उमर अब्दुल्ला कैबिनेट फेरबदल के बाद NC में घमासान, 4 नए मंत्री बने, क्षेत्रीय संतुलन पर BJP ने घेरा
जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सरकार के कैबिनेट फेरबदल के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। सरकार में खाली पदों को भरने और मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने के उद्देश्य से किए गए बदलाव के बाद सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर नाराजगी सामने आने लगी है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।
श्रीनगर स्थित लोक भवन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने चार नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इनमें अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी शामिल हैं। चारों मंत्री कश्मीर घाटी से आते हैं। दूसरी ओर, स्वतंत्र विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया।
इस फेरबदल के बाद सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां दिखाई दे रही हैं। पहली, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उन नेताओं की नाराजगी दूर करना जिन्हें मंत्री पद नहीं मिला। दूसरी, जम्मू और कश्मीर के बीच मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना।
चार नए मंत्रियों ने ली शपथ
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सरकार में हुए फेरबदल के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के चार नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी गई।
नए मंत्रियों में वरिष्ठ नेता अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी शामिल हैं। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
अली मोहम्मद सागर और मीर सैफुल्लाह पहले भी मंत्री रह चुके हैं। वहीं, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है।
इस बदलाव के बाद जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत कुल नौ सदस्य हो गए हैं। केंद्र शासित प्रदेश की 90 सदस्यीय विधानसभा के लिहाज से मंत्रिमंडल की यह अधिकतम निर्धारित संख्या है।
कैबिनेट से सतीश शर्मा की छुट्टी
मंत्रिमंडल में चार नए चेहरों को शामिल करने के साथ स्वतंत्र विधायक सतीश शर्मा को बाहर का रास्ता दिखाया गया। वह छंब विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और जम्मू क्षेत्र से आते हैं।
सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद जम्मू के मैदानी इलाकों के प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नए मंत्रियों में किसी के भी जम्मू के मैदानी क्षेत्र से नहीं होने के कारण भाजपा ने सरकार पर क्षेत्रीय संतुलन की अनदेखी का आरोप लगाया है।
फेरबदल से पहले मंत्रियों ने प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मुख्यमंत्री को अपने इस्तीफे सौंपे थे। इसके बाद नए मंत्रियों को शामिल करने का रास्ता साफ हुआ।
नौ में से सात मंत्री कश्मीर घाटी से
कैबिनेट फेरबदल के बाद क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। नए मंत्रियों के शामिल होने से नौ सदस्यीय मंत्रिमंडल में सात मंत्री कश्मीर घाटी से हो गए हैं। जम्मू क्षेत्र से उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और जावेद अहमद राणा मंत्रिमंडल में बने हुए हैं।
भाजपा का कहना है कि सरकार को जम्मू और कश्मीर, दोनों क्षेत्रों के लोगों को समान महत्व देना चाहिए। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि मंत्रिमंडल के नए गठन में क्षेत्रीय और सांस्कृतिक संतुलन का ध्यान नहीं रखा गया।
हालांकि, सरकार के सामने मंत्रिमंडल में अनुभव, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और पार्टी के अलग-अलग क्षेत्रों के नेताओं को समायोजित करने की चुनौती भी है। इस फेरबदल को लेकर उठे सवालों के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार क्षेत्रीय असंतुलन की आलोचना का जवाब कैसे देती है।
मुबारक गुल की नाराजगी, समर्थकों ने किया प्रदर्शन
कैबिनेट फेरबदल के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और ईदगाह से विधायक मुबारक गुल की नाराजगी खुलकर सामने आई। उन्हें मंत्री बनाए जाने की उम्मीद थी, लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम नहीं आया।
इसके बाद उनके समर्थकों ने श्रीनगर में पार्टी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। समर्थकों ने नेतृत्व के फैसले पर नाराजगी जताई और मुबारक गुल को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर सवाल उठाए।
मुबारक गुल ने भी अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा कि वह अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई शपथ ग्रहण समारोहों में शामिल हुए हैं, लेकिन उन्हें बार-बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली।
स्थिति को संभालने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मुबारक गुल को पार्टी का नया महासचिव नियुक्त कर दिया। इससे पहले यह जिम्मेदारी अली मोहम्मद सागर के पास थी, जिन्हें अब मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।
