गाजियाबाद में चुनाव ड्यूटी से गायब 6 कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई, FIR दर्ज कराने और एक वेतनवृद्धि रोकने के आदेश
मेरठ खंड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन में पोलिंग पार्टियों की रवानगी के दौरान अनुपस्थित मिले छह कर्मचारी; जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मॉंदड़ ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए
गाजियाबाद, 23 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मेरठ खंड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन में निर्वाचन ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले छह कर्मचारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी रविंद्र कुमार मॉंदड़ ने निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण कार्य में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सभी छह कर्मचारियों की एक-एक वेतनवृद्धि रोकने और उनके विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
प्रशासन की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, 22 अक्टूबर 2026 को गाजियाबाद के हापुड़ चुंगी स्थित इंग्राहम इंटर कॉलेज से मतदान दलों को रवाना किया जा रहा था। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात छह कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। इनमें राज्य कर विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग और लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी शामिल हैं।
पोलिंग पार्टियों की रवानगी के दौरान सामने आई अनुपस्थिति
मेरठ खंड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से मतदान कार्मिकों की ड्यूटी लगाई गई थी।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 22 अक्टूबर को इंग्राहम इंटर कॉलेज, हापुड़ चुंगी से पोलिंग पार्टियों की रवानगी की व्यवस्था की गई थी।
मतदान दलों में पीठासीन अधिकारी तथा विभिन्न श्रेणियों के मतदान अधिकारी शामिल होते हैं। इनकी जिम्मेदारी मतदान प्रक्रिया को निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप संपन्न कराना होती है।
प्रेस नोट के अनुसार, पोलिंग पार्टियों की रवानगी के दौरान उपस्थिति की जांच में छह कर्मचारी अपनी निर्धारित ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिले।
इस मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया और संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश जारी किए।
राज्य कर विभाग के दो सहायक आयुक्त अनुपस्थित
प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, अनुपस्थित कर्मचारियों में राज्य कर विभाग के दो सहायक आयुक्त भी शामिल हैं।
इनकी पहचान पंकज कुमार सिंह और राहुल कुमार के रूप में की गई है।
दोनों अधिकारियों की ड्यूटी पीठासीन अधिकारी के रूप में लगाई गई थी।
पीठासीन अधिकारी मतदान केंद्र पर चुनाव प्रक्रिया के संचालन और निर्धारित निर्वाचन नियमों के पालन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाता है।
ऐसे में इस पद पर नियुक्त अधिकारियों की अनुपस्थिति को प्रशासन ने गंभीर मामला माना है।
बेसिक शिक्षा विभाग के दो कर्मचारी भी शामिल
निर्वाचन ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए कर्मचारियों में बेसिक शिक्षा विभाग के दो कर्मचारी भी शामिल हैं।
इनके नाम अमित कश्यप और अनिल कुमार बताए गए हैं।
दोनों की ड्यूटी मतदान अधिकारी प्रथम के रूप में निर्धारित की गई थी।
मतदान अधिकारी प्रथम मतदान प्रक्रिया में मतदाताओं की पहचान और संबंधित निर्वाचन कार्यों के संचालन में निर्धारित नियमों के अनुसार जिम्मेदारी निभाता है।
प्रशासन के अनुसार, इन दोनों कर्मचारियों की अनुपस्थिति भी पोलिंग पार्टियों की रवानगी के दौरान सामने आई।
लोक निर्माण विभाग के दो कर्मचारी भी गैरहाजिर
अनुपस्थित कर्मचारियों में लोक निर्माण विभाग के कुंवर पाल सिंह और अनुज कुमार भी शामिल हैं।
दोनों को मतदान अधिकारी तृतीय के रूप में निर्वाचन ड्यूटी सौंपी गई थी।
निर्धारित ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होने के कारण इन कर्मचारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
इस प्रकार कुल छह कर्मचारियों में दो पीठासीन अधिकारी, दो मतदान अधिकारी प्रथम और दो मतदान अधिकारी तृतीय शामिल हैं।
अनुपस्थित कर्मचारियों की सूची
जिला प्रशासन की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, अनुपस्थित पाए गए कर्मचारियों का विवरण इस प्रकार है:
| क्रम संख्या | कर्मचारी का नाम | विभाग | निर्वाचन ड्यूटी |
|---|---|---|---|
| 1 | पंकज कुमार सिंह | राज्य कर विभाग | पीठासीन अधिकारी |
| 2 | राहुल कुमार | राज्य कर विभाग | पीठासीन अधिकारी |
| 3 | अमित कश्यप | बेसिक शिक्षा विभाग | मतदान अधिकारी प्रथम |
| 4 | अनिल कुमार | बेसिक शिक्षा विभाग | मतदान अधिकारी प्रथम |
| 5 | कुंवर पाल सिंह | लोक निर्माण विभाग | मतदान अधिकारी तृतीय |
| 6 | अनुज कुमार | लोक निर्माण विभाग | मतदान अधिकारी तृतीय |
एक वेतनवृद्धि रोकने के आदेश
जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी रविंद्र कुमार मॉंदड़ ने निर्वाचन ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए सभी छह कर्मचारियों की एक-एक वेतनवृद्धि रोकने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन ने इस अनुपस्थिति को निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण कार्य के प्रति लापरवाही के रूप में लिया है।
सरकारी कर्मचारियों को चुनाव के दौरान सौंपी गई जिम्मेदारियों का निर्वहन निर्धारित नियमों और निर्देशों के अनुसार करना होता है।
निर्वाचन कार्य में अनुपस्थिति से मतदान दलों की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
हालांकि, वेतनवृद्धि रोकने के आदेश के अनुपालन और विभागीय प्रक्रिया की आगे की स्थिति के संबंध में अलग से जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत एफआईआर के निर्देश
