📅 Loading Date & Time...
होम > ताजा > न्यूज़

Nagpur Dating App Blackmail Case: डेटिंग ऐप से दोस्ती, झूठे केस में फंसाकर 3 करोड़ की वसूली की साजिश, आगरा से आरोपी गिरफ्तार

By aonenewstv | Published: Oct 25, 2026 12:16 PM

Nagpur Dating App Blackmail Case: डेटिंग ऐप से दोस्ती, युवती को 5 लाख का लालच देकर 3 करोड़ वसूलने की साजिश का खुलासा, आरोपी गिरफ्तार

नागपुर में डेटिंग ऐप के जरिए पहचान और कथित ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, 19 वर्षीय युवती को पांच लाख रुपये देने का लालच देकर राजस्थान के एक व्यक्ति के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई गई। जांच में विरोधाभास सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी आदित्य गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया।

नागपुर, 25 अक्टूबर 2026। महाराष्ट्र के नागपुर में डेटिंग ऐप के जरिए दोस्ती, कथित झूठी शिकायत और करोड़ों रुपये की वसूली की साजिश का मामला सामने आया है। पुलिस ने एक व्यक्ति को आपराधिक मामले में फंसाकर उससे तीन करोड़ रुपये वसूलने की कथित योजना का खुलासा किया है।

इस मामले में नागपुर की तहसील पुलिस ने आदित्य सुरेशचंद्र गुप्ता नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने 19 वर्षीय युवती को राजस्थान के एक व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बदले पांच लाख रुपये देने का लालच दिया था।

मामले की शुरुआत युवती की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत से हुई थी। हालांकि, जांच के दौरान युवती के बयानों में विरोधाभास सामने आने के बाद पुलिस को पूरे घटनाक्रम पर संदेह हुआ।

इसके बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की और कथित वसूली की साजिश सामने आने का दावा किया।

डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी युवती और आरोपी की पहचान

नागपुर पुलिस के अनुसार, शिकायत दर्ज कराने वाली 19 वर्षीय युवती शहर के मोमिनपुरा इलाके की रहने वाली है।

वह मनोरंजन और शिक्षा से जुड़े वीडियो तथा सोशल मीडिया रील बनाती है।

पुलिस का कहना है कि युवती काफी समय से एक डेटिंग ऐप का इस्तेमाल कर रही थी।

इसी माध्यम से उसकी पहचान आदित्य सुरेशचंद्र गुप्ता से हुई थी।

दोनों के संपर्क में आने के बाद एक ऐसा घटनाक्रम शुरू हुआ, जिसने बाद में कथित आपराधिक साजिश का रूप ले लिया।

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आदित्य और युवती के बीच किस तरह की बातचीत हुई थी और शिकायत दर्ज कराने की योजना कब बनाई गई।

राजस्थान के इरफान अली के खिलाफ दर्ज हुई थी शिकायत

मामले में शुरुआती शिकायत राजस्थान के रहने वाले इरफान अली के खिलाफ दर्ज कराई गई थी।

युवती ने आरोप लगाया था कि डेटिंग ऐप के जरिए उसकी इरफान से पहचान हुई थी।

शिकायत के मुताबिक, इरफान ने कथित तौर पर खुद को प्रभावशाली व्यक्ति बताया और नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उससे संपर्क बढ़ाया।

युवती ने आरोप लगाया था कि उससे निजी वीडियो प्राप्त किए गए और बाद में उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी दी गई।

इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने इरफान अली समेत चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

हालांकि, बाद में जांच के दौरान युवती के बयान बदलने से शुरुआती शिकायत की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए।

पुलिस जांच के दौरान सामने आया बड़ा मोड़

शिकायत मिलने के बाद नागपुर की तहसील पुलिस ने मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्य जुटाने शुरू किए।

पुलिस को कथित वीडियो और मोबाइल फोन से संबंधित जानकारी की आवश्यकता थी।

इसके लिए युवती को बयान दर्ज कराने और मोबाइल से जुड़े साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए थाने बुलाया गया।

