भारत की प्रति व्यक्ति GDP में बढ़ोतरी, अमीर देशों से कम हो रहा आय का अंतर; दक्षिण कोरियाई अर्थशास्त्री ने की चर्चा
उपशीर्षक: अर्थशास्त्री क्युंगहून किम के मुताबिक भारत की आर्थिक प्रगति से जीवन स्तर में सुधार के संकेत; हालांकि विकसित देशों की बराबरी के लिए अभी लंबा सफर बाकी
नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति और प्रति व्यक्ति आय में हो रही बढ़ोतरी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है। दक्षिण कोरियाई अर्थशास्त्री क्युंगहून किम ने भारत की प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में वृद्धि और अमीर देशों के साथ आय के अंतर को कम करने की दिशा में हो रही प्रगति पर ध्यान दिलाया है।
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अनुमानों के बीच यह चर्चा अहम है। हालांकि, आर्थिक विकास का आकलन केवल कुल GDP से नहीं, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, लोगों की क्रय शक्ति, रोजगार और जीवन स्तर में होने वाले बदलावों से भी किया जाता है।
2025 में भारत की प्रति व्यक्ति GDP 2,702 डॉलर
क्युंगहून किम ने अपनी पोस्ट में साझा किए गए आंकड़ों के आधार पर बताया कि वर्ष 2025 में भारत की प्रति व्यक्ति GDP लगभग 2,702 डॉलर थी। क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity यानी PPP) के आधार पर भी भारत की आर्थिक स्थिति का आकलन किया जाता है, क्योंकि अलग-अलग देशों में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर होता है।
प्रति व्यक्ति GDP किसी देश की कुल आर्थिक गतिविधियों को उसकी आबादी के अनुपात में समझने का एक तरीका है। हालांकि, यह हर नागरिक की वास्तविक कमाई नहीं बताती और न ही देश में आय के वितरण की पूरी तस्वीर पेश करती है।
अमीर देशों के साथ आय का अंतर घटा
क्युंगहून किम के अनुसार, भारत ने पिछले कुछ दशकों में निम्न आय वाले देशों की तुलना में अपनी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है। उनके विश्लेषण के मुताबिक, वर्ष 1990 में भारत की प्रति व्यक्ति GDP उच्च आय वाले देशों के औसत का केवल 6 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 17 प्रतिशत हो गई।
इसी तरह, मध्यम आय वाले देशों के औसत के मुकाबले भी भारत की स्थिति बेहतर हुई है। वर्ष 2025 में भारत की प्रति व्यक्ति GDP मध्यम आय वाले देशों के औसत के लगभग 64 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।
किम का मानना है कि भारत की प्रगति को समझने के लिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि देश आज अमीर देशों से कितना पीछे है। यह भी देखना जरूरी है कि पिछले वर्षों में भारत ने कितनी तेजी से दूरी कम की है।
गरीबी में कमी को भी बताया अहम उपलब्धि
अर्थशास्त्री के विश्लेषण में गरीबी में आई कमी को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। उनके द्वारा उद्धृत आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन 4.40 डॉलर की गरीबी रेखा के आधार पर भारत में गरीबी की दर वर्ष 2004 में 73 प्रतिशत थी, जो 2023 में घटकर 14 प्रतिशत रह गई।
इन आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में लगभग 62.7 करोड़ की कमी आई। हालांकि, गरीबी के आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि अलग-अलग गरीबी रेखाओं और गणना के तरीकों से परिणामों में अंतर हो सकता है।
किम के अनुसार, लगभग 140 करोड़ की आबादी वाले भारत के लिए आर्थिक विकास के साथ गरीबी में कमी आना विशेष महत्व रखता है।
IMF और विश्व बैंक के विकास अनुमानों से भी उम्मीद
भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के विकास अनुमान भी चर्चा में हैं। अक्टूबर 2026 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया। भारतीय रिजर्व बैंक ने इसी अवधि के लिए 7.1 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया है।
दक्षिण कोरियाई अर्थशास्त्री क्युंगहून किम ने भी कहा है कि अगर मौजूदा अनुमान सही साबित होते हैं, तो भारत लगातार पांच वर्षों तक 7 प्रतिशत से अधिक आर्थिक वृद्धि के अपने पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकता है। उनका कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था का आकार अब पहले के मुकाबले काफी बड़ा है, इसलिए समान विकास दर का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव भी कहीं अधिक होता है।
हालांकि, आर्थिक विकास के सकारात्मक संकेतों के बावजूद भारत के सामने रोजगार, आय में असमानता, शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर में व्यापक सुधार जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
भारत की आर्थिक प्रगति पर क्या है अर्थशास्त्री की राय?
क्युंगहून किम का मानना है कि भारत की आर्थिक प्रगति और विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ अंतर कम करने की कोशिशों को स्वीकार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, देश के सामने अभी कई चुनौतियां हैं, लेकिन पिछले दशक में आर्थिक स्थिति में आए बदलाव और भविष्य की विकास संभावनाएं उत्साहजनक हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत जैसे विशाल देश में आर्थिक प्रगति का असर करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ सकता है। इसलिए विकास दर के साथ-साथ गरीबी में कमी और जीवन स्तर में सुधार को भी महत्वपूर्ण संकेतक माना जाना चाहिए।
निष्कर्ष: भारत की प्रति व्यक्ति GDP में बढ़ोतरी और गरीबी में कमी देश की आर्थिक प्रगति के अहम संकेत हैं। दक्षिण कोरियाई अर्थशास्त्री क्युंगहून किम के विश्लेषण के मुताबिक, भारत अमीर देशों के साथ आय का अंतर धीरे-धीरे कम कर रहा है। हालांकि, इस प्रगति को टिकाऊ बनाने के लिए रोजगार, समान अवसर और आम लोगों की आय में सुधार पर लगातार ध्यान देना जरूरी होगा।