन प्लान; 50% वर्क फ्रॉम होम समेत कई पाबंदियां
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सरकार का विंटर एक्शन प्लान 1 नवंबर से लागू हो गया है। इस योजना के तहत सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने, पार्किंग शुल्क बढ़ाने और दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाले पुराने वाहनों पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाए गए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रदूषण के स्तर को कम करना और लोगों को साफ हवा उपलब्ध कराना है।
सरकारी और निजी दफ्तरों में 50% वर्क फ्रॉम होम
विंटर एक्शन प्लान के तहत दिल्ली के सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को सीमित करने के लिए 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू की गई है। इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करने और ट्रैफिक से होने वाले प्रदूषण को घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने अलग-अलग कार्यालयों के लिए कामकाज का समय भी तय किया है। नगर निगम दिल्ली (MCD) के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित होंगे। अलग-अलग समय पर कार्यालय खुलने से सड़कों पर एक साथ बढ़ने वाले ट्रैफिक को कम करने की कोशिश की जाएगी।
दिल्ली में बाहर के पुराने वाहनों की एंट्री पर रोक
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए दिल्ली के बाहर से आने वाले पुराने वाहनों पर भी सख्ती की गई है। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली में दूसरे राज्यों में पंजीकृत BS-VI से नीचे के वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। इस कदम का मकसद अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को राजधानी में आने से रोकना है।
इसके अलावा वाहनों के प्रदूषण स्तर की जांच के लिए वैध PUC प्रमाणपत्र को लेकर भी सख्ती जारी रहेगी। बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को लेकर पहले से लागू नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
पार्किंग शुल्क होगा दोगुना
विंटर एक्शन प्लान के तहत दिल्ली में निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग शुल्क दोगुना करने का फैसला भी किया गया है। हालांकि, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की पार्किंग को इस व्यवस्था से छूट दी गई है।
सरकार को उम्मीद है कि पार्किंग महंगी होने से लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो और अन्य विकल्पों का अधिक इस्तेमाल करेंगे। इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव और प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है।
निर्माण कार्यों और धूल पर भी सख्ती
दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण बढ़ाने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाले डिमोलिशन और खुले में होने वाले सिविल निर्माण कार्य प्रतिबंधित रहेंगे। जरूरी सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निर्धारित शर्तों के साथ छूट मिल सकती है।
इसके अलावा 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर और सख्त प्रतिबंध लागू रहेगा। बड़े निर्माण स्थलों की निगरानी के लिए AI आधारित कैमरों और डस्ट पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम भी लागू
दिल्ली में वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना वाहनों को ईंधन नहीं देने का नियम भी लागू है। इसके तहत वैध PUC प्रमाणपत्र नहीं रखने वाले वाहनों को पेट्रोल, डीजल और CNG सहित ईंधन देने से इनकार किया जा सकता है। इस व्यवस्था की निगरानी के लिए पेट्रोल पंपों पर नंबर प्लेट पहचानने वाले कैमरों और संबंधित डिजिटल प्रणालियों का उपयोग किया जा रहा है।
नियमों का पालन कराने के लिए विशेष निगरानी
विंटर एक्शन प्लान को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए दिल्ली सरकार ने संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय पर जोर दिया है। प्रतिबंधित वाहनों की पहचान, निर्माण स्थलों की जांच और प्रदूषण नियंत्रण नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत की जा रही है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्लीवासियों से अपील की है कि वे निजी वाहनों का अनावश्यक इस्तेमाल कम करें, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें, कूड़ा या अन्य सामग्री खुले में न जलाएं और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों का पालन करें। सरकार का मानना है कि प्रशासनिक सख्ती के साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।
क्या है विंटर एक्शन प्लान का उद्देश्य?
दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान हवा की गुणवत्ता खराब होने और प्रदूषण बढ़ने की समस्या सामने आती है। इस बार सरकार ने वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, ट्रैफिक जाम और खुले में कचरा जलाने जैसी समस्याओं पर एक साथ कार्रवाई करने की योजना बनाई है।
विंटर एक्शन प्लान के तहत अलग-अलग उपायों की अवधि अलग रखी गई है। व्यापक योजना 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी, जबकि कुछ वाहन और निर्माण संबंधी प्रतिबंध 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेंगे। अब इन नियमों का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित विभाग इन्हें कितनी सख्ती से लागू करते हैं और दिल्ली के लोग कितना सहयोग करते हैं