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सर्बिया चुनाव 2026: वुसिक ने मानी हार, छात्र आंदोलन के बीच बड़ा उलटफेर

By aonenewstv | Published: Oct 26, 2026 02:19 AM

सर्बिया चुनाव 2026: अलेक्जेंडर वुसिक ने मानी हार, छात्र आंदोलन ने बदली सत्ता की तस्वीर, 14 साल का राजनीतिक दबदबा टूटा

Serbia Election Results 2026: सर्बिया के संसदीय चुनाव में छात्र समर्थित गठबंधन की ऐतिहासिक जीत, 250 सदस्यीय संसद में 135 से 140 सीटें मिलने का अनुमान, राजधानी बेलग्रेड में सड़कों पर उतरे हजारों लोग

बेलग्रेड/नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2026। यूरोप के बाल्कन क्षेत्र में स्थित सर्बिया की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय तक देश की राजनीति पर प्रभाव रखने वाले अलेक्जेंडर वुसिक ने रविवार, 25 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनाव में अपनी पार्टी की हार स्वीकार कर ली। लगभग दो वर्षों से भ्रष्टाचार और सरकार की कार्यप्रणाली के खिलाफ आंदोलन चला रहे छात्रों के समर्थन वाले गठबंधन ने चुनाव में बड़ी बढ़त हासिल की है।

सर्बिया चुनाव 2026 के शुरुआती अनुमानों के अनुसार छात्र समर्थित ‘स्टूडेंट लिस्ट’ को देश की 250 सदस्यीय संसद में 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं। वहीं वुसिक की सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) के नेतृत्व वाले गठबंधन को लगभग 105 सीटें मिलने का अनुमान है।

इस चुनावी नतीजे को सर्बिया की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। वर्ष 2012 से देश की सत्ता पर प्रभाव रखने वाली सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका है। हालांकि, चुनाव आयोग की अंतिम आधिकारिक घोषणा और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया अभी बाकी है।

वुसिक ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार की चुनावी हार

रविवार को मतदान समाप्त होने के बाद अलेक्जेंडर वुसिक ने बेलग्रेड में अपनी पार्टी के मुख्यालय से चुनावी परिणामों को लेकर बयान दिया।

उन्होंने स्वीकार किया कि उपलब्ध चुनावी नमूनों और शुरुआती अनुमानों के आधार पर उनकी पार्टी चुनाव हार गई है।

वुसिक ने कहा कि छात्र समर्थित सूची ने चुनाव जीत लिया है और उसे संसद में बहुमत मिलने की संभावना है।

उन्होंने अनुमान जताया कि स्टूडेंट लिस्ट को 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि उनके गठबंधन को लगभग 105 सीटों से संतोष करना पड़ सकता है।

सर्बिया की संसद में सरकार बनाने के लिए कम से कम 126 सीटों का समर्थन आवश्यक है। ऐसे में शुरुआती अनुमानों के अनुरूप परिणाम आने पर छात्र समर्थित गठबंधन अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच सकता है।

दो साल के छात्र आंदोलन ने बदला राजनीतिक समीकरण

सर्बिया में छात्र आंदोलन की शुरुआत नवंबर 2024 में नोवी साद शहर के रेलवे स्टेशन पर हुए एक दर्दनाक हादसे के बाद हुई थी।

रेलवे स्टेशन की कंक्रीट छत का एक हिस्सा गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे।

विश्वविद्यालयों के छात्रों ने हादसे की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन शुरू किए।

धीरे-धीरे यह आंदोलन देश के विभिन्न शहरों तक फैल गया। छात्रों के साथ शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया।

आंदोलनकारियों ने सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता, कानून के शासन और जवाबदेही की मांग उठाई।

वुसिक सरकार और उनकी पार्टी ने विपक्ष की ओर से लगाए गए भ्रष्टाचार तथा दमन के आरोपों को बार-बार खारिज किया।

सड़कों से संसद तक पहुंचा छात्रों का आंदोलन

शुरुआत में छात्रों का आंदोलन मुख्य रूप से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दों पर केंद्रित था।

