हरियाणा की भैंस दुर्गा ने 41.58 किलो दूध देकर बनाया रिकॉर्ड, रोज सरसों के तेल से होती है मालिश; गद्दों पर करती है आराम
हरियाणा के हांसी क्षेत्र के मिर्चपुर गांव की मुर्राह नस्ल की भैंस ‘दुर्गा’ इन दिनों चर्चा में है। पशुपालक नवदीप की इस भैंस ने एक दिन में 41.58 किलोग्राम दूध देकर नया रिकॉर्ड बनाया है। दुर्गा की खास बात सिर्फ उसका शानदार दुग्ध उत्पादन ही नहीं, बल्कि उसकी देखभाल का तरीका भी है। उसे रोजाना पौष्टिक आहार दिया जाता है, सरसों के तेल से मालिश की जाती है और आराम करने के लिए गद्दों की व्यवस्था भी है। दुर्गा की इस उपलब्धि से इलाके के पशुपालकों में उत्साह है।
हरियाणा की भैंस दुर्गा ने कैसे बनाया रिकॉर्ड?
मिर्चपुर गांव के पशुपालक नवदीप की भैंस दुर्गा ने हरियाणा सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की दुग्ध रिकॉर्डिंग प्रक्रिया के दौरान 41.58 किलोग्राम दूध उत्पादन दर्ज कराया। यह प्रक्रिया विभागीय अधिकारियों और विशेषज्ञों की देखरेख में पूरी की गई।
यह उपलब्धि स्वदेशी गायों के संरक्षण एवं विकास और मुर्राह विकास योजना के तहत दर्ज की गई। दुर्गा के इस प्रदर्शन ने मुर्राह नस्ल की दुग्ध उत्पादन क्षमता को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
इससे पहले दूध उत्पादन का रिकॉर्ड सिंघवा खास गांव के किसान ईश्वर सिंघवा की भैंस राधा के नाम था। राधा ने एक दिन में 35 किलो 669 ग्राम दूध दिया था। अब दुर्गा ने 41.58 किलोग्राम दूध उत्पादन के साथ इस आंकड़े को पीछे छोड़ दिया है।
बेटी ज्योति ने रखा था भैंस का नाम दुर्गा
पशुपालक नवदीप के मुताबिक, दुर्गा उनके परिवार की पालतू भैंस है और उनके यहां इसकी तीसरी पीढ़ी है। उन्होंने बताया कि उनकी छोटी बेटी ज्योति ने ही भैंस का नाम दुर्गा रखा था।
नवदीप के अनुसार, रिकॉर्ड बनने से पहले ही उनकी बेटी को भरोसा था कि इस बार दुर्गा पुराने रिकॉर्ड को तोड़कर नया कीर्तिमान स्थापित करेगी। अब भैंस के शानदार प्रदर्शन के बाद परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है।
दुर्गा की उपलब्धि परिवार के लिए गर्व का विषय बन गई है। गांव और आसपास के क्षेत्र में भी इस भैंस की चर्चा हो रही है।
दुर्गा को रोज खिलाया जाता है खास आहार
दुर्गा के बेहतर दुग्ध उत्पादन के पीछे संतुलित आहार और नियमित देखभाल की अहम भूमिका बताई जा रही है। नवदीप अपनी भैंस को रोजाना कई तरह के पौष्टिक खाद्य पदार्थ खिलाते हैं।
उसके आहार में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- खल और बिनोला
- चना और चने की चुरी
- मेथी और सोयाबीन
- गेहूं का दलिया
- हरा चारा
पशुपालक के मुताबिक, दुर्गा को नियमित रूप से करीब 15 किलो राशन के साथ हरा चारा भी दिया जाता है। हालांकि, किसी भी पशु के लिए आहार की सही मात्रा उसकी उम्र, वजन, स्वास्थ्य और दूध उत्पादन के अनुसार तय की जानी चाहिए।
गद्दों पर आराम और सरसों के तेल से मालिश
दुर्गा की देखभाल में आराम का भी खास ध्यान रखा जाता है। उसके बैठने और आराम करने के लिए गद्दों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, नवदीप रोजाना उसकी सरसों के तेल से मालिश भी करते हैं।
दुर्गा की देखभाल में नियमित स्वास्थ्य निगरानी और पशु चिकित्सकों की सलाह को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। संतुलित पोषण, स्वच्छ वातावरण, पर्याप्त आराम और सही प्रजनन प्रबंधन डेयरी पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादकता में मदद कर सकते हैं।
हालांकि, केवल मालिश या किसी एक खाद्य पदार्थ को अधिक दूध उत्पादन का कारण नहीं माना जा सकता। इसके लिए पशु की आनुवंशिक क्षमता, आहार, स्वास्थ्य और संपूर्ण प्रबंधन की भूमिका होती है।
दुर्गा को खरीदने के लिए मिला 40 लाख रुपये का ऑफर
नवदीप के मुताबिक, दुर्गा की लोकप्रियता और उसकी दूध उत्पादन क्षमता को देखते हुए रोहतक के एक व्यापारी ने उसे खरीदने के लिए 40 लाख रुपये तक की पेशकश की थी। हालांकि, नवदीप ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया और दुर्गा को बेचने से इनकार कर दिया।
इतना ही नहीं, नवदीप के 18 महीने के कटड़े की कीमत भी सात लाख रुपये लग चुकी है। ये आंकड़े पशुपालक की ओर से बताई गई पेशकशों पर आधारित हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
दुर्गा को बेचने से इनकार करना दिखाता है कि नवदीप के लिए वह केवल कमाई का साधन नहीं, बल्कि परिवार का अहम हिस्सा भी है।
मुर्राह नस्ल की भैंस क्यों है इतनी खास?
मुर्राह भारत की प्रमुख स्वदेशी भैंस नस्लों में शामिल है। हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में इस नस्ल का पालन बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसकी अच्छी दुग्ध उत्पादन क्षमता के कारण डेयरी व्यवसाय से जुड़े पशुपालकों के बीच इसकी काफी मांग रहती है।
मुर्राह नस्ल के विकास और संरक्षण के लिए वैज्ञानिक प्रजनन, संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और बेहतर पशु प्रबंधन जरूरी हैं। इन उपायों से पशुपालकों को उत्पादन बढ़ाने और डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिल सकती है।
पशुपालकों के लिए क्या है दुर्गा की उपलब्धि का संदेश?
हरियाणा की भैंस दुर्गा की उपलब्धि यह बताती है कि बेहतर पशु प्रबंधन, उचित पोषण और नियमित देखभाल डेयरी क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, हर पशु का दूध उत्पादन उसकी नस्ल, आनुवंशिक क्षमता, उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकता है।
पशुपालन विभाग भी स्वदेशी नस्लों के संरक्षण, वैज्ञानिक प्रजनन तकनीकों और आधुनिक डेयरी प्रबंधन को बढ़ावा देने पर जोर देता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, पशुपालकों की आय और डेयरी व्यवसाय को मजबूती मिल सकती है।
निष्कर्ष: मिर्चपुर गांव की दुर्गा ने एक दिन में 41.58 किलोग्राम दूध उत्पादन कर अपनी खास पहचान बनाई है। सरसों के तेल से मालिश, संतुलित आहार और आरामदायक व्यवस्था के साथ उसकी देखभाल की जाती है। पशुपालक नवदीप के लिए दुर्गा की यह उपलब्धि गर्व का विषय है और क्षेत्र के दूसरे पशुपालकों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।