पुलिस के मुताबिक, युवती जब थाने पहुंची तो आदित्य गुप्ता भी उसके साथ मौजूद था।

पूछताछ के दौरान आदित्य का व्यवहार जांच अधिकारियों को असामान्य लगा।

पुलिस का कहना है कि युवती से पूछे जा रहे सवालों के जवाब आदित्य स्वयं देने लगा था।

यहीं से जांच अधिकारियों को मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका होने का संदेह हुआ।

राजनीतिक और कॉर्पोरेट संपर्कों का दावा करने लगा आरोपी

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आदित्य गुप्ता ने राजनीतिक और कॉर्पोरेट क्षेत्र में अपनी पहचान होने का दावा किया।

उसने वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क होने की बात भी कही।

जांच अधिकारियों को संदेह हुआ कि आदित्य युवती के बयान को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है।

इसके बाद पुलिस ने युवती से अलग से पूछताछ करने का फैसला किया।

युवती से स्वतंत्र रूप से बातचीत किए जाने के बाद मामले में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई।

पुलिस के अनुसार, इसी पूछताछ ने पूरे मामले की दिशा बदल दी।

युवती ने कहा—इरफान अली को जानती तक नहीं

पुलिस का दावा है कि अलग से पूछताछ किए जाने पर युवती ने अपनी शुरुआती शिकायत से अलग जानकारी दी।

उसने कथित तौर पर बताया कि वह राजस्थान निवासी इरफान अली को नहीं जानती।

युवती ने यह भी कहा कि डेटिंग ऐप या सोशल मीडिया पर उसकी इरफान से कोई बातचीत नहीं हुई थी।

पुलिस के अनुसार, युवती ने बताया कि आदित्य गुप्ता के कहने पर उसने इरफान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

इस बयान के बाद पुलिस को संदेह हुआ कि शिकायत किसी पूर्वनियोजित योजना का हिस्सा हो सकती है।

जांच अधिकारियों ने इसके बाद आदित्य की भूमिका और दोनों के बीच हुई बातचीत की पड़ताल शुरू की।

पांच लाख रुपये का लालच देने का आरोप

नागपुर पुलिस की जांच में यह आरोप सामने आया कि आदित्य गुप्ता ने युवती को इरफान अली के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बदले पांच लाख रुपये देने का लालच दिया था।

पुलिस के मुताबिक, कथित योजना का उद्देश्य इरफान को गंभीर आपराधिक आरोपों में उलझाना था।

इसके बाद उस पर दबाव बनाकर बड़ी रकम वसूलने की कोशिश किए जाने का संदेह है।

जांच में तीन करोड़ रुपये की कथित वसूली की योजना सामने आने का दावा किया गया है।

हालांकि, पुलिस अभी यह जांच कर रही है कि इस रकम की मांग किस तरह की गई थी और क्या कोई वास्तविक लेनदेन हुआ था।

तीन करोड़ रुपये की पूरी राशि वसूल लिए जाने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

तीन करोड़ रुपये की वसूली की कथित साजिश

पुलिस का कहना है कि इस मामले में झूठे आपराधिक आरोपों को कथित रूप से दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने की योजना थी।

जांच एजेंसियों के अनुसार, किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज होने से उस पर कानूनी और सामाजिक दबाव बढ़ सकता है।

आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर इरफान अली से तीन करोड़ रुपये हासिल करने की योजना बनाई गई थी।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित साजिश में आदित्य के अलावा अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।

साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या आरोपी ने पहले भी इसी तरह किसी अन्य व्यक्ति को निशाना बनाया था।

आदित्य गुप्ता को पुलिस ने किया गिरफ्तार

मामले में आदित्य गुप्ता की कथित भूमिका सामने आने के बाद नागपुर पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की।

पुलिस की कार्रवाई के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

आदित्य मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा का रहने वाला बताया गया है।

गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।

पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर कथित साजिश से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

पुणे और दिल्ली के मामलों की भी जांच

नागपुर के पुलिस उपायुक्त जोन-3 राहुल मदने के अनुसार, जांच में आदित्य गुप्ता के खिलाफ पुणे और दिल्ली में भी इसी तरह के मामलों से संबंधित जानकारी सामने आई है।

पुलिस अब इन मामलों की जानकारी जुटा रही है।

जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या अलग-अलग शहरों में सामने आए मामलों के बीच कोई संबंध है।

साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या किसी अन्य व्यक्ति को इसी तरह कथित रूप से ब्लैकमेल किया गया था।

इन मामलों में आरोपी की वास्तविक भूमिका और संभावित संबंधों का निर्धारण जांच के आधार पर किया जाएगा।

मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल

इस मामले में मोबाइल फोन और ऑनलाइन बातचीत से जुड़े साक्ष्य महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

पुलिस युवती तथा आरोपी के बीच हुए संपर्क और शिकायत दर्ज कराने से पहले की परिस्थितियों की जांच कर रही है।

डेटिंग ऐप से संबंधित बातचीत, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल जानकारी से कथित साजिश की कड़ियां जोड़ने में मदद मिल सकती है।

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या शिकायत के लिए कोई सामग्री तैयार की गई थी या किसी व्यक्ति को दबाव में लाने की कोशिश हुई थी।

डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद ही इन सवालों पर अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।

ऑनलाइन डेटिंग के जरिए ब्लैकमेलिंग का खतरा

नागपुर का यह मामला ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क बनाने और उसके संभावित दुरुपयोग से जुड़ी चिंताओं को भी सामने लाता है।

डेटिंग ऐप और सोशल मीडिया पर नए लोगों से बातचीत करना सामान्य बात है, लेकिन अनजान व्यक्तियों के साथ निजी जानकारी साझा करते समय सावधानी जरूरी है।

किसी भी व्यक्ति को निजी फोटो, वीडियो, बैंकिंग विवरण या संवेदनशील जानकारी साझा करने से पहले सामने वाले की पहचान और विश्वसनीयता पर ध्यान देना चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति निजी सामग्री सार्वजनिक करने की धमकी देकर रकम मांगता है, तो उसके दबाव में आने के बजाय पुलिस या साइबर अपराध से संबंधित आधिकारिक माध्यमों पर शिकायत करना उचित है।

ऐसे मामलों में संबंधित संदेशों और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना जांच में सहायक हो सकता है।

झूठी शिकायतों से वास्तविक पीड़ितों के मामलों पर भी पड़ता है असर

किसी व्यक्ति को फंसाने के उद्देश्य से कथित रूप से झूठी शिकायत दर्ज कराने का मामला गंभीर कानूनी प्रश्न खड़े करता है।

यदि जांच में शिकायत जानबूझकर गलत पाए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

वहीं वास्तविक उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग के पीड़ितों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

किसी एक मामले में कथित झूठी शिकायत सामने आने का अर्थ यह नहीं है कि अन्य शिकायतों को संदेह की नजर से देखा जाए।

पुलिस का दायित्व उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करना है।

पुलिस के सामने कई अहम सवाल

नागपुर पुलिस अब कथित साजिश से जुड़े कई सवालों के जवाब तलाश रही है।

जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि आदित्य गुप्ता ने युवती को शिकायत दर्ज कराने के लिए किस प्रकार तैयार किया।

इसके अलावा तीन करोड़ रुपये की कथित मांग की योजना किसने बनाई और क्या इसमें अन्य व्यक्तियों की भूमिका थी, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी के खिलाफ अन्य शहरों में दर्ज मामलों का इस घटना से कोई संबंध है या नहीं।

इन सभी सवालों के जवाब डिजिटल साक्ष्यों, पूछताछ और आगे की जांच के आधार पर सामने आएंगे।

नागपुर डेटिंग ऐप ब्लैकमेल केस में जांच जारी

नागपुर के इस मामले में शुरुआती शिकायत और बाद में सामने आए बयानों के बीच विरोधाभास ने पुलिस जांच को नया मोड़ दिया।

19 वर्षीय युवती को पांच लाख रुपये देने का कथित लालच, राजस्थान निवासी इरफान अली के खिलाफ शिकायत और तीन करोड़ रुपये वसूलने की कथित योजना इस मामले के प्रमुख पहलू हैं।

आदित्य गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अन्य संभावित आरोपियों और संबंधित मामलों की जांच कर रही है।

फिलहाल तीन करोड़ रुपये की कथित वसूली की साजिश पुलिस जांच का विषय है। आरोपी पर लगे आरोपों की अंतिम सत्यता न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर ही निर्धारित होगी।

Scroll to Top