जिलाधिकारी ने सभी छह कर्मचारियों के विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी जारी किए हैं।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 भारत में चुनाव संबंधी विभिन्न व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है।
प्रशासन ने निर्वाचन ड्यूटी से अनुपस्थिति के मामले में इसी अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
हालांकि, प्रेस नोट में अधिनियम की विशिष्ट धाराओं का उल्लेख नहीं किया गया है।
यह भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी होना और एफआईआर का वास्तव में दर्ज हो जाना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। उपलब्ध जानकारी में एफआईआर दर्ज हो जाने की पुष्टि नहीं की गई है।
चुनावी कार्य में कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण
विधान परिषद के स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन में मतदान प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को चुनावी जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं।
मतदान दलों में पीठासीन अधिकारी और अन्य मतदान अधिकारी शामिल होते हैं।
प्रत्येक अधिकारी को मतदान केंद्र पर अलग-अलग जिम्मेदारियां निभानी होती हैं।
निर्वाचन ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति आवश्यक होती है, ताकि मतदान दल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।
यदि कोई कर्मचारी बिना उचित कारण निर्धारित ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होता है, तो मतदान दल की व्यवस्था में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
इसलिए निर्वाचन प्रशासन मतदान कार्मिकों की उपस्थिति और जिम्मेदारियों के पालन को विशेष महत्व देता है।
मेरठ खंड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन को लेकर प्रशासन की तैयारी
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मेरठ खंड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन के लिए गाजियाबाद में प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं।
इसी क्रम में 22 अक्टूबर को इंग्राहम इंटर कॉलेज से पोलिंग पार्टियों की रवानगी की व्यवस्था की गई।
मतदान दलों की रवानगी निर्वाचन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण होता है।
इस दौरान मतदान सामग्री, अधिकारियों की उपस्थिति और निर्धारित जिम्मेदारियों का समन्वय आवश्यक होता है।
प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि मतदान केंद्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर उपलब्ध रहें।
ऐसी स्थिति में मतदान कार्मिकों की अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया जाना निर्वाचन प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
तीन विभागों के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई
इस मामले की विशेष बात यह है कि अनुपस्थित पाए गए छह कर्मचारी तीन अलग-अलग सरकारी विभागों से संबंधित हैं।
राज्य कर विभाग के दो सहायक आयुक्तों को पीठासीन अधिकारी बनाया गया था।
बेसिक शिक्षा विभाग के दो कर्मचारियों की ड्यूटी मतदान अधिकारी प्रथम के रूप में लगाई गई थी।
वहीं, लोक निर्माण विभाग के दो कर्मचारियों को मतदान अधिकारी तृतीय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इन सभी कर्मचारियों के विरुद्ध एक समान कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार, सभी छह कर्मचारियों की एक वेतनवृद्धि रोकने तथा एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है।
प्रशासनिक जवाबदेही का मामला
निर्वाचन प्रक्रिया में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
मतदान की निष्पक्षता और व्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों तथा कर्मचारियों को निर्धारित जिम्मेदारियां दी जाती हैं।
इन जिम्मेदारियों के निर्वहन में लापरवाही सामने आने पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारी नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं।
गाजियाबाद में सामने आया यह मामला भी चुनावी ड्यूटी के प्रति जवाबदेही से जुड़ा है।
हालांकि, अनुपस्थित कर्मचारियों की ओर से कोई स्पष्टीकरण दिया गया है या नहीं, इसकी जानकारी प्रेस नोट में उपलब्ध नहीं है।
इसलिए कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारणों के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
जिलाधिकारी के आदेश के बाद आगे की प्रक्रिया पर नजर
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मॉंदड़ द्वारा कार्रवाई के आदेश जारी किए जाने के बाद अब संबंधित विभागों और अधिकारियों की ओर से उनके अनुपालन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
एक वेतनवृद्धि रोकने के निर्देशों पर संबंधित सेवा नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, एफआईआर दर्ज कराने के आदेशों के संबंध में पुलिस और निर्वाचन प्रशासन की आगे की कार्रवाई की जानकारी सामने आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
फिलहाल प्रशासन की ओर से जारी सूचना में छह कर्मचारियों की अनुपस्थिति और उनके विरुद्ध कार्रवाई के आदेशों की पुष्टि की गई है।
गाजियाबाद में मेरठ खंड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन के दौरान ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए छह कर्मचारियों के खिलाफ जिलाधिकारी ने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। राज्य कर विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग और लोक निर्माण विभाग के इन कर्मचारियों की एक-एक वेतनवृद्धि रोकने तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन के इस कदम से निर्वाचन ड्यूटी में जिम्मेदारी और अनुशासन के महत्व का संदेश सामने आया है।