लेकिन समय बीतने के साथ यह आंदोलन देश की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव की मांग करने लगा।

छात्रों ने विभिन्न विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन किए। कई स्थानों पर शिक्षण संस्थानों में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए।

आंदोलन के दौरान छात्र संगठनों ने राजनीतिक दलों से अलग अपनी पहचान बनाए रखने पर जोर दिया।

बाद में छात्र समर्थित उम्मीदवारों की एक चुनावी सूची तैयार की गई, जिसमें विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसानों और विभिन्न पेशों से जुड़े लोगों को शामिल किया गया।

इस तरह सड़क पर शुरू हुआ आंदोलन संसदीय चुनाव में एक प्रमुख राजनीतिक शक्ति बनकर सामने आया।

250 सदस्यीय संसद में छात्र गठबंधन को बहुमत का अनुमान

सर्बिया में 25 अक्टूबर को हुए चुनाव में मतदाताओं ने नेशनल असेंबली की 250 सीटों के लिए मतदान किया।

शुरुआती चुनावी अनुमानों में छात्र समर्थित गठबंधन को स्पष्ट बढ़त दिखाई गई।

चुनाव संबंधी सर्वेक्षणों और शुरुआती मतगणना के अनुमानों के अनुसार स्टूडेंट लिस्ट को लगभग 52 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान सामने आया।

वहीं वुसिक के नेतृत्व वाले गठबंधन को लगभग 39 से 40 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई।

हालांकि, अलग-अलग सर्वेक्षण एजेंसियों और चुनाव निगरानी संस्थाओं के अनुमानों में कुछ अंतर रहा है।

अंतिम परिणामों की पुष्टि सर्बिया के निर्वाचन आयोग की आधिकारिक मतगणना पूरी होने के बाद होगी।

रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाई राजनीतिक बदलाव की संभावना

इस चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी भी चर्चा का प्रमुख विषय रही।

चुनाव के दौरान कई मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं। राजधानी बेलग्रेड सहित अन्य शहरों में बड़ी संख्या में नागरिक मतदान करने पहुंचे।

शुरुआती अनुमानों के अनुसार मतदान प्रतिशत लगभग 70 प्रतिशत के आसपास पहुंच सकता है।

इसे पिछले कई दशकों में सर्बिया के सबसे अधिक भागीदारी वाले चुनावों में गिना जा रहा है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शनों और चुनाव को लेकर बढ़ी जनभागीदारी ने इस मुकाबले को विशेष महत्व दिया।

बेलग्रेड में जश्न, सड़कों पर उतरे हजारों समर्थक

जैसे ही अलेक्जेंडर वुसिक ने चुनावी हार स्वीकार की, राजधानी बेलग्रेड में छात्र समर्थित गठबंधन के समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया।

बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। कई स्थानों पर लोगों ने नाच-गाकर और नारे लगाकर चुनावी बढ़त का स्वागत किया।

विश्वविद्यालयों के छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और आंदोलन में शामिल नागरिक एक-दूसरे को बधाई देते दिखाई दिए।

छात्र आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने इस चुनावी परिणाम को जनता की भागीदारी और लंबे संघर्ष का परिणाम बताया।

उन्होंने कहा कि अब उनकी प्राथमिकता कानून के शासन, जवाबदेही और बेहतर सार्वजनिक संस्थानों के निर्माण की दिशा में काम करना होगी।

अलेक्जेंडर वुसिक का 14 वर्षों का राजनीतिक प्रभाव

अलेक्जेंडर वुसिक पिछले एक दशक से अधिक समय तक सर्बिया की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल रहे हैं।

उनकी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी वर्ष 2012 से सत्ता में प्रमुख भूमिका निभाती रही है।

वुसिक ने पहले उपप्रधानमंत्री और फिर प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। वर्ष 2017 में वह देश के राष्ट्रपति बने।

सितंबर 2026 में राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने संसदीय चुनाव में अपनी राजनीतिक भूमिका को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

