📅 Loading Date & Time...
होम > ताजा > न्यूज़

सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को दिवाली पर जाने की अनुमति दी

By aonenewstv | Published: Oct 26, 2026 08:34 AM

लखीमपुर हिंसा केस: आशीष मिश्रा को दिवाली पर घर जाने की अनुमति, सुप्रीम कोर्ट ने 16 नवंबर तक दी राहत

नई दिल्ली। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को आशीष मिश्रा को दिवाली के दौरान अपने परिवार और करीबी रिश्तेदारों के साथ त्योहार मनाने के लिए लखीमपुर खीरी स्थित अपने घर जाने की अनुमति दे दी। आशीष मिश्रा फिलहाल जमानत पर बाहर हैं, लेकिन जमानत की शर्तों के तहत उन्हें अपने गृह जनपद जाने की अनुमति नहीं थी। अदालत ने पहले से लागू शर्तों के अधीन उन्हें यह राहत दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

आशीष मिश्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत से दिवाली के अवसर पर अपने मुवक्किल को घर जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। दलील दी गई कि परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए उन्हें कुछ समय की छूट दी जाए।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली भी शामिल थे। अदालत ने आशीष मिश्रा को दिवाली मनाने के लिए अपने गृह जनपद जाने की अनुमति दी और पहले से लागू जमानत की शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें 16 नवंबर तक की अवधि के लिए राहत दी गई है।

सुनवाई के दौरान ट्रायल में देरी का मुद्दा उठा

सुनवाई के दौरान लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में चल रहे मुकदमे की प्रगति पर भी चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में कुल 131 गवाह हैं, जिनमें से 90 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। शेष गवाहों की गवाही अभी बाकी है।

पीड़ित पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मुकदमे की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश के तबादले से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने पहले सुनवाई की प्रक्रिया और एक चश्मदीद गवाह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने को लेकर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि ऐसे घटनाक्रम से निष्पक्ष सुनवाई को लेकर चिंताएं पैदा हो सकती हैं।

वहीं, आशीष मिश्रा के वकील ने न्यायाधीश के तबादले को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति पर टिप्पणी करना नहीं, बल्कि मुकदमे की निष्पक्ष और समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करना है।

समय पर पूरा हो मुकदमा, लेकिन जल्दबाजी भी न हो

सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई में संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि मुकदमे का निपटारा समय पर होना चाहिए, लेकिन इतनी जल्दबाजी भी नहीं होनी चाहिए कि गवाहों की गवाही, जिरह या महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रभावित हों। अभियोजन पक्ष को यह सुनिश्चित करना होगा कि गवाह समय पर अदालत में उपस्थित हों और सुनवाई अनावश्यक रूप से लंबित न रहे।

मामले में विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति और गवाहों की गवाही की प्रगति की जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई।

क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा मामला?

लखीमपुर खीरी के तिकुनिया इलाके में 3 अक्टूबर 2021 को किसानों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। यह घटना उस समय हुई जब किसान तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा के काफिले से जुड़ी गाड़ियों की चपेट में आ गए थे। घटना में चार किसानों और एक पत्रकार सहित कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। हिंसा के दौरान दो भाजपा कार्यकर्ताओं और एक वाहन चालक की भी मौत हुई थी।

इस मामले में आशीष मिश्रा सहित कई आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। दिसंबर 2023 में निचली अदालत ने आशीष मिश्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश समेत विभिन्न आरोप तय किए थे, जिसके बाद मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी।

सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2025 में आशीष मिश्रा को जमानत देते हुए उनके आवागमन पर शर्तें लगाई थीं। बाद में कुछ अवसरों पर उन्हें विशेष परिस्थितियों में यात्रा की अनुमति दी गई। अब दिवाली के अवसर पर घर जाने की अनुमति भी उन्हीं शर्तों के अधीन दी गई है।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले की सुनवाई समयबद्ध तरीके से आगे बढ़नी चाहिए। अब मुकदमे में शेष गवाहों के बयान दर्ज किए जाने और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं पर ध्यान रहेगा। आशीष मिश्रा को दिवाली पर घर जाने की अनुमति मिलने से मुकदमे की सुनवाई समाप्त नहीं हुई है और मामला अभी विचाराधीन है।

Scroll to Top