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Panna Executive Engineer CB Ahirwar Suspended: रिश्वत मामले में विवादित बयान के बाद सरकार का एक्शन

पन्ना में रिश्वत कांड के बाद कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार सस्पेंड, कैमरे पर दिया था विवादित बयान

पन्ना: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में लोकायुक्त की रिश्वतखोरी के खिलाफ कार्रवाई के बाद जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार पर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। रिश्वत मामले में विभागीय कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद कैमरे पर दिए गए उनके विवादित बयान को गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह मामला 45 हजार रुपये की कथित रिश्वत से जुड़ा है, जिसमें सागर लोकायुक्त की टीम ने जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों को पकड़ा था।

45 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए दो कर्मचारी

मामले के अनुसार, ग्वालियर निवासी ठेकेदार गौरव तोमर ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पन्ना जिले की मझगांय मध्यम परियोजना के तहत कैनाल स्लूस निर्माण कार्य के अंतिम भुगतान के बदले रिश्वत मांगी जा रही थी।

ठेकेदार का आरोप था कि भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए विभागीय कर्मचारियों ने 45 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद सागर लोकायुक्त की टीम ने मामले की जांच की और कार्रवाई की योजना बनाई।

इसके बाद लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों को कथित तौर पर 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया।

पत्रकारों के सवाल पर कार्यपालन यंत्री ने दिया विवादित बयान

लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद पत्रकारों ने जल संसाधन संभाग पन्ना के कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार से पूरे मामले को लेकर सवाल किए। इस दौरान उन्होंने कैमरे पर ऐसा बयान दिया, जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया।

उनका बयान सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा। मामले ने तूल पकड़ा तो राज्य शासन ने भी इसे गंभीरता से लिया। सरकारी अधिकारी की ओर से दिए गए इस बयान को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई।

राज्य शासन ने तत्काल प्रभाव से किया सस्पेंड

सीबी अहिरवार के बयान के सामने आने के बाद राज्य शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। सरकार की ओर से सोशल मीडिया पर प्रसारित बयान को गंभीरता से लेने की बात कही गई।

निलंबन की कार्रवाई के बाद जल संसाधन विभाग में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, रिश्वत मामले में पकड़े गए दोनों कर्मचारियों के खिलाफ लोकायुक्त की कानूनी कार्रवाई अलग से जारी रहेगी।

ठेकेदार की शिकायत से शुरू हुई पूरी कार्रवाई

इस पूरे मामले की शुरुआत ठेकेदार गौरव तोमर की शिकायत से हुई थी। वह मझगांय मध्यम परियोजना के कैनाल स्लूस निर्माण कार्य का अंतिम भुगतान प्राप्त करना चाहते थे। आरोप है कि भुगतान के बदले उनसे रिश्वत मांगी गई।

शिकायत के आधार पर लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई की और दो कर्मचारियों को पकड़ लिया। इसके बाद कार्यपालन यंत्री का बयान सामने आने से मामला और चर्चा में आ गया।

भ्रष्टाचार के मामलों में प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल

पन्ना का यह मामला सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की शिकायतों और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा में है। एक तरफ लोकायुक्त की कार्रवाई में दो कर्मचारियों को कथित रिश्वत लेते पकड़ा गया, वहीं दूसरी तरफ विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के बयान पर सरकार को निलंबन की कार्रवाई करनी पड़ी।

फिलहाल इस मामले में लोकायुक्त की जांच और आगे की विभागीय प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

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