अयोध्या में अमृत सरोवर योजना पर उठे सवाल, गड्ढोंपुर तालाब का काम अधूरा होने का आरोप
रिपोर्ट: पंकज पाठक
अयोध्या। अयोध्या नगर निगम की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। लाला लाजपत राय वार्ड के गड्ढोंपुर स्थित तालाब के पुनर्विकास कार्य को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी सामने आई है। आरोप है कि निर्धारित समयसीमा बीतने के बावजूद तालाब का काम पूरा नहीं हो सका है। अधूरा निर्माण, फैली झाड़ियां, रास्तों की परेशानी और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर उठाए जा रहे सवालों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में अयोध्या के मेयर गिरीशपति ने इस योजना को सात महीने में पूरा कराने का आश्वासन दिया था। हालांकि, आरोप है कि तय समय के बाद भी योजना पूरी नहीं हो सकी। इस स्थिति ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और विकास योजनाओं की निगरानी को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
अधूरा तालाब और फैली झाड़ियां बनी परेशानी
गड्ढोंपुर का तालाब क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया जाता है। स्थानीय दावे के अनुसार, यह तालाब भूजल स्तर बनाए रखने में भी भूमिका निभाता था। आरोप है कि तालाब की खुदाई और पुनर्विकास के दौरान काम को व्यवस्थित ढंग से आगे नहीं बढ़ाया गया, जिसके कारण परियोजना अधूरी पड़ी है।
शिकायत में निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सामग्री के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि तालाब परिसर में झाड़ियां फैल गई हैं और उनकी नियमित सफाई नहीं कराई गई। इससे योजना का उद्देश्य प्रभावित होने के साथ आसपास के क्षेत्र की स्थिति भी खराब बनी हुई है।
खुदाई के बाद रास्ते बंद होने का आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया गया है कि तालाब की खुदाई मनमाने तरीके से किए जाने के कारण आसपास के कई रास्ते महीनों से बंद हैं। इससे स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तालाब से निकली मिट्टी की बड़ी मात्रा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि हजारों ट्रक मिट्टी बाहर ले जाई गई या बेच दी गई, लेकिन इसके बावजूद परियोजना का काम पूरा नहीं हुआ। हालांकि, मिट्टी की मात्रा, उसके निस्तारण और बिक्री से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
अमृत सरोवर परियोजना की निगरानी पर सवाल
गड्ढोंपुर तालाब के मामले ने विकास कार्यों की निगरानी, समयसीमा और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि ठेकेदार की मनमानी और जिम्मेदार अधिकारियों की कथित लापरवाही के कारण परियोजना प्रभावित हो रही है। कमीशनखोरी और बजट के समुचित इस्तेमाल को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अमृत सरोवर जैसी योजनाओं का उद्देश्य जल संरक्षण, भूजल स्तर को बनाए रखने और स्थानीय जलस्रोतों को बेहतर बनाना है। ऐसे में यदि तालाब का पुनर्विकास समय पर पूरा नहीं होता, तो इससे योजना के अपेक्षित लाभों पर असर पड़ सकता है।
नगर निगम से जवाबदेही की मांग
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि गड्ढोंपुर तालाब के निर्माण कार्य की स्थिति की जांच कराई जाए और परियोजना में देरी के कारणों को सार्वजनिक किया जाए। साथ ही निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता, मिट्टी के निस्तारण, बजट के उपयोग और कार्य की प्रगति की समीक्षा किए जाने की जरूरत बताई जा रही है।
सरकारी विकास योजनाओं की सफलता केवल बजट आवंटित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा होना भी जरूरी है। ऐसे में गड्ढोंपुर तालाब की स्थिति नगर निगम के लिए एक महत्वपूर्ण सवाल बनकर सामने आई है।
नोट: इस मामले में नगर निगम अयोध्या, संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार का पक्ष उपलब्ध नहीं है। उनकी प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी रिपोर्ट में शामिल किया जाना चाहिए।