पार्टी नेतृत्व के इस कदम को नाराजगी कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इससे पार्टी के सभी असंतुष्ट नेताओं की नाराजगी दूर हुई है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
अब्दुल मजीद लार्मी भी हुए नाराज
मुबारक गुल के अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ विधायक अब्दुल मजीद लार्मी ने भी मंत्री पद नहीं मिलने पर निराशा जताई। वह अनंतनाग पश्चिम से विधायक हैं और उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिलने की उम्मीद थी।
लार्मी ने कहा कि पार्टी में वरिष्ठता और अनुभव को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की, लेकिन साथ ही पार्टी के साथ बने रहने की बात भी कही।
कैबिनेट फेरबदल के बाद कई नेताओं के असंतुष्ट होने की खबरों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी के सामने अब नाराज विधायकों और उनके समर्थकों को शांत करने की चुनौती है, ताकि अंदरूनी मतभेद सरकार के कामकाज को प्रभावित न करें।
BJP नेता सुनील शर्मा ने सरकार पर साधा निशाना
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील शर्मा ने कैबिनेट फेरबदल को लेकर उमर अब्दुल्ला सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और सांस्कृतिक संतुलन का ध्यान नहीं रखा गया। भाजपा का कहना है कि सरकार को सभी क्षेत्रों और समुदायों को साथ लेकर चलना चाहिए, लेकिन नए मंत्रिमंडल में जम्मू के मैदानी इलाकों का प्रतिनिधित्व कमजोर हो गया है।
भाजपा नेताओं ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष का मुद्दा भी उठाया। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि सरकार को बाहरी राजनीतिक चुनौतियों के साथ-साथ अंदरूनी नाराजगी का भी सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि, नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों के भाजपा के संपर्क में होने या सरकार को समर्थन वापस लेने की किसी ठोस पुष्टि के बिना इसे राजनीतिक दावा ही माना जाना चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार में शामिल होने से फिर किया इनकार
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में कांग्रेस की भूमिका भी चर्चा में है। नेशनल कॉन्फ्रेंस की सहयोगी कांग्रेस ने एक बार फिर मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने का फैसला दोहराया है।
जम्मू-कश्मीर कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि पार्टी का रुख स्पष्ट है। जब तक जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाता, कांग्रेस सरकार में शामिल नहीं होगी।
कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मंत्रिमंडल में शामिल न होने का फैसला सरकार से समर्थन वापस लेने के बराबर नहीं है। पार्टी राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की मांग को अपनी राजनीतिक प्राथमिकता के रूप में उठा रही है।
इससे उमर अब्दुल्ला सरकार के लिए गठबंधन सहयोगियों के साथ तालमेल बनाए रखना भी महत्वपूर्ण हो गया है।
क्या उमर अब्दुल्ला सरकार पर संकट के बादल?
कैबिनेट फेरबदल के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस में नाराजगी और भाजपा के हमलों ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। हालांकि, केवल कुछ विधायकों की नाराजगी या मंत्रिमंडल में बदलाव के आधार पर सरकार के गिरने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के 41 विधायक हैं। इसके अलावा कांग्रेस, कुछ निर्दलीय विधायकों और एक माकपा विधायक का समर्थन सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में सरकार की स्थिरता का आकलन वास्तविक समर्थन संख्या और विधायकों के औपचारिक रुख के आधार पर ही किया जा सकता है।
फिलहाल उमर अब्दुल्ला के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर असंतोष को दूर करने, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर उठे सवालों का जवाब देने और सरकार के कामकाज पर ध्यान बनाए रखने की है।
निष्कर्ष
जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार के कैबिनेट फेरबदल ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर नाराजगी और भाजपा के साथ राजनीतिक टकराव को बढ़ा दिया है। चार नए मंत्रियों के शामिल होने और सतीश शर्मा को हटाए जाने के बाद क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर बहस तेज हो गई है।
मुबारक गुल और अब्दुल मजीद लार्मी जैसे नेताओं की नाराजगी ने पार्टी नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी की है। वहीं भाजपा सरकार पर क्षेत्रीय संतुलन की अनदेखी का आरोप लगा रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उमर अब्दुल्ला इन राजनीतिक चुनौतियों से कैसे निपटते हैं और क्या पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं को मनाने में सफल रहता है।