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यूपी विधानसभा चुनाव 2027: ओवैसी का बड़ा बयान, BJP को रोकने के लिए गठबंधन को तैयार

By aonenewstv | Published: Oct 26, 2026 02:24 AM

यूपी विधानसभा चुनाव 2027: ओवैसी का बड़ा ऐलान, BJP को रोकने के लिए गठबंधन को तैयार AIMIM, अखिलेश यादव पर भी साधा निशाना

कैराना की जनसभा में असदुद्दीन ओवैसी ने कहा—योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए करेंगे हरसंभव प्रयास; मुस्लिम प्रतिनिधित्व और मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर समाजवादी पार्टी से पूछे सवाल

शामली/लखनऊ, 26 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश की राजनीति में गठबंधन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को शामली जिले के कैराना में आयोजित जनसभा में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों पर निशाना साधा।

ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार दोबारा बनने से रोकने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि AIMIM मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार प्रदेश की सत्ता में नहीं देखना चाहती।

इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों के सामने गठबंधन का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि यदि अन्य पार्टियां भी भाजपा को सत्ता में आने से रोकना चाहती हैं, तो उनकी पार्टी उनके साथ मिलकर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है।

ओवैसी के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दलों के बीच संभावित गठबंधन और सीटों के तालमेल की चर्चा तेज हो गई है।

कैराना की जनसभा से ओवैसी ने दिया गठबंधन का संदेश

रविवार, 25 अक्टूबर को शामली जिले के कैराना में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया।

उन्होंने कहा कि AIMIM का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को फिर से सरकार बनाने से रोकना है।

ओवैसी ने विपक्षी दलों को संदेश देते हुए कहा कि यदि वे भी इसी उद्देश्य के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं, तो AIMIM गठबंधन के लिए तैयार है।

हालांकि, उन्होंने किसी विशेष विपक्षी दल के साथ गठबंधन की अंतिम घोषणा नहीं की।

उनके इस बयान को आगामी चुनाव में विपक्षी एकजुटता की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन गठबंधन का वास्तविक स्वरूप राजनीतिक दलों के बीच बातचीत और सहमति के बाद ही स्पष्ट होगा।

योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने से रोकने की बात

AIMIM प्रमुख ने जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा सरकार को लेकर भी अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट की।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी नहीं चाहती कि योगी आदित्यनाथ तीसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें।

ओवैसी ने कहा कि भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए AIMIM राजनीतिक स्तर पर प्रयास करेगी।

उन्होंने विपक्षी दलों से भी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की अपील की।

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों ने अपने-अपने संगठन को मजबूत करने और संभावित गठबंधन की रणनीतियों पर काम तेज कर दिया है।

विपक्षी दलों पर भी उठाए सवाल

ओवैसी ने अपने संबोधन में भाजपा के साथ-साथ विपक्षी दलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यकों और समाज के कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दों को विपक्षी दल पर्याप्त मजबूती से नहीं उठा रहे हैं।

AIMIM प्रमुख ने राज्य में मस्जिदों को तोड़े जाने और कथित ‘हाफ एनकाउंटर’ की घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में विपक्षी पार्टियों की प्रतिक्रिया अपेक्षित स्तर पर नहीं दिखाई देती।

ये ओवैसी की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। संबंधित घटनाओं और उनके कानूनी पहलुओं का मूल्यांकन स्वतंत्र तथ्यों तथा आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना आवश्यक है।

अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला

कैराना की जनसभा में ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी निशाने पर लिया।

उन्होंने समाजवादी पार्टी में परिवार के सदस्यों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पार्टी में कुछ महत्वपूर्ण संसदीय क्षेत्रों पर एक ही परिवार का प्रभाव बना हुआ है।

ओवैसी ने समाजवादी पार्टी का नाम बदलकर ‘समाजवादी यादव परिवार’ रखने की टिप्पणी भी की।

उन्होंने मुस्लिम समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिन संसदीय क्षेत्रों में पहले मुस्लिम नेता निर्वाचित होते थे, वहां अब समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं के परिवार के सदस्य चुनाव लड़ते और जीतते हैं।

ओवैसी ने इसे मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा विषय बताते हुए समाजवादी पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाए।

आजमगढ़ और फिरोजाबाद की सीटों का किया जिक्र

अपने संबोधन में AIMIM प्रमुख ने आजमगढ़ और फिरोजाबाद लोकसभा क्षेत्रों का विशेष उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों से पूर्व में मुस्लिम नेता सांसद निर्वाचित होते रहे हैं, लेकिन बाद में समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं के परिवार के सदस्य इन सीटों से सांसद बने।