उनके समर्थक देश में सड़क, रेल, अस्पताल और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विस्तार को उनकी सरकार की उपलब्धि बताते रहे हैं।

वहीं आलोचकों और विपक्षी समूहों ने उनकी सरकार पर मीडिया की स्वतंत्रता, संस्थागत जवाबदेही और राजनीतिक अधिकारों को लेकर सवाल उठाए।

इन मुद्दों ने सर्बिया के राजनीतिक माहौल को लंबे समय तक प्रभावित किया।

वुसिक ने विदेशी हस्तक्षेप के भी लगाए आरोप

चुनावी हार स्वीकार करने के दौरान वुसिक ने कुछ विदेशी शक्तियों पर सर्बिया की राजनीतिक परिस्थितियों को प्रभावित करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कई यूरोपीय देशों और कथित अमेरिकी ‘डीप स्टेट’ की भूमिका को लेकर सवाल उठाए।

हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण सामने नहीं आए हैं।

छात्र आंदोलन से जुड़े समूह पहले भी विदेशी शक्तियों के इशारे पर आंदोलन चलाने के आरोपों को खारिज करते रहे हैं।

चुनावी परिणामों के बाद अब सर्बिया की राजनीति में इन आरोपों और नई सरकार की संभावित नीतियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

यूरोपीय संघ ने चुनावी परिणामों पर दी प्रतिक्रिया

सर्बिया के चुनावी परिणामों पर यूरोपीय नेताओं ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने छात्र समर्थित गठबंधन की चुनावी सफलता पर बधाई दी।

उन्होंने कानून के शासन, मीडिया की स्वतंत्रता, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के प्रयासों में सहयोग की इच्छा जताई।

सर्बिया लंबे समय से यूरोपीय संघ की सदस्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया में शामिल है।

हालांकि, देश की विदेश नीति में रूस, चीन और यूरोपीय संघ के साथ संबंधों का संतुलन महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।

नई सरकार के गठन के बाद इन संबंधों की दिशा पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।

नई सरकार के सामने होंगी कई चुनौतियां

चुनाव में छात्र समर्थित गठबंधन की बढ़त के बाद सबसे बड़ा सवाल नई सरकार के गठन और उसकी प्राथमिकताओं को लेकर है।

स्टूडेंट लिस्ट में अलग-अलग पेशों और विचारधाराओं से जुड़े उम्मीदवार शामिल हैं। ऐसे में सरकार बनने की स्थिति में उनके बीच नीतिगत सहमति बनाना महत्वपूर्ण होगा।

भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच, सार्वजनिक संस्थानों में सुधार, शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना और आर्थिक विकास जैसे मुद्दे नई सरकार के सामने प्रमुख चुनौतियां हो सकते हैं।

इसके अतिरिक्त यूरोपीय संघ की सदस्यता प्रक्रिया, कोसोवो के साथ संबंध और रूस तथा चीन के साथ कूटनीतिक संतुलन भी महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे।

सर्बिया की राजनीति में नए दौर की शुरुआत

सर्बिया चुनाव 2026 के शुरुआती परिणामों ने यह संकेत दिया है कि लंबे समय तक सत्ता में प्रभाव रखने वाली सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी को अब विपक्ष की भूमिका निभानी पड़ सकती है।

छात्र आंदोलन से निकले गठबंधन की सफलता को देश के राजनीतिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जा रहा है।

हालांकि, चुनावी जीत के बाद वास्तविक चुनौती सरकार का गठन, प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन और जनता से किए गए वादों को पूरा करना होगी।

फिलहाल सर्बिया के नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर निर्वाचन आयोग के अंतिम परिणामों तथा नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पर टिकी हुई है।

सर्बिया में लगभग दो वर्षों तक चले छात्र आंदोलन ने संसदीय चुनाव में बड़ा राजनीतिक परिवर्तन ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आंदोलन से उभरा नेतृत्व देश की प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौतियों का किस प्रकार सामना करता है।

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