Jamia Protest: जामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग पर प्रदर्शन जारी, राहुल गांधी आज छात्रों से करेंगे मुलाकात
नई दिल्ली: दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 28 अक्टूबर को प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात करने जामिया पहुंचने वाले हैं। छात्र पिछले कई दिनों से छात्र संघ चुनाव की निश्चित तारीख घोषित करने, छात्र नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। इसके कारण विद्यार्थियों के पास अपनी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को सामूहिक रूप से उठाने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधि मंच नहीं है। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ का संविधान तैयार करने और उसे मंजूरी मिलने के बाद चुनाव कराने की बात कही है। लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं।
18 साल से ज्यादा समय से छात्र संघ चुनाव नहीं होने का दावा
प्रदर्शनकारी छात्रों के मुताबिक, जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव लंबे समय से बंद हैं। छात्रों का दावा है कि वर्ष 2006 से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। उनका कहना है कि निर्वाचित छात्र संघ की गैरमौजूदगी में विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रभावी तरीके से उठाने और छात्र गतिविधियों को संगठित करने में परेशानी होती है।
छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र संघ को जल्द बहाल करे और चुनाव कराने के लिए स्पष्ट कार्यक्रम जारी करे। उनका कहना है कि केवल चुनाव कराने का आश्वासन पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशासन को यह भी बताना चाहिए कि संविधान को कब मंजूरी मिलेगी और मतदान किस तारीख को कराया जाएगा।
राहुल गांधी आज दोपहर 2 बजे छात्रों से करेंगे मुलाकात
जामिया में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 28 अक्टूबर को दोपहर करीब 2 बजे भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से मुलाकात करने वाले हैं। उनके प्रस्तावित दौरे को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों की नजर बनी हुई है।
छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच राहुल गांधी की मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, मुलाकात के दौरान क्या चर्चा होगी और इसके बाद आंदोलन को लेकर क्या रुख सामने आएगा, यह स्पष्ट होना बाकी है।
छात्रों की मुख्य मांग चुनाव की निश्चित तारीख घोषित करना है। वे चाहते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए, ताकि छात्र संघ की बहाली को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो सके।
चुनाव के लिए संविधान बनाने के फैसले से बढ़ा विवाद
जामिया प्रशासन ने छात्र संघ का नया संविधान तैयार करने के लिए समिति बनाने का फैसला किया है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।
हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि इस आदेश में संविधान को मंजूरी देने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। ऐसे में चुनाव की तारीख को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। छात्रों को आशंका है कि संविधान को मंजूरी मिलने में देरी होने पर चुनाव भी टल सकते हैं।
छात्र चाहते हैं कि प्रशासन संविधान तैयार करने, उसे मंजूरी देने और चुनाव कराने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करे। उनके मुताबिक, जब तक चुनाव का ठोस कार्यक्रम घोषित नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त करने का कोई औचित्य नहीं है।
छात्र नेताओं पर कार्रवाई वापस लेने की मांग
छात्र संघ चुनाव के अलावा प्रदर्शनकारी विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्र कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि आंदोलन में शामिल छात्रों को जारी निलंबन आदेश और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने 26 अक्टूबर को जारी आदेश में आंदोलन के दौरान दिए गए निलंबन आदेशों और कारण बताओ नोटिसों को रद्द करने की बात कही थी। साथ ही, आंदोलन के दौरान सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार की जांच के लिए समिति गठित करने का भी प्रावधान किया गया।
इसके बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने आदेश को अपनी मांगों का पूरा समाधान मानने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि सभी संबंधित छात्रों के खिलाफ कार्रवाई वापस लेने और चुनाव की निश्चित तारीख घोषित करने के बाद ही आंदोलन पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
भूख हड़ताल पर बैठे छात्र, परिसर में तनाव
छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में तनाव की स्थिति भी सामने आई। सुरक्षा बढ़ाए जाने के बीच प्रदर्शनकारी छात्रों और सुरक्षा कर्मियों के बीच धक्का-मुक्की होने की खबरें आई थीं।
प्रदर्शन के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन करने का फैसला किया था। 27 अक्टूबर को जारी जानकारी के मुताबिक, ऑनलाइन कक्षाएं और मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं 8 नवंबर तक ऑनलाइन आयोजित किए जाने की व्यवस्था की गई थी। आगे की स्थिति की समीक्षा के बाद फैसला लेने की बात कही गई थी।
छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे हैं और प्रशासन को उनसे बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए।
विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच क्यों नहीं बन रही सहमति?
जामिया में जारी गतिरोध की मुख्य वजह चुनाव की निश्चित तारीख और छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने की समयसीमा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने की बात कही है, जबकि छात्र चाहते हैं कि संविधान को मंजूरी देने की प्रक्रिया के लिए भी अंतिम तारीख तय की जाए।
इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई और सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार का मुद्दा भी विवाद का हिस्सा बना हुआ है। प्रशासन ने कुछ कदम उठाने की घोषणा की है, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र उन्हें अपनी सभी मांगों की पूर्ति के लिए पर्याप्त नहीं मान रहे हैं।
छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत से ही इस विवाद का समाधान निकलने की उम्मीद है।
अब राहुल गांधी की मुलाकात पर नजर
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर चल रहा आंदोलन विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। छात्र चुनाव की निश्चित तारीख, संविधान को मंजूरी देने की समयसीमा और अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग पर अड़े हैं।
28 अक्टूबर को राहुल गांधी की प्रस्तावित मुलाकात के दौरान छात्रों की मांगों और आंदोलन की स्थिति पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, इस मुलाकात के परिणाम और आंदोलन के आगे के रुख को लेकर अभी कोई अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।
निष्कर्ष: जामिया में छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन छात्र निश्चित समयसीमा चाहते हैं। अब राहुल गांधी की प्रस्तावित मुलाकात और विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदमों पर सबकी नजर रहेगी।