ओवैसी ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन तो चाहती है, लेकिन नेतृत्व में उनकी भागीदारी के सवाल पर पर्याप्त अवसर नहीं देती।

उनकी इस टिप्पणी का केंद्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व और दलों के भीतर नेतृत्व के अवसरों का मुद्दा रहा।

हालांकि, किसी निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार का चयन और चुनावी जीत विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और संगठनात्मक परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर भी अखिलेश यादव को घेरा

ओवैसी ने वर्ष 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों का उल्लेख करते हुए तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे और दंगों के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े थे।

ओवैसी ने दावा किया कि लगभग 50 हजार लोग विस्थापित हुए थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि दंगों के दौरान प्रभावित परिवारों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

AIMIM प्रमुख ने समाजवादी पार्टी से उस दौर की घटनाओं को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की।

मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान हुई हिंसा और विस्थापन का मुद्दा लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय रहा है।

मुस्लिम युवाओं को नेतृत्व देने की बात

ओवैसी ने मुस्लिम समाज के युवाओं की राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में नेतृत्व करने की क्षमता रखने वाले युवाओं की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें राजनीतिक मंच और अवसर मिलने चाहिए।

AIMIM प्रमुख के अनुसार उनकी पार्टी ऐसे युवाओं को आगे लाने और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अवसर देने के लिए काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के युवाओं को केवल मतदाता के रूप में नहीं, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व में भी भागीदारी मिलनी चाहिए।

ओवैसी ने अपने संबोधन में युवाओं को राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया।

यूपी चुनाव 2027 में AIMIM की क्या होगी रणनीति?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर AIMIM की रणनीति में गठबंधन और संगठन विस्तार दोनों महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।

ओवैसी लगातार प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जनसभाओं के माध्यम से अपनी पार्टी की राजनीतिक स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।

कैराना की सभा में उन्होंने विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की इच्छा जताई, लेकिन किसी दल के साथ सीटों के बंटवारे या औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं की।

ऐसे में आगामी दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि AIMIM किन राजनीतिक दलों से बातचीत करती है और चुनाव में कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारने का निर्णय लेती है।

पार्टी के सामने संगठन को मजबूत करने और विभिन्न सामाजिक वर्गों तक अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की चुनौती भी रहेगी।

उत्तर प्रदेश में गठबंधन की राजनीति पर बढ़ी चर्चा

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और अन्य राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव गठबंधन में लड़ा था। अब विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक समीकरण और सीटों के तालमेल पर चर्चा जारी है।

इसी बीच AIMIM की ओर से विपक्षी गठबंधन की इच्छा जताए जाने से संभावित राजनीतिक विकल्पों पर बहस बढ़ी है।

हालांकि, किसी भी गठबंधन के गठन के लिए संबंधित दलों की सहमति, सीटों का बंटवारा और साझा चुनावी रणनीति महत्वपूर्ण होंगे।

कैराना से दिया राजनीतिक संदेश

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कैराना क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी चर्चाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

इस क्षेत्र में विभिन्न दलों की सक्रियता के बीच ओवैसी की जनसभा को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

जनसभा में उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों की आलोचना करने के साथ समाजवादी पार्टी से मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व और पूर्ववर्ती शासनकाल की घटनाओं पर सवाल पूछे।

इस तरह AIMIM ने अपनी राजनीतिक स्थिति भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों से अलग रखने का प्रयास किया, जबकि भाजपा के खिलाफ संभावित गठबंधन का विकल्प भी खुला रखा।

अब विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया पर नजर

ओवैसी के बयान के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अन्य विपक्षी दल AIMIM के गठबंधन प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं।

फिलहाल किसी औपचारिक गठबंधन की पुष्टि नहीं हुई है।

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच बातचीत, उम्मीदवारों का चयन और चुनावी रणनीति तय होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

कैराना की जनसभा में असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा को सत्ता में लौटने से रोकने का अपना राजनीतिक लक्ष्य दोहराया है। साथ ही उन्होंने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाकर राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बहस को भी आगे बढ़ाया है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले ओवैसी का यह बयान विपक्षी गठबंधन, मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व और प्रदेश की चुनावी रणनीतियों को लेकर चल रही चर्चा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

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