पंजाब में एक हफ्ते में लगभग दोगुने हुए पराली जलाने के मामले, एक दिन में 194 नई घटनाएं दर्ज
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 29 अक्टूबर को एक ही दिन में 194 नए मामले सामने आए, जिससे राज्य में कुल घटनाओं की संख्या बढ़कर 1,007 हो गई।
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। राज्य में पिछले एक हफ्ते के दौरान खेतों में आग लगाने के मामलों में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 29 अक्टूबर को एक ही दिन में पराली जलाने की 194 नई घटनाएं सामने आईं। इसके बाद राज्य में इस सीजन में दर्ज कुल मामलों की संख्या बढ़कर 1,007 हो गई।
आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 23 अक्टूबर के बीच पंजाब में पराली जलाने की 542 घटनाएं दर्ज की गई थीं। 28 अक्टूबर तक यह आंकड़ा बढ़कर 813 पहुंच गया। इसके अगले ही दिन यानी 29 अक्टूबर को 194 नए मामले जुड़ गए। इससे कुछ ही दिनों में घटनाओं की संख्या में तेज उछाल देखने को मिला है।
29 अक्टूबर को एक दिन में 194 मामले
पराली जलाने की घटनाओं में हालिया बढ़ोतरी ने राज्य के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। 28 अक्टूबर तक 813 मामलों के बाद अगले दिन 194 नए मामले दर्ज हुए। इस तरह 29 अक्टूबर तक कुल घटनाओं की संख्या 1,007 हो गई।
खेतों में फसल अवशेष जलाने से उठने वाला धुआं वायु प्रदूषण की समस्या को बढ़ा सकता है। इसका असर पंजाब के साथ-साथ आसपास के राज्यों और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की हवा पर भी पड़ सकता है।
तरनतारन, अमृतसर और फिरोजपुर में भी चिंता
पंजाब के अलग-अलग जिलों में पराली जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। तरनतारन, अमृतसर और फिरोजपुर जैसे जिलों में दर्ज मामलों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। इन क्षेत्रों में खेतों में आग लगाने की घटनाओं पर निगरानी और रोकथाम की जरूरत बढ़ गई है।
पराली जलाने के मामलों में बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब उत्तर भारत में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु गुणवत्ता को लेकर पहले से चिंता बनी हुई है।
349 मामलों में पर्यावरण मुआवजे की कार्रवाई
पराली जलाने की घटनाओं पर कार्रवाई भी की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 349 मामलों में पर्यावरण मुआवजे से जुड़ी कार्रवाई की गई है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन की ओर से घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी के साथ दंडात्मक कदम भी उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, लगातार बढ़ते आंकड़े बताते हैं कि खेतों में फसल अवशेष जलाने की समस्या पर नियंत्रण पाना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
CAQM की टीम ने अमृतसर का किया दौरा
पिछले सप्ताह वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के चेयरपर्सन राजेश वर्मा के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय टीम ने अमृतसर का दौरा किया था। यह आयोग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता से जुड़े मामलों पर काम करता है।
पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी के बीच इस दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खेतों में आग लगाने की घटनाओं को रोकना और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन को बढ़ावा देना प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से अहम है।
पराली जलाने पर रोक लगाना बड़ी चुनौती
पंजाब में पराली जलाने के मामलों में अचानक आई तेजी ने प्रशासन और पर्यावरण से जुड़े विभागों की चिंता बढ़ा दी है। एक सप्ताह में घटनाओं का लगभग दोगुना होना बताता है कि निगरानी और रोकथाम के प्रयासों को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में पराली जलाने की घटनाओं पर कितना नियंत्रण हो पाता है और किसानों को फसल अवशेषों के वैकल्पिक प्रबंधन के लिए किस तरह प्रोत्साहित किया जाता है।